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Wednesday, February 27, 2019

पीठ दर्द का कारण, लक्षण और घरेलू उपचार। Back Pain: Cause , Synonyms and Home Remedies.

पीठ दर्द Back Pain:

आजकल परिवेश में पीठ के दर्द आम समश्याओं में से एक है, पीठ के दर्द से बुजुर्गों के साथ साथ जवान और कम उम्र के लोग भी पीड़ित है। ख़ास तौर पे महिलाएं इस समस्या से ज्यादा पीड़ित है। पीठ दर्द में शामिल है कमर में दर्द, मध्य पीठ दर्द, ऊपरी पीठ दर्द या सायटिका के साथ कम पीठ दर्द। यह समस्या तंत्रिका और मांसपेशियों की समस्याओं, डिस्क रोग, और गठिया के परिणामस्वरूप पीठ दर्द हो सकता है। पीठ के दर्द एक सामान्य समस्या है परंतु अगर ज्यादा हो, झुनझुनाहट, अकड़न, या अधिक तकतीफ होने पर चिकित्सक से परामर्श ले।


पीठ दर्द के कारण Cause of Back Pain:



पीठ दर्द के बहुत से कारण होते है परंतु मुख्यतः निम्नलिखित कारण है जिनके वजह से पीठ का दर्द होता है:
१) बजन बढ़ने के कारण
२) लगातार बैठ कर काम करने से
३) अधिक कैलोरी वाले भोजन के सेवन से
४) पोषक तत्वो की कमी के कारण
५) महिलाओं में प्रेगनेंसी के कारण
६) अधिक व्यायाम के कारण
७) चोट, मोच या झटका लगने के कारण
८) मोटापा
९) तनावपूर्ण जीवनशैली
१०) लगातार नींद में कमी

पीठ दर्द का लक्षण Synonyms of Back Pain:

पीठ का दर्द जिसे बैक पेन कहते है पीठ के किसी भी हिस्से में हो सकता है। यह रीढ़ की हड्डियों से संबंधित होता है अतः ये खतरनाक भी हो सकता है। लगातार और अधिक होने पर गंभीर बीमारियों का संकेतक होता है अतः डॉक्टर की परामर्श से जांच करवाएं।

पीठ दर्द के बचाव का घरेलू उपाय Home Remedies of back pain:



१) उचित खानपान :

पोषक तत्वो से उक्त भोजन का सेवन करना चाहिए साथ कम वसा युक्त भोजन का सेवन करे जिससे वजन को कम करने में मदत मिले।

२) व्यायाम:

अपने समय अनुसार योग, जिम या सैर को अपनाये, इससे शरीर की मांसपेशियों को लचकदार और मजबूत बनाना आसान होता है। साथ ही जकड़न को खत्म करता है।

३) सीधा बैठे:

हमेशा सीधा बैठने की कोशिश करे खासकर गाड़ी चलाने में, काम करने में , कंप्यूटर या लैपटॉप के स्तेमाल करते समय।

४) मालिश करवाये:

मालिश से पीठ और कमर की मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिशसे पीठ के दर्द में आराम मिलता है।

५) गर्म पानी की सेक:

जाड़े या ढंड के समय ये बहुत कारगर होता है इसलिए गर्म पानी की थैली से सेक करे।


तो दोस्तो अपने शरीर का ख्याल रखे और उम्मीद है यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। तो अपने सुझाव दे और जानकारी को शेयर करे।

Monday, February 25, 2019

तुलसी के फायदे। Benefits of Tulsi (Basil) Plant.

तुलसी के पौधे और पत्तियों के फायदे Benefits of Tulsi (Basil) Leafs:

हमारी हिन्दू भारतीय संस्कृति में तुलसी का विशेष आयुर्वेदिक और पौराणिक महत्व है। यह पौधा मन और तन दोनो को स्वस्थ रखता है। यह एक ऐसी वनस्पति है जो अपनी औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद दवाओें में सर्वोपरी है। आप अपने घर मे तुलसी का पौधा लगाये और आप निश्चिंत हो जायें क्योंकि इसके नित्य सेवन से जुखाम, खाँसी, पेट दर्द आदि अनगिनत बिमारियों का इलाज छुपा हुआ है। आधुनिक युग में भी कई वैज्ञानिकों ने तुलसी पर शोध कर के इसमें उपस्थित गुणों की पुष्टि की है। तुलसी को पुरे विश्व में ओसियम सेंटम के नाम से जाना जाता है। तुलसी का पूरा पौधा किसी न किसी रूप में आयुर्वेदिक दवाइयों को बनाने में उपयोग में लिया जाता है। यह हमारे लिए सिर्फ़ आस्था का प्रतीक ही नही है बल्कि स्‍वास्थ्य का खज़ाना भी है।

तुलसी का किन किन बीमारियों में फायदा होता है Benefits of Tulsi (Basil) in Diseases:


भारत में सदियों से ही तुलसी के औषधीय गुणों को बहुत महत्ता दी गई है। यह रोग प्रतिरोधक छमता हो बढ़ता है। इनमें से कुछ बीमारिया इस प्रकार है जिनमे तुलसी का सेवन से फायदा होता है:
१) पाचन तंत्र को मजबूत करने में।
२) बुखार आने पर
३) सर्दी जुखाम होने पर
४) सांस की बीमारी में
५) हृदय रोगों में
६) स्किन की समस्या में
७) उल्टी दस्त होने पर
८) लीवर की समस्या में

तुलसी का आध्यात्मिक महत्त्व Spirituals Significance of Tulsi (Basil) :

तुलसी को भगवान विष्णु के रूप में माना जाता है अर्थात वो माता लक्ष्मी का रूप है। तुलसी के पत्तो को भगवान विष्णु के भोग में मिलाया जाता है। कहा जाता है तुलसी की पत्तियों के बिना भोग अधूरा रहता है। तुलसी के घर मे स्थापना रखने से सुख शांति आती है तथा घर मे पवित्रता बनी रहती है।




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Saturday, February 23, 2019

एसिडिटी और हाइपर एसिडिटी की समस्या। Cause and Remedies of Acidity and Hyperactivity.

क्या होता है एसिडिटी What is Acidity problem:

एसिडिटी पेट में अधिक मात्रा में अम्ल बनने के कारण होता है। आयुर्वेद में इसे 'उर्ध्वग अमलपिट्ट' के रूप में जाना जाता है, पेट के निचले हिस्से में ग्रासनली (प्रकृति में एसिड) होता है। आयुर्वेद इसे पित्त दोष के बढ़ने के कारण मानता है। पित्त की अधिकता होने पर यह गले तक जलन पैदा करता है। साथ ही यह कई रोगों की अधिकता का कारण होता है।आयुर्वेद के अनुसार पेट से जुड़ी हुई अधिकतर रोगों का कारण पित्त दोष के कारण होता है।

एसिडिटी और हाइपरएसिडिटी के कारण Cause of Acidity or Hyperactivity:

पेट में एसिड के अतिरिक्त उत्पादन को हाइपरऐसीसिटी कहा जाता है। जो अतिरिक्त एसिड उत्पादन का कारण बनती हैं उनके कारण यह उत्पन्न होता है। ऐसे खाद्य पदार्थ जो वसा से भरपूर होते हैं, के सेवन से एसिडिटी की बीमारी होती है। शराब, धूम्रपान का अधिक सेवन, पेट को लंबे समय तक खाली रखना, नाश्ते को स्किप करने से एसिडिटी होती है। एसिडिटी के अन्य कारण हैं गर्भावस्था, बढ़ती उम्र, मोटापा और गलत खान-पान, जैसे जंक फ़ूड खाना।


