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Monday, May 13, 2019

आयुर्वेद और केसर का रिश्ता। Benefits of Saffron according to ayurved.

आयुर्वेद के अनुसार केसर और स्वास्थ में रिश्ता Ayurveda and Saffron:

स्वास्थ्य को मिलने वाले केसर के फायदे तो आप ज़रूर जानते होंगे। दूध में केसर डालकर पीना काफी अच्छा होता है, खासतौर से गर्भवती महिलाओं के लिए। यह एक कामशक्ति बढ़ाने वाला रसायन है। महिलाओं की कुछ बीमारियों में यह रामबाण साबित होता है। 


बच्चे के जन्म के बाद गर्भाशय की सफाई के लिए कुछ दिनों तक इसका नियमित सेवन करना बहुत अच्छा रहता है। केसर को सभी मसालों का राजा कहा जाता है। इसे सैफ्रॉन या जाफरान के नाम से भी जानते हैं। यह दुनियाभर में सबसे कीमती मसालों में से एक है। यह कई फ्लेवर में पाया जाता है और स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी होता है। क्योंकि केसर सौंदर्य निखारने में सहयोगी है, इसलिए सुंदर एवं गोरे बच्चे को पाने के लिए गर्भवती महिलाएं अपने आहार में केसर को शामिल करने की कोशिश करती हैं।


केसर इतना महंगा क्यों Why Saffron too costly?

यह हमेशा मुद्दा होता है कि यह इतना महंगा क्यों , इसका कारण इसके उत्पादन में मौसम की बाध्यता सबसे  मुख्य है।मगर ऐसी क्या बात है इस केसर में जो यह इतना महंगा है इसके अन्य भी कारण है जैसे खाद्य पदार्थ तो और भी कई हैं जो हमें काफी फायदा देते हैं। 



केसर का अनूठा स्वाद इसमें मौजूद केमिकल कंपाउंड पिक्रोक्रोकिन और सैफ्रानाल के कारण होता है इसलिए इसके अनोखे स्वाद की वजह से केसर का उपयोग दुनियाभर के कई पाक व्यंजनों में किया जाता है। केसर के इतना महंगा होने की क्या वजह है? इसके पीछे छिपा है एक ऐसा इतिहास जिसके बारे में काफी कम लोग जानते हैं। रोजाना थोड़ी मात्रा में केसर लेने से शरीर में कई प्रकार के रोग नहीं होते हैं। 

केसर के फायदे Benefits of Saffron:


१) अगर ज्यादा सर्दी-खांसी हो रही हो तो केसर दी जाती है क्योंकि ये कफ का नाश करने वाली औषधि है। शिशुओं को अगर सर्दी जकड़ ले और नाक बंद हो जाये तो मां के दूध में केसर मिलाकर उसके माथे और नाक पर मला जाये तो सर्दी का प्रकोप कम होता है और उसे आराम मिलता है। 



२) रात को सोने से पहले दूध में केसर डालकर पीने से अनिद्रा की शिकायत दूर होती है। अनिद्रा की शिकायत को दूर करने में भी केसर काफी उपयोगी होता है। इसके साथ ही यह अवसाद को भी दूर करने में मदद करता है। 



३) केसर की एक विशेष किस्म गठिया या वात रोग में राहत प्रदान करती है। केसर में पाये जाने वाला क्रोसेटिन मस्तिष्क में ऑक्सीजेनेशन को बढ़ाता है जिसके परिणामस्वरूप अर्थराइटिस के इलाज में काफी आसानी हो जाती है। 



४) सिर दर्द को दूर करने के लिए केसर का उपयोग किया जा सकता है। सिर दर्द होने पर चंदन और केसर को मिलाकर सिर पर इसका लेप लगाने से सिर दर्द में राहत मिलती है।

५) महिलाओं की कई शिकायतें जैसे - मासिक चक्र में अनियमिता, गर्भाशय की सूजन, मासिक चक्र के समय दर्द होने जैसी समस्याओं में केसर का सेवन करने से आराम मिलता है।



