Tuesday, March 19, 2019

महिलायों में धूम्रपान का दुष्प्रभाव। Smoking Effects in women's.

धूम्रपान Smoking:

तंबाकू संबंधित बीमारियों को आज दुनिया में सबसे बड़ी प्राण घातक के रूप में देखा जा रहा है। भारत जैसे देशों में अकाल मृत्यु का सबसे बड़ा कारण कहा जाता है। भारत में प्रति वर्ष लगभग 500000 मौतें तम्बाकू संबंधित बीमारियों के कारण होती हैं और एक ताज़ा अध्ययन का अनुमान है कि पुरुषों की बहुत बड़ी संख्या ने धूम्रपान के कारण अपना जीवनकाल घटा लिया है। पुरुषो की अपेक्षा महिलाओं में धूम्रपान करने कि औसतन कमी है फिर भी इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।



प्रतिदिन एक सिगरेट से धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के लिए, धूम्रपान ना करने वाले व्यक्ति की अपेक्षा दिल के दौरे की संभावना पचास प्रतिशत है। सरकारें मीडिया में धूम्रपान विरोधी अभियानों के साथ धूम्रपान के दीर्घकालीन खतरों के बारे में जोर देते हुए लोगों को रोकने की कोशिश कर रही है। धुम्रपान करने वालों के आसपास के लोगो को भी प्रभावित करता है, यही कारण है कि धूम्रपान पर प्रतिबंध जरूरी है। कई छेत्रों में ऐसा कानून है जो कि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थलों जैसे बार, पब और रेस्तरां में धूम्रपान करने से रोकने के लिए बनाया गया है।

धूम्रपान का इतिहास History of Smoking

धुयें का उपयोग कई धर्मों में अलग अलग कार्यो के लिए स्तेमाल में लाया जाता रहा है। भारतीय हिंदू धर्म मे लगभग 5000 हजार साल पहले से हवन, धूप एवं दीप में होता रहा है। उसके बाद आयुर्वेद चिकित्सा में भी इसका उपयोग क्या जाता था। बाद में यूनानी, क्रिस्चन, कैथेलिक एवं मुस्लिम धर्मों में भी स्तेमाल किया है लगा।



आधुनिक यंत्रों द्वारा तम्बाखू के द्वारा धूम्रपान लगभग 2000 साल से सुरु हुआ है, जब तम्बाखू नही था तब भांग और कई मादक पदार्थों का उपयोग होता था।

महिलाओं में धूम्रपान से रोगों का खतरा Smoking Effect in women's:




धूम्रपान करने वाले पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या कम है, परंतु महिलाओं में धूम्रपान का खरता पुरुषों की अपेक्षा अधिक होता है। महिलाओं में हानिकारक प्रभाव ज्यादा होने का कारण उनकी प्राकृतिक संरचना है। धूम्रपान करने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। धूम्रपान या सिगरेट पीने से महिलाओं में होने वाले प्रभाव इस प्रकार है:

१) गर्भधारण और स्तनपान:

धूम्रपान करने वाली महिलाओं में गर्भधारण की छमता में कमी आती है , साथ ही गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने से गर्भपात और भ्रूण के विकास में कमी का खतरा अधिक हो जाता है। स्तनपान करवाने वाली महिलाओं में दूध की कमी और बच्चे में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

२) फेफड़े तथा किडनी की बीमारियों का खतरा

धूम्रपान से फेफड़ों जुड़ी बीमारियों का खतरा तो होता ही है साथ मे किडनी की बीमारियों का भी खतरा बढ़ जाता है।

३) मानसिक रोग और तनाव

लगातार धूम्रपान तनाव और चिड़चिड़ापन को बढ़ाता है, साथ ही मानसिक बीमारियों के बढ़ने का खतरा हो जाता है।

४) जल्द बुढ़ापा आना

लगातार धूम्रपान रक्त में ऑक्सीजन और पोषण की कमी कर देता है जिसके कारण झुर्रियां बढ़ने लगती है और महिलाओं में इसका प्रभाव अधिक होता है क्योंकि उनकी त्वचा अधिक संवेदनशील होती है।

५) कैंसर

धूम्रपान कैंसर का कारक माना गया है और इनका खतरा महिलाओं में अधिक होता है क्योंकि उनका शरीर अधिक संवेदनशील होता है। हृदय रोगों का भी खतरा बढ़ जाता है।

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