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Monday, July 8, 2019

धूम्रपान का प्रभाव एवं धूम्रपान की वजह से फेफड़ों में जमी गंदगी दूर करने के तरीके। Smoking Effects and lungs detox drink.

धूम्रपान का प्रभाव Smoking effects:


धूम्रपान हमारे शरीर के लिए बहुत हानिकारक होता है परंतु यह जानते हुए भी विश्व की बहुत बड़ी संख्या इसकी शिकार है और इसकी लत में पड़ी हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग हर साल 60 लाख लोगों की मृत्यु धूम्रपान की लत के कारण होती है, और आने वाले समय में यह संख्या 80 लाख तक पहुच सकती है। साथ ही एक बहुत बड़ी आमदनी इस लत के कारण खर्च होती है।




विश्व भर में तम्बाकू को सबसे अधिक धूम्रपान के लिए स्तेमाल किया जाता है, यह निकोटिना प्रजाति का पौधा होता है जिसकी पत्तियों को सुखाकर धूम्रपान के लिए अनेक प्रकार से स्तेमाल किया जाता है। जब इसे धूम्रपान के लिए इस्तेमाल किया जाता है तो इसमें मौजूद निकोटिन शरीर के जाता है और उत्तेजना पैदा करता है। साथ मे मस्तिष्क में एक तरह का रसायन पैदा करता है जो मनुष्य को आनंद का अनुभव कराता है, तथा जब इस रसायन का असर कम होता है तो शरीर फिर से उसे पाने के लिए धूम्रपान कि चाहत पैदा होती है और बार बार कि लत बढ़ती है।

धूम्रपान से होने वाली समस्या:


धूम्रपान की सुरुआत एक दो सिगरेट या बीड़ी के साथ होती है लेकिन यह बढ़ती जाती है और कई समस्याओं को उत्पन्न करती है। एक बार धूम्रपान से लगभग 4000 तरह के हानिकारक तत्व शरीर मे प्रवेश करते है जिसमे लगभग 40 तरह के हानिकारक तत्व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के जनक हो सकते है। 

कैंसर के अलावा धूम्रपान से होने वाली बीमारियां:
१) त्वचा रोग
२) दांतो की गिरावट या कमजोर
३) आंखों की बीमारी या मोतियाबिंद
४) रक्तचाप की बीमारी
५) कोलेस्ट्रॉल की बीमारी
६) नपुंसकता
७) प्रजनन छमता में कमी
८) जोड़ो या गठिया रोग
९) स्वास समस्या
१०) हृदय रोग

फेफड़ों पर धूम्रपान का प्रभाव को कम कैसे करे:


फेफड़ों और हृदय धूम्रपान से सर्वाधिक प्रभावित होते है। धूम्रपान का सर्वाधिक असर फेफड़ों पर होता है क्योंकि ये सबसे पहले प्रभावित होता है, अधिक धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के फेफड़ों खून की मात्रा कम होने लगती है और ये काला पड़ने लगता है। यह जो विषाक्त पदार्थ पैदा होता है उसे "टार" कहते है। यह "टार" फेफड़ो द्वारा ऑक्सीजन अवशोषण छमता को कम कर देता है और शरीर मे कई तरह की बीमारिया उत्पन्न होती है।



फेफड़ों से इस विषाक्त पदार्थ को हटाने के लिए कुछ पेय भी कारगर होते है, जिन्हें Lungs Detox Drink कहते है। इसे बनाने की विधि इस प्रकार है:

१) ब्राउन शुगर, अदरक की जड़, लहसुन और हल्दी से बनने वाला पेय:

एक लीटर पानी मे ब्राउन शुगर को उबाल लें , जब यह अच्छे से उबल जाए तो इसमें बाकी के पदार्थ डाल दे और अच्छे से 10 से 15 मिनट तक उबलने दे। गाढ़ा होने पर इसे ठंडा होने को छोड़ से। ठंडा होने पर फ्रिज में रखे।

सेवन का तरीका: सुबह खाली पेट 2 चम्मक और रात को सोते समय 2 चम्मच ले।

२) गाजर और सहद से बनने वाला पेय:

एक लीटर पानी मे कटी हुई गाजर को उबाल लें , लगभग 10 मिनट उबालने के बाद इसे पानी से अलग कर ले और पानी को फेंके नही। 
मिक्सर में गाजर को अच्छी तरह पीस ले फिर बचे हुए पानी मे मिला दे। ठंडा होने पर इसमे सहद मिलाए और फ्रिज में रख दे।

सेवन का तरीका: इसे दिन में तीन से चार बार ले सेवन करे।







Saturday, June 29, 2019

बुजुर्गों में होने वाली मुख्य स्वास्थ समस्याएं। Top 5 Health Disease in Old age in hindi.