६) त्वचा को निखारने और सुन्दर बनाने के भी गुण केसर में पाए जाते है। महिलाएं अगर इसका सही तरीके से और सही मात्रा में सेवन करें तो त्वचा सुन्दर लगने लगती है। 

७) केसर और दूध का मिलाप बहुत प्रचलित तथा काफी चर्चित है, यह कई तरह की शारीरिक परेशानियां तो दूर करता ही है। साथ ही हमें ऊर्जा भी देता है, ताकि अनचाही छोटी-छोटी बीमारियों से बचा जा सके।

८) पुरूषों में वीर्य शक्ति बढ़ाने हेतु शहद, बादाम और केसर लेने से फायदा होता है। पेट संबंधित बीमारियों के इलाज में केसर बहुत फायदेमंद है। 





Saturday, May 11, 2019

गुड़ के सेवन के फायदे और नुकसान। Benefits of jaggery.

आयुर्वेद में गुड़ के सेवन को उत्तम क्यों बताया गया है Why ayurved suggest to eat Jaggery? 

यदि आप अपने मीठा खाने के शौक को भी पूरा करना चाहते हैं और अपनी सेहत के साथ भी समझौता नहीं करना चाहते हैं तो गुड़ आपके लिए एक बेस्ट आप्शन होता हैं। आयुर्वेद में भी गुड के उपयोग को फ़ायदेमंद बताया गया है, यह फेफड़ो में जमी गंदगी को सॉफ करता है। गुड में बहुत से औषधीय गुण होते हैं, कुछ लोग इसे ऐसे ही चबाना पसंद करते हैं, तो कुछ दूध या चाय में मिलकर पीते हैं, लेकिन आज हम आपको गुड़ खाने का एक ऐसा हैल्दी तरीका बताने जा रहे हैं जिसके प्रयोग से आपको कई तरह की स्वास्थ सम्बंधित परेशानियों से छुटकार मिल जाएगा।



गुड़ में चीनी का बाहुल्य होता है और इसकी मात्रा कभी कभी 90 प्रतिशत से भी अधिक तक पहुँच जाती है। इसके अतिरिक्त इसमें ग्लूकोज़, फ्रुक्टोज़, खनिज (चूना, पोटाश, फासफ़ोरस आदि) भी अल्प मात्रा में रहते हैं। इसमें जल का भी थोड़ा अंश रहता है जो ऋतु के अनुसार घटता बढ़ता रहता है। भारत एक ऐसा देश हैं जहाँ अक्सर लोगो को मीठा खाने का बड़ा शौक होता हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बढ़ती हेल्थ प्रॉब्लम के चलते अधिक मीठा खाने से परहेज करते हैं। आमतौर पर लोग सर्दियों के मौसम में ही इसका प्रयोग करते हैं, जबकि इसे साल भर खाया जा सकता है और शरीर को इसे ढेरों लाभ भी मिलते हैं। इसे आपको अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

गुड़ के प्रकार Type of Jaggery:


गुड़ कई प्रकार और आकार का होते हुए भी वस्तुत: एक ही पदार्थ है। ताड़ से प्राप्त ताड़ का गुड़ कहा जाता है, पर गन्ने से प्राप्त गुड़ इतना प्रचलित है कि इसे लोग केवल गुड़ ही कहते हैं। इसके विपरीत भी गुड़ का कई तरह से वर्गीकरण किया जा सकता है, जैसे साफ किया हुआ गुड़ एवं बिना साफ किया हुआ गुड़, छोटी पिंडियों एवं बड़ी पिंडियोंवाला आदि। 