इनमें से सबसे महत्वपूर्ण हैं:
१) तली हुई और मसालेदार खाद्य पदार्थों का अत्यधिक उपयोग
२) अनियमित खान-पान।
३) चिंता, तनाव और क्रोध
४) बड़ी मात्रा में मैदा उत्पादों का उपभोग।
५) रात में सोने के लिए नहीं, लंबे समय तक काम करने वाले घंटे।
६) कैफीन और निकोटीन उत्पादों का अत्यधिक सेवन।
७) कब्ज
8) कार्बोनेटेड ड्रिंक्स

एसिडिटी और हाइपरएसिडिटी के लक्षण Symptoms of Acidity and Hyperactivity:


एसिडिटी या हाइपरएसीडीटी के लक्षण बहुत सामान्य होते है जो जो बिना किसी विशेष जांच के पता चल जाती है:

१) तली हुई या मसालेदार भोजन के तुरंत बाद ऊपरी पेट में दर्द। 
२) मतली, उल्टी और खाने की इच्छा में कमी जो 1-2 दिनों तक बनी रह सकती है
३) गले मे जलन या खट्टी डकारें आना
४) पेट में गड़बड़ी या 'सूजन' की भावना
५) पेट फूलना
६) गंभीर मामलों में खून की उल्टी या मल में खून आ सकता है यदि गैस्ट्रिटिस जारी रहता है, तो एनीमिया का अंतिम विकास हो सकता है

एसिडिटी से बचाव के उपाय Remedies of Acidity:

एसिडिटी को नियंत्रित करने के लिए क्या खाएं और कितना खाएं एक महत्वपूर्ण है। इसलिए यह कुछ युक्तियां अपनाकर बचाव किया जा सकता है:

इन पदार्थों का सेवन करना चाहिए: 

जौ, गेहूं, चावल (कम से कम एक वर्ष पुराना), ककड़ी, करेला, हरा केला, कद्दू, अनार, और गाय का दूध। रात का खाना सोने से दो से तीन घंटे पहले खाएं क्योंकि यह आपको स्वस्थ रखता है। आहार में अधिक फाइबर वाले पदार्थ आवश्यक हैं क्योंकि वे पाचन में मदद करते हैं, संतुलित आहार लें।

आहार में निम्नलिखित चीजों से बचें: 

वे खाद्य पदार्थ जो तेल और वसा की अधिकता हों। इन खाद्य पदार्थों को पचाना मुश्किल होता है, इसलिए वे पेट को अधिक एसिड उत्पन्न करना पड़ता है। तला हुआ, वसायुक्त, जंक फूड और अत्यधिक चॉकलेट खाना। चाय और कॉफी के बहुत अधिक सेवन से हाइपरएससिडिटी हो सकती है। धूम्रपान और शराब जैसे अन्य नसीले पदार्थो के सेवन न करे। खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन न करना क्योंकि उनके पास पहले से ही अम्लीय सामग्री है। बचने के लिए अम्लीय खाद्य पदार्थ अचार, दही, इमली, सिरका आदि हैं। 



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Thursday, February 21, 2019

पुरुषों में बाल झड़ने कि समस्या: कारण और उपाय। Mans Hair loss: Cause and prevention.

पुरुषों में बाल झड़ना Hair loss in mans:

आजकल के परिवेश में बालों का झड़ना एक आम और बड़ी समस्या है। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में बालों के झड़ने कि समस्या ज्यादा होती है। बालों का गिरना आम होता है क्योंकि उसकी जगह नए बाल उगते है परंतु जब नए बाल नही आते तो वह समस्या बन जाती है। 



पुरुषों में बालों के झड़ने के कारण Cause of hair loss in mans:

पुरुषों में बालों के झड़ने के कई कारण हो सकते है परंतु मुख्यतः तीन समस्या ज्यादा होती है वे है:

१) हार्मोनल कारण Hormonal imbalance

पुरुषों के सर में DHT हार्मोन के कारण बाल झड़ते है, यह पुरुषों में सबसे बड़ा कारण होता है क्योंकि यह हार्मोन स्त्रियों में असर नही करता। पुरुषों में गंजापन का यही कारण है।

२) तनाव पूर्ण(चिंतायुक्त) जीवनशैली Stress:

चिंता या तनाव बालों के झड़ने का बहुत बड़ा कारण होता है। शारीरिक और मानसिक तनाव दोनों इस समस्या का कारण होता है।

३) प्रोटीन की कमी Lack of Protein:

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगो का खानपान असंतुलित होता है , साथ ही भोजन में प्रोटीन की कमी के कारण बालों का झड़ने का मुख्य कारण बन जाता है। प्रोटीन बालों और शरीर के विकास का मुख्य तत्व है, अतः इसकी कमी से बाल झड़ते है।


इनके अलावा भी बहुत से कारण होते है जो परुषों के बालों के झड़ने का कारण होता है वे है:

४) आयरन की कमी
५) थाइरोइड
६) पर्यावरण प्रदूषण
७) जल प्रदूषण
८) अनियमित जीवन शैली
९) विभिन्न हेयर स्टाइल
१०) अधिक दवाओं का सेवन

बालों को झड़ने से बचाने के उपाय Measures to prevent hair loss:


उपरोक्त कारण होते है पुरुषों में बालों के झड़ने का अतः हमेशा इससे बचना चाहिए। कुछ उपाय इस तरह है:

१) भोजन : 

हमेशा भोजन समय पर करे और भोजन में पोषक तत्वो का ध्यान दे, क्योंकि असंतुलित भोजन जिसमे पोषक तत्वो की कमी होती है शरीर मे कई तरह के विकार उत्पन करते है। भोजन में उन पदार्थो को शामिल करें जिनमे प्रोटीन और आयरन की अधिकता हो। 20-30 कि उम्र में बालों का झड़ना सुरु हो जाता है इसलिए इसी उम्र से प्रोटीन की अधिकता वाला भोजन करे।
ताजे फलों का और जूस का सेवन करे, साथ ही अण्डे का इस्तेमाल भी लाभकारी होता है।

२) पर्याप्त नींद: 

पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी होता है इससे शरीर की तंदुरुस्ती तो बानी ही रहती है साथ मे तनाव को दूर करता है।

३) शारीरिक व्यायाम: 

शरीरिक व्यायाम स्वस्थ रखता है, तनाव दूर करता है , पाचन मजबूत करता है जिससे शरीर भोजन के पोषक तत्वो का निकाल पता है।

४) दवायों का उपयोग: 

छोटी छोटी बीमारियों में दवायों का उपयोग नही करना चाहिए इनके कई तरह के साइड इफ़ेक्ट होते है जो बालों के झड़ने का कारण बनता है।

५) शैम्पू और साबुन का इस्तेमाल: 

हमेशा एक तरह का यानी एक ही ब्रांड का प्रोडक्ट जो आपके बालों पर अच्छा प्रभाव करता हो उसी का इस्तेमाल करे, विभिन्न प्रकार के शैम्पू का स्तेमाल से बल झड़ते है क्योंकि सभी प्रकार के शैम्पू को बनाने मे कैमिकल तत्वो का इस्तेमाल होता है जो बालों पर अच्छा प्रभाव नही करता और बाल झड़ने लगते है।
ध्यान रखे हर व्यक्ति और उसका शरीर अलग होता है तो पदार्थ आपको अच्छा प्रभाव करता है जरुर नही वो दूसरे को भी करे। इसलिए किसी के बताए अनुसार नही अपने अनुभव से पदार्थ का चयन करें। और साबुन का स्तेमाल ज्यादातर लोगो पर सही प्रभाव नही करता इसलिए साबुन का स्तेमाल बालों को धोने में न ही करे तो बेहतर होगा।





तो दोस्तो अपनी सेहद का ख्याल रखे और आपको जानकारी कैसी लगी अपने सुझाव दे साथ ही जानकारी को शेयर करे।


Tuesday, February 19, 2019

मसूड़ों में होने वाली समस्या । Gum Disease in hindi.

