Monday, April 22, 2019

आयुर्वेद का परिचय। Introduction of Ayurveda.

आयुर्वेद का परिचय Introduction of Ayurveda:

आयुर्वेद एक भारतीय चिकित्सा पद्यति है, जिसकी सुरुआत कई वर्षों पहले भारत में हुई थी। भारतीय आयुर्वेद का पूरा रहस्य भारत के इतिहास से जुडा हुआ है। आज के दिन में विश्व भर के ज्यादातर आधुनिक और वैकल्पिक चिकित्सा, आयुर्वेद से लिया गया है। प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा की शुरुवात देवी-देवताओं के ग्रंथों से हुआ था और बाद में यह मानव चिकित्सा तक पहुंचा।


सुश्रुत संहिता (Sushruta Samhita) में यह साफ़-साफ लिखा गया है कि धनवंतरी, ने किस प्रकार से वाराणसी के एक पौराणिक राजा के रूप में अवतार लिया और उसके बाद कुछ बुद्धिमान चिकित्सकों और खुद आचार्य सुश्रुत को भी दवाइयों के विषय में ज्ञान दिया।

कैसे किया जाता है आयुर्वेद में उपचार How to Treat in ayurveda:

आयुर्वेद के उपचार में ज्यादातर हर्बल चीजों का उपयोग होता है। ग्रंथों के अनुसार कुछ खनिज और धातु पदार्थ का भी उपयोग औषधि बनाने में किया जाता था। यहाँ तक की प्राचीन आयुर्वेद ग्रांटों से सर्जरी के कुछ तरीके भी सीखे गए हैं जैसे नासिकासंधान (Rhinoplasty), पेरिनिअल लिथोटोमी (Perineal Lithotomy), घावों की सिलाई (Wounds Suturing), आदि। वैसे तो आयुर्वेद के चिकित्सा को वैज्ञानिक तौर पे माना गया है पर इसे वैज्ञानिक तौर पर पालन ना किया जाने वाला चिकित्सा प्रणाली कहा जाता है। पर ऐसे भी बहित सारे शोधकर्ता हैं जो आयुर्वेदिक चिकित्सा को विज्ञानं से जुड़ा (Proto-Science) मानते हैं।


आयुर्वेद चिकित्सा और और आधुनिक अग्रेजी चिकित्सा का अंतर Differences b/w Ayurvedic treatment and allopathy treatment:

आयुर्वेद का हमारे जीवन में बहुत महत्व है । आज का मानव आयुर्वेदिक दवाइयों को छोड़कर अंग्रेजी दवाइयों का उपयोग कर रहा है । जिससे मनुष्य का एक रोग तो ठीक हो जाता है लेकिन उन दवाइयों का उपयोग करने के बाद मनुष्य के शरीर में कुछ और नई बीमारियां उत्पन्न हो जाती है । जिससे वह शारीरिक रूप से कमजोर हो जाता है। लेकिन आयुर्वेदिक औषधि के द्वारा उपचार करके हम व्यक्ति के स्वास्थय को ठीक करके उनको  होने वाले रोगों से भी बचाते है । 
आयुर्वेद में ऐसी जड़ी - बूटियों हैंजिससे रोगी की हर बीमारी को ध्यान में रखते हुए उनका उपचार किया जाता है । जो भी व्यक्ति आयुर्वेदिक पद्धति से अपना इलाज करवाता है। तो चिकित्सक पहले रोगी के शरीरकी अवस्था मन और आत्मा कीअवस्था , वात , पित्त , कफ और मल और मूत्र का परीक्षण करके, पीड़ित व्यक्ति का उपचार आरम्भ करता है । इस प्रकार की प्रक्रिया को सांस्थानिक पद्धति कहा जाता है । इसमें रोगी केलक्षणों पर भी ध्यान दिया जाता है । आयुर्वेद चिकित्स्या में प्रयोग होनेवाली औषधि एक प्रकार का रसायन होता है । 



आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग किस प्रकार करना चाहिए , और इसके उपयोग  के बाद क्या खाना चाहिए , किन चीजो का परहेज रखना चाहिए। इन सभी बातों का विस्तृत वर्णन आयुर्वेद में किया गया है ।



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