रख दिए जाने पर, अर्थात् पुराना होने पर, इसके गुणों में परिवर्तन होता जाता है। इसलिये नया गुड़, एवं पुराना गुड़ इस भाँति भी उपयोग में इसका विवरण आता है। गुड़ स्‍वाद का ही नहीं बल्‍कि सेहत का भी खजाना है, ऐसा इसलिए कहा जाता है क्‍योंकि अकसर डॉक्‍टर बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए मीठे खासतौर से चीनी से दूर रहने की सलाह देते हैं। गुड़ न सिर्फ खाने में टेस्‍टी है बल्‍कि यह कई औषध‍िय गुणों से भरपूर है, यह एक ऐसा सुपर फूड है जिसके फायदों के बारे बहुत कम लोग ही जानते हैं। अतः गुड़ के कुछ फायदे इस प्रकार है:

गुड़ के फायदे Benefits of Jaggery:


१) गुड को दूध या पानी में मिलाकर पीने से शरीर में थकान दूर होती है और उर्जा मिलती है। गुड़ शरीर को मजबूत और एक्टिव बनाए रखता है। शरीरिक कमजोरी दूर करने के लिए दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से ताकत आती है और शरीर ऊर्जावान बना रहता है।

२) कई लोगो को समस्यां रहती हैं कि रोज सुबह उठते ही उनका पेट अच्छे से साफ़ नहीं होता हैं, इसे हम कब्ज के नाम से भी जानते हैं। ऐसी स्थिति में खाली पेट गुड़ और गुनगुना पानी लेने से लाभ मिलता हैं।

३) भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार गुड़ का उपभोग गले और फेफड़ों के संक्रमण के उपचार में लाभदायक होता है। गुड़ के प्रयोग से कोयले और सिलिका धूल से होने वाली फेफड़ों की क्षति को रोका जा सकता है। 




४) गुड़ आयरन का बहुत बड़ा स्रोत है, अगर आपका हिमोग्‍लोबिन कम है तो रोजाना गुड़ खाने से तुरंत लाभ मिलने लगेगा। गुड़ खाने से शरीर में लाल रक्‍त कोश‍िकाओं की मात्रा बढ़ जाती है, यही वजह है कि प्रेग्‍नेंट महिलाओं को डॉक्‍टर गुड़ खाने की सलाह देते हैं। एनिमिया के मरीजों के लिए तो गुड़ अमृत के समान है।

५) गुड के सेवन से त्वचा के हानिकारक टॉक्सिन्स बाहर निकलते है जिससे त्वचा सॉफ रहती है। ये शरीर में खून के प्रवाह यानी ब्लड सर्कुलेशन को सामान्य रखता हैं, जिसके चलते दिल सम्बंधित बीमारियाँ नहीं होती हैं।

६) गुड़ ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने का काम भी करता है। खासतौर पर हाई ब्‍लड प्रेशर से परेशान लोगों को रोजाना गुड़ खाने की सलाह दी जाती है यदि आपो हमेशा एसिडिटी या गैस की समस्यां रहती हैं तो वो भी इस गुड़ और पानी के कॉम्बिनेशन से हल हो जाएगी।

७) गुड़ सर्दी-जुकाम भगाने में काफी असरदार है। काली मिर्च और अदरक के साथ गुड़ खाने से सर्दी-जुकाम में आराम मिलत है। अगर किसी को खांसी की श‍िकायत है तो उसे चीनी के बजाए गुड़ खाना चाहिए। गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर खाने से गले की खराश और जलन में राहत मिलती है।

गुड़ खाने के नुकसान :

गुड़ की तासीर गर्म होती है अतः कुछ लोगो को इसके विपरीत प्रभाव हो जाते है। गर्म या ताजा गुड़ खाने से बदहजमी और पेट खराब होने की संभावना होती है।
गर्मी के दिनों में कुछ लोगो मे नाक से खून आने की समस्या भी हो जाती है, यह गुड़ के गर्म तासीर की बजह से होता है, अतः उन्हें गर्मी के मौसम में गुड़ के सेवन पर परहेज रखना चाहिए।



Friday, May 10, 2019

औषधीय गुणों से भरपूर है "मेंहदी" का पौधा। Benefits of Henna or Mehndi.