मसूड़ो की बीमारी Gum Disease:

मसूड़ो कि बीमारी की सुरुआत हमे सूजन से पता चलती है क्योंकि आमतौर पर मसूड़े में सूजन मसूड़ों की बीमारी से पहले होती है। हालांकि, यह जानना महत्वपूर्ण है कि सभी मसूड़े की सूजन बीमारी की ओर नहीं बढ़ती है। मसूड़े की सूजन के सुरुआत में बैक्टीरिया का निर्माण होता है, जिससे मसूड़े सूजन हो जाते हैं और आसानी से दांत ब्रश करने के दौरान खराब हो जाते हैं। यह वयस्कों में दांतों के झड़ने का एक प्रमुख कारण है। क्योंकि मसूड़ों की बीमारी में आमतौर पर दर्द नही होता है, इसलिए हम नहीं जानते कि यह हमें है। इसमे बैक्टीरिया की चिपचिपी परत मसूड़ों में बनती रहती है।


मसूड़ों कि बीमारी के संकेत Gum Diseases Symptoms  :

यहां कुछ चेतावनी संकेत हैं जो समस्या का संकेत दे सकते हैं

१) मसूड़े से खून आना
२) लाल, सूजे हुए मसूड़ों
३) मसूड़ों जो दांत से दूर खींच लिया है।
४) लगातार खराब सांस या खराब स्वाद
५) स्थायी दांत जो ढीले या अलग हो रहे हैं।

मसूड़ों कि बीमारी से बचाव Prevention from Gum Diseases: 

मुह कि स्वच्छता आपको मुंह में बैक्टीरिया की संख्या को कम करने में मदत करता है, जिसमें आपके दांतों और मसूड़ों को साफ रखना शामिल है। 
आपका दांत का डॉक्टर आपको दांतों के ब्रश और डेंटल फ्लॉस का सही उपयोग करने के बारे में सलाह देगा, और अन्य मुख की स्वच्छता उत्पादों जैसे पानी से या माउथवॉश की सिफारिश कर सकता है।
यहाँ अपने दाँत स्वस्थ रखने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं:

१) फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से अपने दांतों को दिन में दो बार ब्रश करें।
२) एक इलेक्ट्रिक टूथब्रश का उपयोग अधिक प्रभावी हो सकता है।
३) बैक्टीरिया की परत को हटाने के लिए दिन में कम से कम एक बार फ्लॉस या ब्रश करें।
४) ठीक से सफाई के लिए वर्ष में कम से कम दो बार अपने दंत चिकित्सक पर जाएँ।
५) धूम्रपान न करें या तंबाकू न चबाएं।

कुछ घरेलू उपाय Home Remedies of gum diseases:


१) नमक और गुनगुना पानी: पानी मे नमक डाल कर गुनगुना करे और 30 सेकंड तक मुख में रखे फिर कुल्ला करें। ध्यान रहे पानी ज्यादा गर्म न हो नही तो मुह जल सकता है।
२) करौंदे का जूस: करोंदे का जूस फायदेमंद होता है मसूड़ो के संक्रमण को कम करने में मदत करता है।
३) नींबू का रस: नींबू का रस संक्रमण को कम करता है।


डॉक्टर से मुख की सफ़ाई Cleaning Mouth with the doctor:

इस सफाई के दौरान, आपका चिकित्सक आपके दांतों और उनकी जड़ों से परत को बिल्डअप और टैटार को हटा देगा, और फिर अपने दांतों को पॉलिश करेगा और फ्लोराइड के साथ उनका इलाज करेगा। हीलिंग को ठीक करने के लिए गहरी सफाई की आवश्यकता हो सकती है। स्केलिंग और रूट प्लानिंग नाम की एक गहरी सफाई विधि है जो टैटार को खत्म करने में मदद करेगी और दांत की जड़ पर किसी भी खुरदरे धब्बे को भी हटाएगी जहां बैक्टीरिया इकट्ठा होते हैं।
एंटीबायोटिक्स कुछ मामलों में, आपके दंत चिकित्सक एंटीबायोटिक दवाओं को लगातार मसूड़ों के संक्रमणों की मदद करने के लिए लिखेंगे। एंटीबायोटिक एक माउथवॉश, जेल, या एक मौखिक गोली या कैप्सूल के रूप में हो सकता है।
यदि पायरिया पॉकेट अभी भी मौजूद हैं, तो वे सर्जरी जैसे अन्य उपचार विकल्पों की सिफारिश कर सकते हैं। यदि सूजन उन साइटों में बनी रहती है जो ब्रश करने और फ्लॉस करने के लिए उपयुक्त नही हैं, तो आपके चिकित्सक आपके मसूड़ों के नीचे जमा सफाई को साफ करने के लिए फ्लैप सर्जरी नामक एक शल्य प्रक्रिया की सिफारिश कर सकते हैं। बीच मे आने वाले आपके मसूड़ों को हटा दिया जाता है और आपके दांतों की जड़ें साफ हो जाती हैं। आपके मसूड़ों को तब वापस जोड़ दिया जाता है।


तो दोस्तों अपनो मुह और शरीर की साफसफाई और देखरेख ठीक से करे, उम्मीद है आपको यह जानकारी पसंद आई होगी, अधिक जानकारी के लिए स्पेसिलिस्ट से संपर्क करे। अपने सुझाव दे और जानकारी को शेयर करे।

Sunday, February 17, 2019

आयुर्वेद और योग। Ayurved and Yoga relationship hindi.

आयुर्वेद और योग का संबंध:


भारत की प्राचीन संस्कृति का स्तंभ है आयुर्वेद और योग। प्राचीन समय मे दीर्घायु रहने के लिए ज्ञानियों, ऋषियों, मुनियों और महापुरुषो ने योग और आयुर्वेद का सहारा लिया था। योग के द्वारा वे शरीर को मजबूत और निरोगी रखते थे। परंतु अगर कोई बीमारी होजाती थी तो आयुर्वेद के द्वारा उसका इलाज किया जाता था। अर्थात योग और आयुर्वेद दोनों मनुष्यों को निरोगी और दीर्घायु रखने के लिए है। जिन रोगों और परेशानियों का इलाज आयुर्वेद में नही होता था उसे योग से और जो योग से नियंत्रित नही होती थी उन्हें आयुर्वेद से इलाज किया जाता था।


क्या है आयुर्वेद?