बुजुर्गों में होने वाली मुख्य बीमारियां:

बडी उम्र में बालों का झड़ना, झुर्रियाँ पड़ना, याददास्त जाना, कहाँ कार पार्क कर रहे थे भूल सकते हैं। एक तरफ जहां लोग मजाक करते हैं वहीं उम्र बढ़ने से कई तरह कि स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। भारत मे आबादी के 12 प्रतिशत के आसपास है लेकिन वरिष्ठ नागरिकों कि संख्या कुछ सालों बाद बढ़ेगी और लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझना महत्वपूर्ण है। साथ ही उन समस्याओं को समझने और उनसे निपटने के लिए जानकारी जरूरी है।

१) पुरानी बीमारी 


नेशनल काउंसिल ऑन एजिंग के अनुसार, लगभग 92 प्रतिशत वरिष्ठों को कम से कम एक पुरानी बीमारी है और 77 प्रतिशत को कम से कम दो हैं। हृदय रोग, स्ट्रोक, कैंसर, और मधुमेह सबसे आम और महंगी पुरानी स्वास्थ्य स्थितियों में से हैं, जिसके कारण हर साल दो तिहाई मौतें होती हैं। इन बीमारियों से बचाव के लिये कम से कम एक वार्षिक चेकअप जरूर कराए, स्वस्थ आहार बनाए रखने और पुरानी बीमारियों को रोकने में मदद करने के लिए व्यायाम करना चाहिए। 
मोटापा बुढापे में एक बढ़ती हुई समस्या है और स्वस्थ जीवन शैली और व्यायाम से इसका निवारण किया जा सकता है।

२) याददाश्त और भूलने कि समस्या


कमज़ोर याददाश्त व्यक्ति की सोचने, सीखने और याद रखने की क्षमता पर केंद्रित है। बुजुर्गों के सामने सबसे आम मुद्दा मनोभ्रंश है, जिसका कारण कमजोर याददाश्त है। दुनिया भर में लगभग 47.5 मिलियन लोगों को मनोभ्रंश है और इसकी संख्या में लगभग तीन गुना होने की भविष्यवाणी की गई है। 
पुरानी बीमारियों और मादक पदार्थों के सेवन से साथ ही धूम्रपान से यह बढ़ता है। हालांकि मनोभ्रंश के लिए कोई इलाज नहीं हैं, चिकित्सक बीमारी के रोकथाम के लिए कुछ दवाएं दे सकते है।


३) मानसिक स्वास्थ्य


विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु के 15 प्रतिशत वयस्क मानसिक विकार से पीड़ित हैं। वरिष्ठ लोगों में एक सामान्य मानसिक विकार अवसाद है, जो बुजुर्गों की आबादी के सात प्रतिशत में होता है। दुर्भाग्य से, इस मानसिक विकार को अक्सर कम करके आंका जाता है। 
स्वस्थ जीवनशैली की जीवन शैली को बढ़ावा देना जैसे कि रहने की स्थिति में सुधार और परिवार, दोस्तों या सहायता समूहों से सामाजिक समर्थन अवसाद का इलाज करने में मदद कर सकता है।


४) शारीरिक चोट


बुजुर्गों को आपातकाल में हॉस्पिटल में भर्ती करने का एक बहुत बड़ा कारण है कि गिर कर चोट आई है। गिरकर चोट लगने से वरिष्ठ नागरिक की मृत्यु हो जाती है और ये प्रमुख कारण बन जाता है। क्योंकि उम्र बढ़ने से हड्डियां सिकुड़ जाती हैं और मांसपेशियों में ताकत और लचीलापन कम हो जाता है, जिशसे सीनियर्स को अपना संतुलन खोने, चोट लगने और हड्डी टूटने की आशंका अधिक होती है। 
कई मामलों में, उन्हें शिक्षा के माध्यम से रोका जा सकता है, घर के भीतर शारीरिक गतिविधि और व्यावहारिक संशोधनों को बढ़ाया जा सकता है।