मेहदी और उसके पौधा कितना है लाभदायक :

हाथों पर रचने वाली खूबसूरत मेहंदी के तो आप दीवाने होंगे ही, इसके सेहत और ब्यूटी के फायदे जानेंगे तो और भी पसंद करने लगेंगे इसे। जानिए आपकी सेहत और सौंदर्य को निखारने में कितनी कारगर है मेहदी या हिना सबसे अच्‍छी बाल सौंदर्य सामग्री में से एक है जिसे भारत ने अन्‍य देशों के साथ साझा किया है। सदियों से महिलाएं मेंहदी के प्राकृतिक गुणों का उपयोग अपने बालों को मजबूत करने, उन्हें पोषण देने और सुंदर बनाने के लिए कर रही है। वे बालों के उपचार के लिए मेंहदी के पत्‍तों का उपयोग करती हैं। आधुनिक महिलाएं बालों के उपचार के लिए मेंहदी पाउडर का उपयोग भी करती हैं।



प्राचीन समय से ही मेंहदी का उपयोग कैंसर, बढ़ी हुई स्‍पलीन, सिरदर्द, पीलिया, त्‍वचा रोग और परजीवी के कारण होने वाले गंभीर दस्‍त के लिए किया जाता है। इन दिनों लोग पेट और आंतों के अल्‍सर के उपचार के लिए हिना का उपयोग करते हैं। मेंहदी का उपयोग डैंड्रफ, एक्जिमा, स्‍टेबीज, फंगल संक्रमण और घावों के उपचार के लिए भी किया जाता है।



मेहदी के स्तेमाल से होने वाले फायदे:


१) मेहदी की तासीर ठंडी होने के कारण मेहंदी का उपयोग शरीर में बढ़ी हुई गर्मी को कम करने में किया जाता है। हाथों और पैर के तलवों में मेहंदी लगाने से शरीर की गर्मी कम होती है।



२) उच्‍च रक्‍तचाप के रोगियों के त्‍लवों तथा हथेलियों पर मेहंदी का लेप समय समय पर लगाना लाभप्रद होता है। इससे अनिद्रा दूर हो कर रक्‍तचाप सामान्‍य होने लगता है।

३) खून साफ करने के लिए मेहंदी को औषधि के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए रात को साफ पानी में मेहंदी भिगोकर रखें और सुबह इसे छानकर पिएं।

४) घुटनों या जोड़ों में दर्द की समस्या होने पर मेहंदी और अरंडी के पत्तों को बराबर मात्रा में पीस लें और इस मिश्रण को हल्का सा गर्म करके घुटनों पर लेप करें।

४) मेहंदी के फूल उत्‍तेजक, हृदय को बल देने वाले होते हैं। इसका काढ़ा हृदय को संरक्षण करने तथा नींद लाने के लिये दिया जाता है।

५) सिरदर्द या माइग्रेन जैसी परेशानियों के लिए भी मेहंदी एक बेहतरीन विकल्प है। ठंडक भरी मेहंदी को पीसकर सिर पर लगाने से काफी फायदा होगा।

६) ताजा हरी पत्‍तियों को पानी के साथ पीस कर लेप करने से अधिक लाभ होता है। इससे गर्मी की जलन से आराम मिलता है। तलवों पर लेप करने से नकसीर बंद हो जाती है।

७) शरीर के किसी स्थान पर जल जाने पर मेहंदी की छाल या पत्ते लेकर पीस लीजिए और लेप तैयार किजिए। इस लेप को जले हुए स्थान पर लगाने से घाव जल्दी ठीक होगा।

८) मेहंदी के बीजों का उपयोग बुखार एवं मानसिक रोग में किया जाता है। खूनी दस्‍त में बीजों का उपचार है।



Thursday, May 2, 2019

योग के लाभ एवं मुख्य योगासन। Benefits of Yoga and top Yogasan.

