Monday, April 1, 2019

दिव्य औषधीय वृक्ष : आयुर्वेद के अनुसार। Divine medicinal trees : according to ayurveda.

दिव्य औषधीय वृक्ष Divine Medicinal Trees:
भगवान व्रह्मा ने जब सृजन किया तो शरीर के आहार के लिए खाद्य पदार्थ दिए तथा शरीर को रोगों से बचाने एवं अगर रोग हो जाय तो निवारण की लिए अनेक वनस्पतियों एवं वृक्ष बनाये। ऐसे कई दिव्य वृक्ष है जिनमे औषधीय गुण होते है और कई रोगों के उपचार में असरदायक होते है। आयुर्वेद इन्ही प्राकृतिक औषधि का उपयोग करता है और रोगों का निवारण करता है। आयुर्वेद इन सिद्धांतों का पालन करता है:

" सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्। "

वृक्ष हमे जरूरी ऑक्सीजन देते है साथ औषधी भी देते है, कुछ प्रमुख दिव्य औषधीय वृक्षों के गुण इसप्रकार है:



नीम का पेड़ Neem Tree

१) नीम का पेड़ Neem Tree:

नीम एक ऐसा पेड़ है जो सबसे ज्यादा कड़वा होता है परंतु अपने गुणों के कारण आयुर्वेद व चिकित्सा जगत में इसका अहम स्थान है। नीम रक्त साफ करता है। दाद, खाज, सफेद दाग और ब्लडप्रेशर में नीम की पत्ती लेना लाभदायक होता है।
नीम कीड़ों को मारता है। इसलिए इसकी पत्तों को कपड़ों व अनाज में रखा जाता है। नीम की 10 पत्ते रोज खाने से रक्तदोष खत्म हो जाता है।
नीम के पंचांग, जड़, छाल, टहनियां, फूल पत्ते और निंबोली बेहद उपयोगी हैं। इसलिए पुराणों में इसे अमृत के समान माना गया है। नीम आंख, कान, गला और चेहरे के लिए उपयोगी है। आंखों में मोतियाबिंद और रतौंधी हो जाने पर नीम के तेल को सलाई से आंखों में डालने से काफी लाभ होता है।




बबूल का पेड़ Babool Tree

२) बबूल का पेड़ Babul Tree:

बबूल का गोद औषधीय गुणों से भरपूर होता है तथा अनेक रोगों के उपचार में काम आता है बबूल की हरी पतली टहनियां दातून के काम आती हैं।बबूल का गोद उतम कोटि का होता है जो औषधीय गुणों से भरपूर होता है तथा सेकडो रोगों के उपचार में काम आता है ।बबूल की दातुन दांतों को स्वच्छ और स्वस्थ रखती है।



पीपल का वृक्ष Peepal Tree

३) पीपल का वृक्ष Peepal Tree:
पीपल का वृक्ष का धार्मिक महत्व बहुत अधिक होता है, गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि वृक्ष रूप में मैं स्वम पीपल हूँ। स्वास्थ्य के लिए पीपल को अति उपयोगी माना गया है।पीलिया, रतौंधी, मलेरिया, खाँसी और दमा तथा सर्दी और सर दर्द में पीपल की टहनी, लकड़ी, पत्तियों, कोपलों और सीकों का प्रयोग का उल्लेख मिलता है।



बरगद का वृक्ष Banyan Tree

४) बरगद का वृक्ष Banyan Tree:
हिंदू धर्म में वट वृक्ष की बहुत महत्ता है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश की त्रिमूर्ति की तरह ही वट,पीपल व नीम को माना जाता है, अतः बरगद को ब्रह्मा समान माना जाता है। अनेक व्रत व त्यौहारों में वटवृक्ष की पूजा की जाती है।यह आस्था के ऊपर निर्भर करता है। यह रात और दिन हरसमय ऑक्सीजन का उत्सर्जन करता है।



अर्जुन का वृक्ष Arjuna Tree 

५) अर्जुन का वृक्ष Arjuna Tree :
अर्जुन की छाल में अनेक प्रकार के रासायनिक तत्व पाये जाते हैं। कैल्शियम-सोडियम की प्रचुरता के कारण यह हृदय की मांसपेशियों के लिए अधिक लाभकारी होता है। अर्जुन शीतल, हृदय के लिए हितकारी, स्वाद में कसैला, घाव, क्षय, विष, रक्तविकार, मोटापा, कफ तथा पित्त को नष्ट करता है। अर्जुन के पेड़ की छाल को हृदय रोगों के लिए अमृत माना जाता है। इससे हृदय की मांसपेशियों को बल मिलता है। जिससे हृदय की धड़कन ठीक होकर सामान्य होती है। इसके उपयोग से सूक्ष्म रक्तवाहिनियों का संकुचन होता है, जिससे रक्त, भार बढ़ता है।

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