५)  कुपोषण


65 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों में पोषण अक्सर कम हो जाता है और अन्य बुजुर्ग स्वास्थ्य मुद्दों को जन्म दे सकता है, जैसे कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और मांसपेशियों की कमजोरी। कुपोषण के कई के कारण हो सकती है जैसे पीड़ित वरिष्ठ लोग खाना भूल सकते हैं, अवसाद, शराब, आहार प्रतिबंध, सामाजिक संपर्क कम और सीमित आय में कमी जैसे कई कारण हो सकते है। 
आहार में छोटे बदलाव, जैसे कि फलों और सब्जियों की बढ़ती खपत और कम वसा और नमक की खपत में कमी, बुजुर्गों में पोषण संबंधी मुद्दों में मदद कर सकते हैं।








Thursday, June 20, 2019

स्प्राउट्स के स्वास्थ्य लाभ। Sprout's Benefits in hindi.

स्प्राउट्स के सेवन स्वास्थ्य में लाभदायक कैसे:

स्प्राउट्स या अंकुरण दलों या अनाज का अंकुरित हिस्सा है। यह अनाज को पानी मे भिगोकर या अन्य विधि से प्राप्त किया जाता है। स्प्राउट्स जो कि दलों और अनाज का होता है वो अनाज में मौजूद प्रोटीन और विटामिन को बढ़ा हुआ होता साथ ही ये पानी के मिनिरल्स को सोखकर बनता है, इसलिए यह प्रोटीन, विटामिन्स, मिनिरल्स, फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत बन जाता है। इसमे स्टार्च की मात्रा बहुत कम होती है अतः ये फैट(चर्बी) नही बनने देता साथ ही ये पाचन में बहुत आसान होता है।




आइए जानते है स्प्राउट्स के स्वास्थ्य लाभ:



१) पाचन में सुधार:

स्प्राउट्स में असामान्य रूप से उच्च संख्या में एंजाइम होते हैं। यह शरीर के भीतर विभिन्न पाचन प्रक्रियाओं और रासायनिक प्रतिक्रियाओं को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। एंजाइम पाचन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और वे भोजन को प्रभावी ढंग से तोड़ने और पाचन तंत्र द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके अलावा, स्प्राउट्स में मौजूद उच्च फाइबर उन्हें पाचन कार्यों के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़ावा देता है। इसका सेवन कब्ज के साथ-साथ दस्त को भी दूर करने का एक शानदार तरीका हैं।


२) यह पाचन अंगों को मजबूत करता है:

स्प्राउट्स में एंजाइमों का खजाना होता है जो आमतौर पर भोजन के माध्यम से उपलब्ध नहीं होता है। यह प्रमुख प्रवाह शरीर के लिए एक किक स्टार्ट का प्रतिनिधित्व करता है, और इसकी पाचन गतिविधि को गंभीरता से प्रभावित कर सकता है। लगभग सभी शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए प्रोटीन आवश्यक है, विशेष रूप से कोशिकाओं के निर्माण और रखरखाव, अंग की मरम्मत, त्वचा पुनर्जनन, हड्डियों के विकास और मांसपेशियों के विकास के लिए। यह उच्च पोषक तत्व भी है, क्योंकि केवल मांसाहार को प्रोटीन का एक पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है, क्योंकि स्प्राउट्स शाकाहारी और शाकाहारी लोगों के लिए बहुत अनुशंसित हैं। वे प्रोटीन के उस स्रोत को कई लोगों के लिए बदल सकते हैं।


३) एनीमिया को रोकने में मदत करता है:

यदि आप लोहे के साथ पर्याप्त भोजन का उपभोग नहीं करते हैं, तो आपकी लाल रक्त कोशिका की गिनती कम हो जाती है, क्योंकि आयरन लाल रक्त कोशिका के उत्पादन का एक अनिवार्य हिस्सा है। इसके परिणामस्वरूप थकान, एकाग्रता में कमी, मतली, हल्की-सी कमजोरी और पेट की बीमारी हो सकती है। लोहे (और तांबे, जो स्प्राउट्स में भी पाया जाता है) की उचित मात्रा के साथ अपने लाल रक्त कोशिका की गिनती को बनाए रखने से, आप अपने शरीर में रक्त के परिसंचरण में सुधार कर सकते हैं, जिससे उनके प्रदर्शन का अनुकूलन करने के लिए अंग प्रणालियों और कोशिकाओं के ऑक्सीकरण में वृद्धि होती है।