योग और योगासन का परिचय:

योग का शाब्दिक अर्थ होता है जोड़ना, अतः जो योग कि विद्या योगाचार्य महर्षि पतंजलि ने बताया है उनके अनुसार "चित्त को एक जगह में स्थापित करना योग कहलाता है, जहाँ पर जीवात्मा को परमात्मा से मिलाया जाता है और वो एक हो जाते है वही योग है।" महाऋषि पतंजलि ने योग के सम्पूर्ण रहस्य को योगदर्शन में सूत्रों के रूप में प्रस्तुत किया है।

 


योगासन से तात्पर्य होता है कि शरीर की वह स्थिति जब शरीर और मन को शांत स्थिति में रखा गया है और वह सुख का अनुभव कर रहा है। योगासन दो प्रकार के होते है:

१) स्थिर आसन:
वह आसन जो बिना गति के बिना किसी प्रकार की शक्ति के प्रयोग से मात्र अभ्यास के माध्यम से स्थिर रखा गया हो स्थिर आसन कहलाता है।

२) गतिशील आसन:
यह उस तरह का आसन होता है जिसमे शरीर को शक्ति से साथ गतिशील रख कर किया जाता है।

कुछ योगासन जिन्हें आसानी के साथ किया जा सके तथा लाभ:


१) शुखासन:


 


शुखासन एक ऐसा योग है जिसमे मन को शान्ति प्रदान कि जाति है। यह बैठ कर किया जाने वाला आसन है जिसमे श्वास को सरलता पूर्वक अंदर और बाहर किया जाता है।

२) ताड़ासन:


 


ताड़ासन खड़े होकर किया जाने वाला योग है जिसमे दोनों हांथो को ऊपर उल्टा जोड़कर खिंचाव किया जाता है। इस आसन का अभ्यास शरीर को सुडौल, संतुलन और दृहत मिलती है।

३) त्रिकोणासन:


 


त्रिकोणासन में त्रिकोण का आकार बनता है इस योग का अभ्यास शरीर को लचीला और मन के तनाव को दूर करने वाला होता है।

४) बज्रासन:


 


बज्रासन बैठकर किया जाने वाला आसन है। यह शरीर को सुडौल और सुदृढ़ बनाता है, पाचन में लाभदायक एवं पीठ दर्द को आराम देने वाला योग अभ्यास है।

५) नमस्कार आसन:


 


नमस्कार आसन एक आसान और योग की सुरुआत में किया जाने वाला योग आसन है, इसमे दोनों हांथो को जोड़कर ऊपर उठाया जाता है।

६) वृक्षासन:


 



वृक्षासन एक पैर में वृक्ष के आकार में किया जाने वाला महत्वपूर्ण योग अभ्यास है। यह तनाव को दूर करता है मन को शांत रखने में सहायक एवं पैरों को मजबूती प्रदान करने वाला है।

७) कोडासन:

 



कोडासन पैरों को कोड की आकृति बनाने वाला आसन है। यह योग अभ्यास हड्डियों को एवं कमर को मजबूत करने वाला होता है।

८) भुजंग आसन:


 


भुजंगासन में उलट लेटकर कमर के ऊपरी भाग को ऊपर उठाया जाता है। इस योग अभ्यास से मेरुदंड में मजबूती आती है तथा कमर की मांसपेशियों को आराम मिलता है।

९) गोमुखासन:


 


गोमुखासन बैठ कर किया जाने वाला प्रमुख आसन है, इसमे शरीर को स्थिर करके पीछे हाथ को जोड़ा जाता है। यह शरीर को लचीला बनाने में मदत करता है।

१०) नटराज आसन:

 



यह आसन थोड़ा कठिन होता परंतु निरंतर अभ्यास किये जाने से सम्पूर्ण शरीर को लाभदायक होता है एवं शरीर को मजबूत करता है।