आयुर्वेद का साब्दिक अर्थ है आयुष+वेद=आयुर्वेद। अर्थात जीवन को निरोगी और उच्च बनाए रखने के लिए आयुर्वेद का अवतरण हुआ है। आयुर्वेद हमारे ऋषियों मुनियों के कई वर्षों के तपस्या और अनुभव के द्वारा उत्पन्न हुआ है। जिसमे समस्त रोगों को जड़ से खत्म करने का इलाज संभव है। एलोपेथिक और होम्योपैथी पद्यति रोगों के लक्षणों पर इलाज़ करते है जबकी आयुर्वेद में रोगों के कारण पर इलाज़ करता है और जड़ से खत्म करता है।
आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य के शरीर मे रोग कफ, पित्त और बात के असंतुलन से उत्पन होते है। अर्थात अगर मनुष्य अपने शरीर का खानपान, और दिनचर्या इसप्रकार रखे कि इन तीनो के संतुलन बना रहे तो कोई भी बीमारी नही होगी।
भगवान ब्रह्मा ने शरीर की रचना की है और उसके भोजन के लिए खेतो और पेड़ों के रखा और शरीर के बीमार होने पर उसके उपचार के लिए पुलों, पत्तियों और औषधि बनाये है।

आयुर्वेद का इतिहास:

आयुर्वेद की व्याख्या ऋग्वेद में किया गया है। जो ईशा से 3000 से 50000 वर्ष पूर्व माना जाता है। माना जाता है कि भगवान धनवंतरी आयुर्वेद को अपने साथ लाये थे जिसे उन्होंने इंद्र को यह विद्या दी। इंद्र से अश्वनीकुमारों को मिली, अश्वनीकुमारों के इसका स्तेमाल दक्ष प्रजापति के धड़ को बकरे के सिर से जोड़ने में किया था। इसलिये अश्विनीकुमार को इसका आदि माना जाता है।
कई ऋषियों ने इसके शोध और प्रचलित किया जिसमें चरक, सुश्रुत, ऋषी अत्रि, भारद्वाज, कस्यप आदि थे। भगवान व्रह्मा ने इसे आठ भागो में बंटा।
आयुर्वेद के दो उद्देश्य है:
१) स्वस्थ व्यक्ति के स्वस्थ्य की रक्षा करना
२) रोगी व्यक्ति के रोगों को दूर करके स्वस्थ बनाना।

योग क्या है?

स्वस्थ तन और मन की प्राप्ति के लिए भारतीय संस्कृति के प्रक्रिया है योग। योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। तो प्रश्न होता है किसे जोड़ना? जोड़ना है आत्मा, मन और शरीर को।
गीता और शिवपुराण के साथ साथ लगभग सभी पौराधिक ग्रंथो में योग और इससे होने वाले फायदों का वर्णन मिलता है।

योग का इतिहास:

योग का इतिहास ऋषियों की तपस संस्कृति से मिलता है। इसका वर्णन वेदों में है जो कई वर्ष पुराने है।
पतंजलि को व्यापक रूप से योग का परिचालक माना जाता है, पतंजलि को ही योग का संस्थापक माना जाता है। उनके अनुसार योग बुद्धि और शरीर को नियंत्रित रखने की प्रणाली है।


तो दोस्तों उम्मीद है आप अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहकर योग और आयुर्वेद को अपनाये, आपको यह जानकारी कैसी लगी अपने सुझाव दे और जानकारी को शेयर करे।


Friday, February 15, 2019

बच्चों में बार बार बुखार आने के कारण और बचाव। frequent fever in children causes and remedies.

बच्चों में बार बार बुखार के कारण Cause of frequent fever in children:

बच्चों में बुखार सबसे आम चिंता का कारण है जो माता-पिता को अपने बच्चे को हॉस्पिटल ले जाने का कारण बनता है। बुखार को सामान्य रूप से 100.4F या 38C. से अधिक तापमान को कहा गया है। शरीर के अन्य स्थानों पर मापा जाने वाला तापमान आमतौर पर कम होता है। बुखार का अलग-अलग व्यक्तियों के बीच काफी भिन्न होती है। बुखार अपने आप में जानलेवा नहीं होता है जब तक कि यह अत्यंत और लगातार उच्च न हो, जैसे कि 107F. (41.6C) से अधिक। चिंताजनक बुखार का जोखिम  2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे या शिशु में और एक सप्ताह से अधिक समय तक चलने वाले बुखार शामिल हैं। बुखार एक गंभीर बीमारी की उपस्थिति का संकेत दे सकता है, लेकिन आमतौर पर बुखार एक सामान्य संक्रमण के कारण होता है। जिनमें से अधिकांश गंभीर नहीं होते हैं, संक्रमण के अलावा कई स्थितियां बुखार का कारण बन सकती हैं। 

बच्चों में बुखार का कारण क्या है Why Frequently fever in Children?


बच्चों में बुखार के कारणों में शामिल हैं:
१) बैक्टीरियल संक्रमण।
२) वायरल संक्रमण जैसे इन्फ्लूएंजा 
३) एलर्जी 
४) सूजन संबंधी बीमारियां

बच्चों में बुखार कब घातक होता है When Fever is fatal in Children?

यदि बुखार को नियंत्रित करने में असमर्थ है। और अगर व्यक्ति को संदेह है कि बच्चा उल्टी, दस्त, या डिहाइड्रेड हो रहा है  (उदाहरण के लिए बच्चे की आँखें धँसी हुई हैं, टेंटेड त्वचा आदि)। साथ ही अगर बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाया गया है लेकिन अब भी तबियत खराब हो रहा हो या नए लक्षण विकसित हुए हो, तो ये घातक हो सकता है। अपने बच्चे की देखभाल करने की पूरी कोशिश करना चाहिए और स्पेसिलिस्ट डॉक्टर को दिखाने में समझदारी होती है।  

बच्चों में बुखार के लिए घरेलू उपचार क्या हैं What are home remedies of fever in children?


बुखार से पीड़ित बच्चे की देखभाल के तीन लक्ष्य रखना चाहिए:

१) तापमान को नियंत्रित करना।

पहला लक्ष्य दवाओं और उचित रूप से बच्चे को ड्रेसिंग के साथ 102F (38.9C) से नीचे बुखार करके बच्चे को आरामदायक बनाना है। पानी की पट्टी का स्तेमाल या स्नान भी सहायक हो सकता है। बच्चे के तापमान की जांच करने के लिए एक थर्मामीटर की आवश्यकता होगी। वैसे बाजार में बहुत से थर्मामीटर उपलब्ध है, डिजीटल थर्मामीटर सस्ता होता हैं और कुछ सेकंड में एक रीडिंग प्राप्त करते हैं। अधिकांश डॉक्टर थर्मामीटर की सिफारिश नहीं करते हैं, क्योंकि क्लिनिक के बाहर उनका उपयोग अविश्वसनीय है। ग्लास थर्मामीटर अच्छी तरह से काम करते हैं, लेकिन टूट सकते हैं, और उन्हें पढ़ने में कई मिनट लगते हैं। 

२) डिहाइड्रेड होने से रोकना।

दूसरा लक्ष्य बच्चे को डिहाइड्रेड या निर्जलित होने से रोकना है। बुखार के दौरान मनुष्य त्वचा और फेफड़ों से अतिरिक्त पानी खो देता है। जिससे डिहाइड्रेड होने का खतरा होता है।

३) गंभीर या जानलेवा बीमारी की निगरानी करना है। 

तीसरा लक्ष्य गंभीर या जीवन घात वाली बीमारी के संकेतों के लिए बच्चे की निगरानी करना है। 

बच्चों में बुखार को कैसे रोका जा सकता है How can fever prevented in children?

कई बीमारियों की रोकथाम, जो बुखार का कारण बनती हैं, व्यक्तिगत और घरेलू स्वच्छता से रोका जा सकता है। क्योंकि ये आसपास घूमती हैं वायरस और बैक्टीरिया के रूप में। वायरस और बैक्टीरिया के प्रसार को रोकने के लिए इन रणनीतियों का उपयोग करें:

१) साबुन और पानी से हाथ धोएं। 

२) छींकने और खांसने पर मुंह को ढक लें। 

३) साफ हाथों से भोजन खिलाये।




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Wednesday, February 13, 2019

तम्बाकू: स्वास्थ्य पर प्रभाव। Tobacco injuries to health in hindi.