४) वजन घटाने में मदत करता है:

स्प्राउट्स उन खाद्य पदार्थों में से एक है जो पोषक तत्वों में बहुत अधिक हैं लेकिन कैलोरी में बहुत कम हैं। इसका मतलब है कि आप अपने आहार में समझौता करने की चिंता किए बिना उन्हें खा सकते हैं। यह भोजन के बीच स्नैकिंग और ओवरईटिंग को कम कर सकता है, मोटापे की समस्या से पीड़ित व्यक्ति के लिए दो सबसे बड़ी समस्याएं हैं।

५) दिल की सेहत में सुधार:

स्प्राउट्स ओमेगा -3 फैटी एसिड का एक बड़ा स्रोत हैं, और हालांकि ये तकनीकी रूप से कोलेस्ट्रॉल का एक रूप हैं, उन्हें "अच्छा" कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल कोलेस्ट्रॉल) माना जाता है और वास्तव में आपके रक्त वाहिकाओं और धमनियों में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम कर सकता है।  स्प्राउट्स की पोटेशियम सामग्री भी रक्तचाप को कम करने में मदद करती है, क्योंकि पोटेशियम एक वासोडिलेटर है, और धमनियों और रक्त वाहिकाओं में तनाव को छोड़ सकता है। यह थक्के को कम करने और एथेरोस्क्लेरोसिस, दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को कम करते हुए परिसंचरण और ऑक्सीकरण को बढ़ाता है।

६) आंख की देखभाल:

विटामिन ए आंखों के कोशिकाओं को मुक्त कणों से बचाने के लिए एक एंटीऑक्सिडेंट एजेंट के रूप में कार्य करता है। इस तरह, स्प्राउट्स ग्लूकोमा, मोतियाबिंद, और धब्बेदार अध: पतन को रोकने में मदद कर सकते हैं। वास्तव में, यह दृष्टि को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है, इसलिए अपने स्प्राउट्स खाएं और दुनिया को थोड़ा और स्पष्ट रूप से देखना शुरू करें!



Monday, June 17, 2019

बच्चों में पाई जाने वाली मुख्य स्वास्थ समस्याएं। Some Common Health problems in children.

बच्चों में होने वाली समस्याएं:

बच्चों में बीमारियों का खतरा अधिक होता है, ये सभी बच्चे उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा एवं देखभाल के लायक हैं। एक अभिभावक के रूप में, सबसे महत्वपूर्ण उपचार दिशा-निर्देशों से अवगत होना जरूरी है ताकि आप सुनिश्चित कर सकें कि आपके बच्चे को सबसे अच्छी देखभाल मिल पा रही है। यहां जिन उपचारों पर चर्चा की गई है, वे वैज्ञानिक साक्ष्य और सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित हैं। हालांकि, ऐसे कारण हो सकते हैं कि जिसमे आपको बाल रोग विशेषज्ञ के पास आपके बच्चे के लिए अलग-अलग सुझाव हैं, खासकर यदि आपके बच्चे की चल रही चिकित्सा स्थिति या एलर्जी है। आपका बाल रोग विशेषज्ञ आपके साथ उपचार में किसी भी बदलाव पर चर्चा करेगा। यदि आपके पास अपने बच्चे की उचित देखभाल के बारे में कोई प्रश्न हैं, तो कृपया अपने बाल रोग विशेषज्ञ से चर्चा करें।



यहाँ भारत के कुछ सबसे सामान्य बाल स्वास्थ्य मुद्दों के बारे में बताया गया है।

सर्दी Cold and Cough:

बच्चों को बहुत अधिक सर्दी होती है - यह महीने में एक बार हो सकता है। सबसे अच्छा उपचार आमतौर पर तरल पदार्थ, आराम और आराम है, यदि एंटीबायोटिक्स ने मदद नहीं की। गले में खराश जो वायरस के कारण होती है, उसे एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता नहीं होती है। उन मामलों में, कोई विशिष्ट दवा की आवश्यकता नहीं है, और आपके बच्चे को सात से दस दिनों में बेहतर होना चाहिए। अन्य मामलों में, गले में खराश एक संक्रमण के कारण हो सकता है जिसे स्ट्रेप्टोकोकल (स्ट्रेप गले) कहा जाता है। लेकिन वे बच्चों में स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया से संक्रमित होने की संभावना रखते हैं यदि वे अन्य बच्चे की साथ में हैं या यदि किसी दूसरे भाई-बहन को बीमारी है। यद्यपि स्ट्रेप मुख्य रूप से खांसी और छींक के माध्यम से फैलता है, आपका बच्चा किसी खिलौने को छूकर भी प्राप्त कर सकता है जो एक संक्रमित बच्चे के साथ खेला गया है।



