Sunday, February 17, 2019

आयुर्वेद और योग। Ayurved and Yoga relationship hindi.

आयुर्वेद और योग का संबंध:


भारत की प्राचीन संस्कृति का स्तंभ है आयुर्वेद और योग। प्राचीन समय मे दीर्घायु रहने के लिए ज्ञानियों, ऋषियों, मुनियों और महापुरुषो ने योग और आयुर्वेद का सहारा लिया था। योग के द्वारा वे शरीर को मजबूत और निरोगी रखते थे। परंतु अगर कोई बीमारी होजाती थी तो आयुर्वेद के द्वारा उसका इलाज किया जाता था। अर्थात योग और आयुर्वेद दोनों मनुष्यों को निरोगी और दीर्घायु रखने के लिए है। जिन रोगों और परेशानियों का इलाज आयुर्वेद में नही होता था उसे योग से और जो योग से नियंत्रित नही होती थी उन्हें आयुर्वेद से इलाज किया जाता था।


क्या है आयुर्वेद?

आयुर्वेद का साब्दिक अर्थ है आयुष+वेद=आयुर्वेद। अर्थात जीवन को निरोगी और उच्च बनाए रखने के लिए आयुर्वेद का अवतरण हुआ है। आयुर्वेद हमारे ऋषियों मुनियों के कई वर्षों के तपस्या और अनुभव के द्वारा उत्पन्न हुआ है। जिसमे समस्त रोगों को जड़ से खत्म करने का इलाज संभव है। एलोपेथिक और होम्योपैथी पद्यति रोगों के लक्षणों पर इलाज़ करते है जबकी आयुर्वेद में रोगों के कारण पर इलाज़ करता है और जड़ से खत्म करता है।
आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य के शरीर मे रोग कफ, पित्त और बात के असंतुलन से उत्पन होते है। अर्थात अगर मनुष्य अपने शरीर का खानपान, और दिनचर्या इसप्रकार रखे कि इन तीनो के संतुलन बना रहे तो कोई भी बीमारी नही होगी।
भगवान ब्रह्मा ने शरीर की रचना की है और उसके भोजन के लिए खेतो और पेड़ों के रखा और शरीर के बीमार होने पर उसके उपचार के लिए पुलों, पत्तियों और औषधि बनाये है।

आयुर्वेद का इतिहास:

आयुर्वेद की व्याख्या ऋग्वेद में किया गया है। जो ईशा से 3000 से 50000 वर्ष पूर्व माना जाता है। माना जाता है कि भगवान धनवंतरी आयुर्वेद को अपने साथ लाये थे जिसे उन्होंने इंद्र को यह विद्या दी। इंद्र से अश्वनीकुमारों को मिली, अश्वनीकुमारों के इसका स्तेमाल दक्ष प्रजापति के धड़ को बकरे के सिर से जोड़ने में किया था। इसलिये अश्विनीकुमार को इसका आदि माना जाता है।
कई ऋषियों ने इसके शोध और प्रचलित किया जिसमें चरक, सुश्रुत, ऋषी अत्रि, भारद्वाज, कस्यप आदि थे। भगवान व्रह्मा ने इसे आठ भागो में बंटा।
आयुर्वेद के दो उद्देश्य है:
१) स्वस्थ व्यक्ति के स्वस्थ्य की रक्षा करना
२) रोगी व्यक्ति के रोगों को दूर करके स्वस्थ बनाना।

योग क्या है?

स्वस्थ तन और मन की प्राप्ति के लिए भारतीय संस्कृति के प्रक्रिया है योग। योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। तो प्रश्न होता है किसे जोड़ना? जोड़ना है आत्मा, मन और शरीर को।
गीता और शिवपुराण के साथ साथ लगभग सभी पौराधिक ग्रंथो में योग और इससे होने वाले फायदों का वर्णन मिलता है।

योग का इतिहास:

योग का इतिहास ऋषियों की तपस संस्कृति से मिलता है। इसका वर्णन वेदों में है जो कई वर्ष पुराने है।
पतंजलि को व्यापक रूप से योग का परिचालक माना जाता है, पतंजलि को ही योग का संस्थापक माना जाता है। उनके अनुसार योग बुद्धि और शरीर को नियंत्रित रखने की प्रणाली है।


तो दोस्तों उम्मीद है आप अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहकर योग और आयुर्वेद को अपनाये, आपको यह जानकारी कैसी लगी अपने सुझाव दे और जानकारी को शेयर करे।


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