तम्बाकू सेवन से स्वास्थ्य पर असर Tobacco effect on health:


तम्बाकू का सेवन कई प्रकार के रोगों का कारण होता है। तम्बाकू से होने बीमारियों से भारत ही नही सारे विश्व चिंता में है। आयुर्वेद के अनुसार तम्बाकू के सेवन से 54 तरह के रोग होते है। मुख्यतः तम्बाकू के सेवन से मुंह के छाले, दाग, कैंसर, फेफड़े संबंधित बीमारी जैसे दमा, अस्थमा, टीबी होने की संभावना सबसे अधिक होती है। WHO और भारत सरकार की तरफ से कई अभियान चलाया जा रहा है जिससे लोगो को तम्बाकू से होने वाली बीमारियों और स्वास्थ्य पर होने वाले असर की जानकारी पहुँच पाए।
तम्बाकू एक धीमा जहर है जो धीरे धीरे इंसान की जान ले लेता है, सरकार की तरफ से पैकेट पर फोटो विज्ञापन देना जरूरी किया गया है, साथ ही कई राज्यो में विक्री पर प्रतिबंध भी है। परंतु पूर्ण रूप से सभी तम्बाकू उत्पाद पर प्रतिबंध नही है, जिसका कारण सरकार को मिलने वाले राजस्व और उत्पादन और विक्री से मिलने वाले रोजगार को बताया जाता है। परंतु इनसे होने वाली बीमारियों पर खर्च कही ज्यादा है साथ ही लोगो की जिंदगी बर्बाद हो जाती है, जिसकी चिंता सरकार और समाज दोनों को करनी चाहिए।

तम्बाकू क्या होता है What is Tobacco?

तम्बाकू एक प्रकार का निकोटियाना प्रजाति का पौधा होता है, जिसकी पत्तियों को सुखाकर कई तरह के नसीले पदार्थो का उत्पादन किया जाता है। भारत मे तम्बाकू का उत्पादन लगभग 15 राज्यो में होता है साथ ही लगभग 10 तरह की किस्म का तम्बाकू भारत मे उगाया जाता है।
तम्बाकू भारत मे 17बी सताब्दी में पुर्तगाल से भारत आया और इसका उत्पादन और सेवन बहुत तेजी से फैल गया है। भारत मे कई देसी और विदेसी कंपनीया इसके उत्पादों के बनाने और बेचने का काम कर रही है।

भारत मे तम्बाकू से बनने वाले उत्पाद Tobacco product consumption in India:

भारत मे तंबाकू का सेवन विभिन्न तरीके से होता है, जिसमे धुंआ और धुंआ रहित तरीके होते है। परन्तु सभी तरीको में तम्बाकू हानिकारक होता है।
धुंए वाले तम्बाकू उत्पाद:
१) सिगरेट
२) बीड़ी
३) हुक्का
४) चिलम
५) सिगार
६) पाइप 
इनके अलावा भी कई तरह से तम्बाकू का धुयें के रूप में सेवन किया जाता है।

बिना धुंए वाले उत्पाद:

१) खैनी
२) पान या पैन मसाला
३) तम्बाकू सुपारी
४) चबाने योग्य तम्बाकू
५) तम्बाकू मावा
६) तम्बाकू बुझे हुए चूने के साथ।

तम्बाकू और तम्बाकू उत्पाद छोड़ने के उपाय Remedies to quit tobacco and tobacco product:

तम्बाकू का सेवन चाहे किसी भी तरीके से हो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है यह एक धीमा जहर है जिसके सेवन की लत लगती है और ये शरीर को अपनी चपेट में ले लेता है। न मिलने पर बेचैनी होने लगती है, इसके स्तेमाल करने वाले व्यक्ति के साथ परिवार और आसपास के लोग भी प्रभावित होते है।
तम्बाकू के सेवन और लत को छोड़ना परम आवश्यक होता है, इसके कुछ उपाय इस प्रकार है:


१) दृह्न शक्ति: 

तम्बाकू छोड़ना बहुत कठिन होता है परंतु दृन्ह शक्ति से इसे छोड़ा जा सकता है। जब पूरी तरह मन को पक्का कर लेंगे तो आपकी लत छूट जाएगी।

२) दोस्तो और परिवार की मदत: 

परिवार और दोस्तो को चाहिए कि तम्बाकू की लत को छोड़ने के लिए व्यक्ति को प्रोत्साहित करें, उन्हें बार बार याद दिलाना चाहिए कि यह गलत लत है और उसे यह छोड़ना चाहिए।

३) तम्बाकू छुड़वाने वाले च्युंगम: 

बाजार में कई तरह के प्रोजेक्ट उपलब्ध है जो तम्बाकू सेवन को छुड़वाने में मदत करती है उनका स्तेमाल करे।

४) देशी उपाय: 

कुछ देशी उपाय है जैसे सौफ और अजवाइन को भून कर रख ले और थोड़ा थोड़ा ले जब भी तम्बाकू सेवन की इक्षा हो।

५) धीरे धीरे छोड़े: 

तम्बाकू को एक दम से छोड़ना आसान नही होता अतः धीरे धीरे कम करे।


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Monday, February 11, 2019

फलों के रस के गुण और फायदे। Benefits of Fruit Juice in hindi.

फलों और सब्जियों के रस के फायदे Benefits of fruit and vegetables juice:

फलों और कई सब्जियों के रस में कई तरह के विटामिन, मिनरल्स और कई तरह के स्वास्थ्य संबंधी तत्व होते है। फलों की अपेक्षा उनका रस पचाना आसान होता है, तथा उनमें सारे पोषक तत्व होते है जिनको शरीर जल्दी निकाल लेता है। फलों के रस को नियमित रूप से लेने से कई तरह के रोगों को दूर किया जा सकता है। 
फलों का और उसके रस का आयुर्वेद, चिकित्सा के साथ साथ पौराणिक महत्व है , फलों और उनके रस का भोग देवी, देवताओं को दिया जाता है। यह ग्राही होता है साथ ही शरीर को तंदरुस्ती के लिए फायदेमंद होता है।

किसका सेवन उत्तम होता है फल या फलों का रस Whose consumption is best is fruit or fruit juice:

कुछ लोगों का कहना होता है कि फलों के ज्यादा पौस्टिक गुण होते है रस की अपेक्षा में, परंतु इस प्रकार कहना सही नही होता यह शरीर के पाचन पर निर्भर करता है। फलों के रस में उतने ही गुण होते है , साथ ही कमजोर पाचनतंत्र या बीमारी की अवस्था मे इसको पचाना ज्यादा आसान होता है। तथा ये शरीर को जल्द ऊर्जावान बनाता है।


मुख्य पांच फलों के रस के फायदे Benefits of Most Five Fruit Juice:

हमेशा ताजा फलों के रस पीना चाहिए क्योंकि इसके बहुत बड़े फायदे होते है कुछ मुख्य फल के फायदे इस प्रकार है

१) अनार के रस के फायदे Benifts of Pomegranate Juice: 

नार का रस या जूस बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है , यह शरीर के सम्पूर्ण अंगों के लिए लाभदायक होता है। अनार के रस में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बहुत अधिक होती है इसलिए ये त्वचा के लिए बहुत लाभदायक होता है। अनार के रस हृदय रोग, डाइबटीज और कैंसर जैसी बीमारियों में भी लाभदायक होता है। 
अनार का रस प्रेग्नेंसी में बहुत लाभकारी होता है, खून की कमी को पूरा करने में मदतगार होता है। हड्डियों , बालो और त्वचा के लिए लाभदायक होता है। दस्त और डायरिया में भी बहुत लाभकारी होता है।



२) मोसम्मी के रस के फायदे Benefits of Seasoning Juice:

मोसम्मी में फाइबर की मात्रा अधिक होती है साथ ही इसमे विटामिन सी और पोटेशियम भी भरपूर मात्रा में पाई जाती है। इस लिए यह बहुत लाभदायक होता है खासकर गर्मियों में शरीर को संतुलित रखने में कारगर होता है और ये आसानी से हर जगह उपलब्ध रहता है।



३) संतरे के रस के फायदे Benifits of Orange Juice:

संतरे का जूस या रस बहुत लाभकारी होता है गर्मी मे होने वाली डिहाइड्रेडसन की समस्या को दूर करता है, संतरे का रस पाचनतंत्र को मजबूत करता है भूख बढ़ता है। संतरे का रस पेट की अम्लता को नियंत्रित करता है।  रक्तचाप और बदहजमी को ठीक करने में बहुत लाभकारी होता है।



४) एप्पल का रस Benifits Apple Juice :

एप्पल का रस या जूस एक डीटोक्स जूस है। यह शरीर को अशुद्धिकरण करने में फायदा होता है, ये कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। साथ ही लीवर के लिए बहुत लाभकारी हित है।



५) गन्ने का रस Sugarcane Juice:

गन्ने का रस तुरंत ऊर्जा देने वाला लोकप्रिय पेय है। इसमें फैट की मात्रा बहुत कम होती है, और शुगर कि मात्रा भी 25 से 30 प्रतिसत होता है। गन्ने का रस हड्डियों, त्वचा के लिए लाभदायक होता है। गन्ने का रस लिवर के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होते है।




मुख्य पांच फायदेमंद वेजिटेबल के रस Most Five Vegetable Juice :


१) गाजर का जूस Carrots juice
२) सलगम का जूस Beetroots Juice 
३) लौकी का जूस Bottel Gourd Juice 
४) पालक का जूस Spinach Juice
५) खीरे का जूस Cucumber Juice 




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Sunday, February 10, 2019

भरपूर नींद लेने के फायदे। Benefits of complete sleeping.

भरपूर नींद Complete Sleep:

एक स्वस्थ शरीर को 7-8 घंटे की नींद लेना आवश्यक होता है। भरपूर नींद लेने से कई तरह की बीमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है। यह तनाव को कम करने में बहुत लाभदायक होता है। आजकल की भागदौड़ और अनियमित जिंदगी में भरपूर नींद की कमी हो रही है जिसकी वजह से कई बीमारियां बढ़ रही है। और बीमारियों से उबरने में भी अच्छी नींद बहुत फायदेमंद होती है। हमारा शरीर नींद के समय अपने आपको अंदर से मरम्मत करता है।


कब सोना सबसे ज्यादा फायदेमंद When Sleeping is most beneficial: 

रात की नींद को सबसे ज्यादा उचित माना गया है, दिन के वक्त सोने से बीमारी होने का खतरा होता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार सुबह 6 बजे से लेकर शाम को 6 बजे तक घातक माना गया है।  आयुर्वेद के अनुसार बीमारियों की वजह कफ , पित्त और बात के असंतुलन को माना गया है, जो की सभी बीमारियों का कारण होता है।


दिन में सोने के नुकसान Sleeping Harmful in Days :

सुबह 6 बजे से 10 बजे तह शरीर का कफ सबसे ज्यादा सक्रिय होता है। इसलिए सुबह 6 से 10 बजे तक सोने से कफ दोष की बीमारियो जैसे शर्दी, खांसी, हृदय और गले से संबंधित बीमारियों के होने का खतरा होता है।
सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक शरीर का पित्त सक्रिय होता है, यह भोजन को पचाने के समय होता है इसलिए इस समय सोने से पेट संबंधी बीमारियों का खतरा होता है।
दोपहर 2 से शाम के 6 बजे बात का सक्रिय होने का समय है अतः इस समय सोने से बात संबंधित बीमारियों जैसे जोड़ो का दर्द, अर्थराइटिस, हड्डियों, और रक्त संबंधित बीमारी होने का खतरा होता है। इस लिए दिन में सोना और झपकी लेने की आदत गलत है , दिन में सोना हानिकारक हो सकता है।


कम नींद किन बीमारियों के लिए हानिकारक Sleep Related Harmful illness:

नींद की कमी की बजह से शरीर मे विपरीत प्रभाव होता है जिसकी बजह से कई बीमारियों का खतरा होता है वो इस प्रकार है:


१) दिमाग संबंधित बीमारिया: हम जितना सोते है उतनी देर में शरीर ऊर्जावान हो जाता है परंतु कम सोने की वजह से दिमाग तरोताजा महसूस नही कर पाता जिसका सीधा असर याददाश्त पर पड़ता है और मानसिक समस्या उत्पन्न होती है।

२) किड़नी और हृदय की समस्या: हम जितना कम सोते है शरीर विषक्त पदार्थ को बाहर उतना ही कम निकाल पता है जिसकी बजह से किडनी, हृदय और रक्तचाप की समस्या बढ़ जाती है।

३) कमजोर पाचनतंत्र: कम नींद लेने से पाचनतंत्र कमजोर होता है जो शरीर को भी कमजोर बना देता है। क्योंकि ठीक से भोजन न पचने से भोजन के पोषक तत्वों को शरीर निकाल नही पता।

४) त्वचा रोग: कम सोने से शरीर की शुद्धकरण ठीक से नही हो पाती और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। मनुष्य का शरीर उम्र से ज्यादा दिखने लगता है।

५) मधुमेह: अच्छी नींद न होने के कारण शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है और मधुमेह होने का खतरा भी बढ़ जाता है।



सारांश Conclusion:

तो दोस्तों हमेशा हँसते मुस्कुराते रहना चाहिए , आसपास साफ सफाई रखनी चाहिए इससे सकारात्मकता बढ़ती है। खूब नींद ले । जो आपके तनाव को कम करता है और आपके व्यवहार को अच्छा रखता है।





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Thursday, February 7, 2019

पानी कब और कितना पिये। When and how much water is consumed.

शरीर को पानी की जरूरत क्यों होती है Why Body needs water:

मनुष्य के शरीर में लगभग 70℅ पानी होता है, इसलिए पानी शरीर के लिए बहुत आवश्यक जरूरत है। सुचारू रूप से क्रियांवयन के लिए पानी का अहम भूमिका है, चाहे तापमान को नियंत्रित रखना हो, अशुद्धिकरण हो, विषक्त पदाथों को बाहर निकलना हो, शरीर के जरूरी मिनरल्स की अव्यसक्ता को पूरा करना हो या डिहाइड्रेशन से लड़ना हो, कई जरूरतों के लिए पानी बहुत आवश्यक है।
परंतु हमेशा शुद्ध पानी पीना चाहिए , क्योंकि पानी के साथ कई जरूरी पदार्थ शरीर मे जाते है परन्तु अगर पानी शुद्ध नही है तो कई हानिकारक तत्व और विषाणु शरीर मे जाकर शरीर को बीमार करते है।

कब पानी पीना चाहिए When consumed water:

पानी को नियमबद्ध तरीके से पीना चाहिए, क्योंकि पानी का प्रभाव शरीर के सभी तंत्रो पर पड़ता है। इस तरह से कुछ नियम बनाये और कोशिश करे उनको पालन करने का:

१) बैठ कर पानी पीना चाहिए ।
२) थोड़ा थोड़ा करके पानी पीना चाहिए।
३) घूंट घूंट करके पानी पीना चाहिए।
४) भोजन के आधे घंटे पहले पानी पिये।
५) भोजन के उपरांत कम से कम 40 मिनट और हो सके तो एक घंटे बाद पिये।
६) समान्यतः 2-3 लीटर पानी पिये पर अगर गर्म इलाके में है या गर्मी का मौशम है तो 4-5 लीटर पानी पिये।
७) सुबह खाली पेट एक लीटर पानी पिये हो सके तो गुनगुना।
८) सोने से पहले 1 ग्लास पानी पिये।
९) नहाने के बाद 1 ग्लास पानी पिये।
१०) घर से बाहर निकलते समय पानी अवश्य पिये।