दमा Asthma:

यह एक सांस की परेसानी है, आपका बच्चा शारीरिक गतिविधि के दौरान या जब वह आराम कर रहा हो। या फिर शारीरिक गतिविधि के दौरान खाँसी हो सकती है, तब भी तरह यदि सांस की कमी हो रही है, तो वो अस्थमा का संकेत है। यदि आपको लगता है कि आपके बच्चे को अस्थमा है, तो अपने डॉक्टर को  जरूर दिखाए और परामर्श के साथ चले।


कान का दर्द Ear Pain:

कान के दर्द के अनेक कारण हो सकते है जैसे कान में संक्रमण (ओटिटिस मीडिया), पानी मे तैराक के कारण (कान नली में त्वचा का संक्रमण), एक ठंड या साइनस संक्रमण से दबाव, दांत दर्द जबड़े खिंचाव या अन्य। अंतर बताने के लिए, आपके बाल रोग विशेषज्ञ को आपके बच्चे के कान की जांच करने की आवश्यकता होगी। यदि आपके बच्चे के कान में दर्द तेज बुखार के साथ है, या दोनों कान में दर्द शामिल हैं, या यदि आपके बच्चे में बीमारी के अन्य लक्षण हैं, तो आपका बाल रोग विशेषज्ञ यह तय कर सकता है कि एंटीबायोटिक सबसे अच्छा इलाज है।


त्वचा में संक्रमण Skin Infection:

यदि आपके बच्चे बच्चे का कोई संक्रमण संबंधी इतिहास है या फिर आपके परिवार का त्वचा सम्बन्धी इतिहास हो तो उसे भी अपने चिकित्सक को जरूर बताएं, इससे उसे इलाज़ करने में आसानी होगी। बच्चों की त्वचा नाजुक और मुलायम होती है अतः उनपर अधिक कॉस्मेटिक पदार्थों का स्तेमाल नही करना चाहिए क्योंकि उनमें अनेक तरह के केमिकल का स्तेमाल होता है जो कि बच्चो की त्वचा के लिए हानिकारक होता है।


जूँ Lice:

ये छोटे परजीवी खुद को बच्चों के बालों से जोड़ते हैं, अंडे देते हैं और बहुत सारे खरोंच और खुजली का कारण बनते हैं। जब बच्चे पूर्वस्कूली या स्कूल में समूहों में सामाजिककरण शुरू करते हैं तो वे सबसे आम होते हैं। जूँ को हटाने का सबसे अच्छा तरीका एक दांतेदार जूँ कंघी और बहुत सारे सस्ते कंडीशनर के साथ है।



Saturday, June 15, 2019

अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम या चमकी बुखार। Acute Encephalitis Syndrome

अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम(AES) या चमकी बुखार:

अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी AES शरीर के मुख्य नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और वह भी खासतौर पर बच्चों में। जापानी एन्सेफलाइटिस सहित एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) कई अलग-अलग वायरस, बैक्टीरिया, कवक, परजीवी, रासायनिक / विषाक्त पदार्थों आदि के कारण होता है। मानसून की अवधि जब मच्छरों की मात्रा बढ़ जाता है या गर्मियों में जब तापमान बढ़ जाता है, तथा जबकि अन्य वायरस के कारण एन्सेफलाइटिस विशेष रूप से एंटरो-वायरस पूरे वर्ष में होता है।




भारत में, उत्तर और पूर्वी भारत में AES का प्रकोप खाली पेट खाने वाले बच्चों को बिना लीची के फल खाने से जोड़ा गया है। Hypoglycin A एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला अमीनो है जो कि अनचाहे लीची में पाया जाता है जो गंभीर उल्टी (जमैका उल्टी बीमारी) का कारण बनता है, जबकि MCPG लीची के बीजों में पाया जाने वाला है जो रक्त शर्करा, उल्टी, परिवर्तित मानसिक अवस्था में अचानक गिरावट का कारण बनता है, जिससे सुस्ती, बेहोशी, कोमा और मृत्यु हो सकती है। ये विषाक्त पदार्थ अचानक तेज बुखार का कारण बनते हैं और युवा, गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों में अस्पताल में भर्ती होने के लिए पर्याप्त गंभीर होते हैं।

अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के लक्षण:

१-शुरुआत तेज बुखार से होती है।
२-फिर शरीर में ऐंठन महसूस होती है।
३-इसके बाद शरीर के तंत्रिका संबंधी कार्यों में रुकावट आने लगती है।
४-मानसिक भटकाव महसूस होता है।



रोगज़नक़ों के कारण कारण एजेंटों की एक विस्तृत श्रृंखला और न्यूरोलॉजिकल हानि की तीव्र दर को ध्यान में रखते हुए, चिकित्सकों को निदान और उपचार के बीच एक छोटी खिड़की की अवधि की चुनौती का सामना करना पड़ता है। जेई एंडेमिक जोन में रहने वाले लोगों की स्वच्छता को शिक्षित और बेहतर बनाने के लिए कई सरकारी पहल की गई हैं। सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों ने एईएस प्रभावित आबादी को उचित पोषण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है क्योंकि अधिकांश प्रभावित लोग समाज के निम्न आर्थिक स्तर के हैं।

अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम(AES) या चमकी बुखार से बचाव के उपाय:

हाइपोग्लाइसीमिया यानी लो-ब्लड शुगर है असली जड़:

अक्यूट इंसेफेलाइटिस को बीमारी नहीं बल्कि सिंड्रोम यानी परिलक्षण कहा जा रहा है, क्योंकि यह वायरस, बैक्टीरिया और कई दूसरे कारणों से हो सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो अब तक हुई मौतों में से 80 फीसदी मौतों में हाइपोग्लाइसीमिया का शक है। शाम का खाना न खाने से रात को हाइपोग्लाइसीमिया या लो-ब्लड शुगर की समस्या हो जाती है, खासकर उन बच्चों के साथ जिनके लिवर और मसल्स में ग्लाइकोजन-ग्लूकोज की स्टोरेज बहुत कम होती है। इससे फैटी ऐसिड्स जो शरीर में एनर्जी पैदा करते हैं और ग्लूकोज बनाते हैं, का ऑक्सीकरण हो जाता है। 

लो ब्लड शुगर का यह है लीची कनेक्शन:

'द लैन्सेट' नाम की मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च की मानें तो लीची में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थ जिन्हें hypoglycin A और methylenecyclopropylglycine (MPCG) कहा जाता है , शरीर में फैटी ऐसिड मेटाबॉलिज़म बनने में रुकावट पैदा करते हैं। इसकी वजह से ही ब्लड-शुगर लो लेवल में चला जाता है और मस्तिष्क संबंधी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं और दौरे पड़ने लगते हैं। अगर रात का खाना न खाने की वजह से शरीर में पहले से ब्लड शुगर का लेवल कम हो और सुबह खाली पेट लीची खा ली जाए तो अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम AES का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 

स्वास्थ्य विभाग की सलाह- खाली पेट लीची न खाएं बच्चे :

बताया जा रहा है कि गर्मी के मौसम में बिहार के मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाके में गरीब परिवार के बच्चे जो पहले से कुपोषण का शिकार होते हैं वे रात का खाना नहीं खाते और सुबह का नाश्ता करने की बजाए खाली पेट बड़ी संख्या में लीची खा लेते हैं। इससे भी शरीर का ब्लड शुगर लेवल अचानक बहुत ज्यादा लो हो जाता है और बीमारी का खतरा रहता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने माता-पिता को सलाह दी है कि वे बच्चों को खाली पेट लीची बिलकुल न खिलाएं।



Monday, May 27, 2019

प्रवाल पंचामृत के गुणकारी फायदे। Benefits of Praval Panchamrit.

प्रवाल पंचामृत का प्रभाव किन बीमारियों में लाभदायक है?