पानी पीने का सही समय Correct Time to consume water:

पानी शरीर मे होने वाली कई बीमारियों को दूर करता है इसलिए जब भी पानी की जरूरत महसूस हो पानी अवस्य पीना चाहिए। पानी की ज़रूरतों को नजरअंदाज नही करना चाहिए यह शरीर के लिए हानिकारक होता है। भोजन को ठीक से पचने और पाचनतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक की भोजन करते समय पानी का सेवन नही करना चाहिए।
व्यायाम करते समय भी बहुत सारा पानी का सेवन नही करना चाहिए हो सके थोड़ा थोड़ा वो भी बीच भीच में करना चाहिए।
हमारे शरीर से पानी सबसे ज्यादा मात्रा में किडनी से उसके बाद त्वचा, और आंतों से निकलता है, जिसकी पूर्ति करने के लिए निरन्तर पानी का सेवन करना आवश्यक होता है। 
एक स्वस्थ शरीर की किडनी लगभग 1.5 लीटर पानी निकाल देता है फिर और भी तरीके से पानी बाहर निकलता है, त्वचा से पसीने के द्वारा और आंतों से मल के द्वारा । इसलिए आवश्यक है कि कम से कम 3 लीटर पानी हर दिन पीने की कोशिश करना चाहिए।

किन लोगों को अधिक पानी पीना चाहिए Who need to consume more water:


१) उल्टी और दस्त की समस्या होने पर अधिक पानी पीना चाहिए हो सके तो ORS  के साथ या नामक और शक्कर का घोल बनाकर पीना चाहिए।
२) व्यायाम करने के आधे घंटे बाद , पशीने के माध्यम से अधिक मात्रा में पानी शरीर से बाहर निकल जाता है इस लिए इसकी पूर्ति करने के लिए अधिक पानी पीना चाहिए।
३) गर्मियों के दिनों में अधिक पानी पीना चाहिए इससे लू लगने से बचने में मदत मिलती है। और लू लगने पर भी अधिक पानी पीना चाहिए।
४) अगर बीमार है और दवाओं का सेवन कर रहे है तो अधिक पानी पिये इसके द्वारा दवाओ के साइड इफेक्ट्स को और गर्मी को कम किया जा सकता है।
५) अगर पेशाब में जलन या इंफैक्शन को शिकायत है तो अधिक मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए।

सारांश Conclusion

पानी मनुष्यों के साथ साथ समस्त प्राणियों और पेड़ पौधो के लिए बहुत आवश्यक है। इसीलिए उचित मात्रा में पानी का सेवन के साथ साथ इसके आरक्षण का भी ध्यान देना आवश्यक है। वैसे तो पृथ्वी पर 80% से अधिक पानी है परंतु पेयजल की मात्रा कम है और तेजी से कम होता जा रहा है, इसलिए जलसंकट का खतरा बढ़ता जा रहा है। जल का दोहन नही संरक्षण की आदत डालनी चाहिए।


तो दोस्तों अपने आसपास साफ सफाई का वातावरण रखे और हँसते मुस्कुराते रहिये । और  यह जानकारी कैसी लगी अपने सुझाव दे और जानकारी को शेयर करे।



Wednesday, February 6, 2019

पंचकर्म:आयुर्वेदिक उपचार। Panchkarma Treatment in hindi.

पंचकर्म Panchkarma:

पंचकर्म आयुर्वेदिक उपचार की एक विधि है जिसके माध्यम से शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर किया जाता है। पंचकर्मा उपचार के पांच चरण होते है जिसके कारण इसे पंचकर्म अर्थात पांच कर्म कहा गया है। यह आयुर्वेद चिकित्सा का विशिष्ट रूप है।

क्यों किया जाता है पंचकर्म उपचार Why need Panchkarma Treatment:

आयुर्वेद के अनुसार शरीर के बीमार होने या रोग होने के तीन प्रमुख कारण है वात, पित्त, और कफ। आयुर्वेद कहता है कि अगर शरीर का वात, पित्त और कफ संतुलित है तो शरीर बीमार नही होता। अतः इनको संतुलित रखना आवश्यक है।
जब शरीर मे विषाक्त पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है तो वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए पंचकर्म उपचार के माध्यम से विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकाला जाता है, जिससे शरीर पुनः ऊर्जावान , मानशिक और शारिरिक मजबूती मिलती है साथ ही पाचन क्रिया दुरुस्त होती है।

पंचकर्म के पहले की क्रिया Before Panchkarma:

पंचकर्म उपचार के पहले दो पद्यति की जाती है पहली स्नेहन या ओइलेशन, जिसमे शरीर मे तेल लगाया और मालिश की जाती है। कहले यह घी से की जाती थी इसलिए गाय का घी उपयुक्त माना गया है।
दूसरी क्रिया है स्वेदन या फमेंटेशन, इस क्रिया में शरीर से पसीने के द्वारा विषाक्त निकाला जाता है। अतः इसमे ऐसी प्रक्रिया की जाती है जिसमे पसीना उत्पन्न हो।

पंचकर्मा के चरण Steps of Panchkarma

१)वमन क्रिया:

इस क्रिया में ऊपर से दोषो को निकाला जाता है, अतः इसमे उल्टी करवाकर विषाक्त पदार्थों को या दोषो को निकाला जाता है। यह क्रिया कफ के संतुलन के लिए होती है इसलिए कफ दोष के मरीजों की लिए उपयुक्त है।

२) विरेचन क्रिया:

इस क्रिया में नीचे (मल द्वार) से दोषो को निकाला जाता है। अतः इस क्रिया में औषधि के द्वारा मल के द्वारा आंतों और पेट की सफाई होती है। यह पित्त दोष को दूर करने और पित्त को संतुलित करने के लिए किया जाता है।

३) वस्ति क्रिया:

यह दो तरह की होती है अनुवासन और आस्थापन। इसमे मुख तथा कई मार्गो से शरीर मे कई तरह के द्रव और काढ़ा प्रवेश करवाया जाता है। यह वात रोग को दूर करने और वात को संतुलित करने के लिए होता है।

४) नस्य क्रिया:

इस क्रिया में नाक से कुछ द्रव को प्रवेश करवाया जाता है, इस किया से पहले मालिश के द्वारा शरीर को तैयार किया जाता है उसके बाद नाक के द्वार से औषधि को प्रवेश करवाया जाता है। यह सर के रोगों को दूर करने और संतुलित करने के लिए होता है। जिससे सर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकालते है।

५) रक्त मोक्ष क्रिया

इस क्रिया के शरीर के किसी विशिष्ट भाग से खराब रक्त को निकाला जाता है, यह क्रिया रक्त की शुद्धि के लिए किया जाता है।

पंचकर्म में सावधानी 

पंचकर्म की प्रक्रिया अलग अलग हो सकती है या शरीर, आयु और बीमारी पर निर्भर करती है।
इस क्रिया को प्रशिक्षित चिकित्सक से करवाना चाहिए और ठीक से विचार विमर्श करना चाहिए।

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Monday, February 4, 2019

भोजन के प्रकार: शास्त्रों के अनुसार। Types of Food: According to the Scriptures in hindi.