प्रवाल पंचामृत रस आनाह (अफरा), गुल्म (Tumour), उदररोग (पेट के रोग), प्लीहा (Spleen), बद्धोदर (कब्ज), कास (खांसी), श्वास, मंदाग्नि, कफ-वात प्रकोप से होने वाले रोग, ह्रदय रोग, ग्रहणी, अतिसार, प्रमेह, सब प्रकार के मूत्ररोग, मूत्रकृच्छ (मूत्र में जलन),अश्मरी (पथरी) इन सबको दूर करता है।
यह बाजार में अनेक उत्पादकों का उपलब्ध है।



प्रवाल पंचामृत का कार्य विशेष: 

मध्यम कोष्ट (Stomach), यकृत (Lever), प्लीहा(Spleen) और ग्रहणी (Duodenum) पर अच्छा होता है। पाचक पित्त में द्रवत्व धर्म बढ़ने पर अन्न पचन होने का धर्म कम हो जाता है। फिर अन्न-विदाह (अन्न पचने की जगह जलने लगता है) और अपचन होने लगता है। इस कारण से कभी-कभी उदर (पेट) में अफरा भी आता है। बार-बार दूषित खट्टी डकार, भोजन करने के कुच्छ समय बाद पेट में भारीपन,पेट खींचना, पेट पर पत्थर बांधने समान जड़ता, शूल या वेदना बहुधा ना हो, बेचैनी, मध्यम कोष्ट (Stomach) में आहार जैसा का वैसा पड़ रहा हो ऐसा भासना आदि लक्षण होने पर प्रवाल पंचामृत रस नींबू के रस के साथ देना चाहिये। पुराने विकार में मात्रा कम देनी चाहिये और लंबे समय तक देना चाहिये। कंठ में दाह (छाती में जलन), खट्टी डकार आदि पित्त के अम्लता के लक्षण अधिक हो, तो अनार के रस या दाडिमावलेह के साथ देना चाहिये।

इसी तरह अनाह (मलावरोध) के हेतु से मध्यम कोष्ट में वातगुल्म (वायु की गांठ) समान अफरा आता है। यह वायु बृहदंत्र (Large Intestine) में संगृहीत होती है। इस पर प्रवाल पंचामृत रस का अच्छा उपयोग होता है।

पित्त-गुल्म के प्रारंभ में थोडा बुखार, प्यास, मुखमंडल और समस्त शरीर लाल हो जाना,भोजन करने के दो घंटे बाद भयंकर पेट दर्द, पसीना आना, अन्न के विदाह (जलन) के हेतु से छाती में जलन, पेट में दर्द वाले स्थान पर स्पर्श भी सहन न होना आदि लक्षण पित्त-गुल्म के लक्षण है। यह सब लक्षण होने पर प्रवाल पंचामृत रस आंवले के क्वाथ के साथ देने से उत्तम उपयोग होता है।

उदर (पेट) रोग में यकृत वृद्धि (Lever Enlargement) कारण हो, और पित्तप्रधान लक्षण जैसे के – आंख, त्वचा, नाखून और मूत्र में पीलापन; मुख, हाथ और पैर पर थोड़ी सूजन,पेट में वायु भरा रहना, पेट में थोडा पानी भरा रहना, बार-बार घबराहट, प्यास, मूत्र थोडा और अति पीला या लाल रंग का हो जाना, मल कच्चा, सफेद और दुर्गंधयुक्त हो जाना,मलशुद्धि योग्य न होना, कभी कभी छाती में जलन और घबराहट होकर उल्टी होना आदि लक्षण मुख्य होने पर प्रवाल पंचामृत रस का उपयोग अति हितावह है। अनुपान रूप से ताजा दही का पानी देने से पित्तप्रकोप जल्दी शमन होता है।

कास (खांसी) और श्वास रोग में अति घबराहट, अन्न का विदाह (अन्न पेट में जल जाता है),बेचैनी, ठंडे पदार्थ और ठंडी हवा की इच्छा, ठंडे पदार्थ और ठंडी हवा अच्छी लगना, दूध,अनार दाने आदि पित्तशामक वस्तु अच्छी लगना आदि लक्षण होने पर प्रवाल पंचामृत रस का उपयोग करना चाहिये।

पुराना अग्निमांद्य होने पर पचनेन्द्रिय संस्था (Digestion Sources) अशक्त हो जाती है। जिस से पाचक रस (Gastric Juice) का व्यवस्थित निर्माण नहीं होता। अपचन, पेट में वायु का भरा रहना, अफरा, दूषित डकार, रस की उतपत्त योग्य न होने से रक्त आदि धातुओं में क्षीणता आकर शरीर कृश और अशक्त हो जाना आदि लक्षण प्रतीत होते है। उस पर प्रवाल पंचामृत रस का उपयोग उत्तम होता है।