भोजन के प्रकार Types of food:

शास्त्रों के अनुसार भोजन को बिभक्त किया गया है तथा कौन सा भोजन मनुष्य के लिए उपयुक्त है इसकी भी ब्याख्या की गई है। भोजन को मौसम की परिस्थितियों का भी प्रभाव होता है इसलिए भोजन को मौसम, सरीरिरि क्रियाकलाप के अनुसार करने की सलाह दी जाती है। भोजन का प्रभाव मनुष्य के मन मे होता है, उसके आचरण और व्यवहार में भी बहुत बड़ा प्रभाव भोजन का होता है। 
गीता में भी भोजन का विस्तारित उल्लेख है, और भोजन के प्रकार के बारे में बताया गया है। भोजन को तीन श्रेणियों में रखा गया है सात्विक , राजसिक, और तामसिक।

१) सात्विक भोजन Satvik Meals in hindi:

शास्त्रों के अनुसार सात्विक भोजन को अत्यंत शुद्ध और सरीर के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। सात्विक भोजन आयु को बढ़ाने वाला और सरीर को स्वस्थ बनाने वाला होता है, क्योंकि भोजन का प्रभाव मनुष्य के मन और व्यवहार मे होता है  अतः इस प्रकार का भोजन मे मिर्च मसालों का स्तेमाल कमहोता है।
लहसुन प्याज की तासीर गर्म होने के कारण इनका स्तेमाल नही होता है। शास्त्रों के अनुसार यह काम को बढ़ाने वाला होता है, वैसे यह अन्य सब्जियों की तरह ही शाकाहारी की श्रेणी में आता है।


सात्विक भोजन के पदार्थ

सात्विक भोजन मनुष्य के मस्तिष्क को नियंत्रित रखने में मदत करता है, साथ ही विनम्रता भी प्रदान करता है जिससे मनुष्य के अंदर हिंसात्मक भाव नही आते। इसमे मुख्यतः सब्जियां , फल, अनाज जैसे जी दाले गेहू चावल, और दूध या दूध से बने पदार्थ शामिल है।

२) राजसिक भोजन Rajsik Food

यह भोजन मनुष्य में उत्तेजना प्रदान करता है, काम वासना को बढ़ता है। परन्तु इस तरह का भोजन रोग उत्पन्न करता है। यह क्रोध और शोक दोनों को बढ़ाने वाला बताया गया है। यह भी मुख्यतः शाकाहार की श्रेणी में आता है।


राजसिक भोजन के पदार्थ

राजसिक भोजन को मसाले दार, खट्टा, गर्म रूखा कहा गया है। आज के परिवेस मे कहे तो चटकदार ,ज्यादा नमक वाला, तला हुआ, मिर्च मसाले वाला भोजन साथ ही साथ चाय, कॉफी, और कोल्डड्रिंक इस श्रेणी में आते है।

३) तामसिक भोजन Tamasin Food

शास्त्रों के अनुसार ऐसा भोजन जो तीन घंटे पहले बना हुआ हो (भगवान को भोग लगे हुए भोजन के अलावा अर्थात प्रसाद के अलावा),  बेस्वाद भोजन , और अस्पर्श्य पदार्थों (जिन पदार्थो को छूने के लिए मना किया गया है) शामिल हो तामसिक कहलाता है। यह भोजन मनुष्य को विनाश और मृतु की तरफ ले जाने वाला कहा गया है।


तामसिक भोजन के पदार्थ

अंडा, मांस , मछली , रात का बचा हुआ भोजन, नशीले पदाथों को तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा गया है। हरे प्याज और लहसुन को तामसिक कहा गया है।


सारांश Conclusion 

भोजन मनुष्य के आचरण और व्यक्तित्व का निर्धारण करता है, इसका सीधा प्रभाव मनुष्य के आचरण में होता है। सारे विश्व मे कई महापुरुष, खिलाड़ी, सिंगर, ऑर्थोर, समाजसेवक, वैज्ञानिक , डॉक्टर, और कई छेत्रो के प्रतिभावान व्यक्ति शाकाहारी थे और है, बहुत से लोगो ने शाकाहार को अपनाया है। इसलिये भोजन का चुनाव बहुत सोच समझ कर करना चाहिए।



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Saturday, February 2, 2019

अंडों के फायदे: आयुर्वेद के अनुसार। Benefits of Eggs as par Ayurveda in Hindi.

अंडों के फायदे Benefits of Eggs:

अंडों का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होता है, इसमे उच्च कोटि का प्रोटीन होता है साथ कि जरूरी विटामिन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम और मिनिरल होते है जो शरीर के लिए बहुत उपयोगी होते है। साथ ही वसा की मात्रा कम होती है, विशेषकर सफेद हिस्से में।
यहाँ पर बात करेंगे मुर्गियों के अंडों के बारे में क्योंकि यह रोजाना खाया जाता है। आयुर्वेद में भी इसके फायदों के बारे बताया गया है, यह भ्रांति गलत है कि आयुर्वेद में केवल शाकाहार के बारे में कहा गया है किंतु कई पक्षियों के अंडों के सेवन के बारे में कहा गया है अलग अलग बीमारियों के उपचार में। भारत का मौशम बाकी देशों से अलग है इसलिए यहां पर खाद्यान में शाकाहार को बढ़ाया गया है, साथ ही भोजन की उपलब्धता में कोई कमी नही है।

क्या अंडों का सेवन जरूरी होता है It is Impotent to Eat Eggs:

हालांकि अंडों में बहुत गुणकारी तत्व होते है जो हमारे शरीर के लिए आवश्यक होता है लेकिन अगर हम संतुलित आहार लेते है जिसमे फल , सब्जियां, दूध या दूध के प्रोडक्ट सामिल है तो जरूरी नही है, साथ ही अगर हम गर्म प्रदेश में रहते है क्योंकि भारत मे बहुत से मौसम होते है तो सेवन नुकशान दायक भी हो सकता है।

किसको अंडों का सेवन जरूरी है Who Needs to Eat Eggs :

जिनका सरीरिक कार्य ज्यादा होता है , खिलाड़ियों, बढ़ती उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाएं विशेषकर जिनके गर्भ में बच्चे का विकास ठीक से न हो रहा हो, बॉडी बिल्डिंग करने वालों को अंडों का सेवन जरूरी होता है। ठंडी जगह में रहने वाले को भी सेवन जरूरी है।

अंडों के सेवन के नुकसान Losses of Eggs Intakes:

अंडों की तासीर गर्म होती है इसलिए गर्मियों में खाने में परहेज करना चाहिए, पाईल्स या बबासीर के रोगियों को परहेज करना चाहिए। साथ ही हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति को भी परहेज करना चाहिए क्योंकि अंडों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा होती है। जिन लोगों का पाचनतंत्र मजबूत नही है उनको भी परहेज करना चाहिए।
अंडों के सेवन और खरीद करते समय सावधानी रखनी चाहिए क्योंकि कई संक्रमित बीमारियों के बढ़ने का खतरा होता है, अंडों के अच्छे स्टोर से ले और अच्छे से पका कर खाएं।

कौन से अंडे सेवन के लिए उपयुक्त है Which Eggs Good for Intakes:

बाजार में देसी और बॉयलर मुर्गियों के अंडे उपलब्ध होते है हालांकि इनके तत्व में कोई ज्यादा अंतर नही होता है परंतु देसी मुर्गियों के अंडे अधिक अच्छा माना गया है क्योंकि इन मुर्गियों में रोग प्रतिरोधक छमता ज्यादा होती है, अतः अंडों में संक्रमण का खतरा कम होता है।

सारांश Conclusion 

भारत का मौसम और भोजन की उपलब्धता बाक़ी के देशों से बहुत अलग है अतः यहाँ के भोजन की प्लानिंग में विदेशों से अलग है, हमे अपने रहन सहन , मौसम और शरीरिक जरूरतों के हिसाब से करना चाहिए।



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