पित्त की विकृति से अतिसार (Diarrhoea) उत्पन्न हुआ हो, फिर उसी से संग्रहणी (Chronic Diarrhoea) हुई हो, तो भी प्रवाल पंचामृत रस का प्रयोग करना चाहिये। इससे पित्त प्रधान अतिसार और संग्रहणी में पित्तप्रकोप का शमन हो कर सत्वर रोगनिवारण होता है।

प्रमेह के विकार में पुराना अपचन कारण हो या तीव्र पित्तदोष की प्रधानता हो, तो प्रवाल पंचामृत रस उत्कृष्ट कार्य करता है। अतिशय प्यास, इस तरह मूत्र का प्रमाण अधिक और बार-बार होना, मूत्र काला, नीला, अति पीला या अति लाल होना, चिपचिपा पसीना सारे शरीर में और हाथ-पैरों के तलो में दाह, बार-बार गला सुखना, पानी पीने पर भी संतोष न होना आदि लक्षण होने पर प्रवाल पंचामृत रस देना चाहिये।

मात्रा: 

125 से 250 mg दिन में 2 बार शहद और पीपल, गुलकंद, मात्र शहद, नींबू के रस अथवा अनार के रस के साथ देवें।




Monday, May 13, 2019

आयुर्वेद और केसर का रिश्ता। Benefits of Saffron according to ayurved.

आयुर्वेद के अनुसार केसर और स्वास्थ में रिश्ता Ayurveda and Saffron:

स्वास्थ्य को मिलने वाले केसर के फायदे तो आप ज़रूर जानते होंगे। दूध में केसर डालकर पीना काफी अच्छा होता है, खासतौर से गर्भवती महिलाओं के लिए। यह एक कामशक्ति बढ़ाने वाला रसायन है। महिलाओं की कुछ बीमारियों में यह रामबाण साबित होता है। 


बच्चे के जन्म के बाद गर्भाशय की सफाई के लिए कुछ दिनों तक इसका नियमित सेवन करना बहुत अच्छा रहता है। केसर को सभी मसालों का राजा कहा जाता है। इसे सैफ्रॉन या जाफरान के नाम से भी जानते हैं। यह दुनियाभर में सबसे कीमती मसालों में से एक है। यह कई फ्लेवर में पाया जाता है और स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी होता है। क्योंकि केसर सौंदर्य निखारने में सहयोगी है, इसलिए सुंदर एवं गोरे बच्चे को पाने के लिए गर्भवती महिलाएं अपने आहार में केसर को शामिल करने की कोशिश करती हैं।


केसर इतना महंगा क्यों Why Saffron too costly?

यह हमेशा मुद्दा होता है कि यह इतना महंगा क्यों , इसका कारण इसके उत्पादन में मौसम की बाध्यता सबसे  मुख्य है।मगर ऐसी क्या बात है इस केसर में जो यह इतना महंगा है इसके अन्य भी कारण है जैसे खाद्य पदार्थ तो और भी कई हैं जो हमें काफी फायदा देते हैं। 



केसर का अनूठा स्वाद इसमें मौजूद केमिकल कंपाउंड पिक्रोक्रोकिन और सैफ्रानाल के कारण होता है इसलिए इसके अनोखे स्वाद की वजह से केसर का उपयोग दुनियाभर के कई पाक व्यंजनों में किया जाता है। केसर के इतना महंगा होने की क्या वजह है? इसके पीछे छिपा है एक ऐसा इतिहास जिसके बारे में काफी कम लोग जानते हैं। रोजाना थोड़ी मात्रा में केसर लेने से शरीर में कई प्रकार के रोग नहीं होते हैं। 

केसर के फायदे Benefits of Saffron:


१) अगर ज्यादा सर्दी-खांसी हो रही हो तो केसर दी जाती है क्योंकि ये कफ का नाश करने वाली औषधि है। शिशुओं को अगर सर्दी जकड़ ले और नाक बंद हो जाये तो मां के दूध में केसर मिलाकर उसके माथे और नाक पर मला जाये तो सर्दी का प्रकोप कम होता है और उसे आराम मिलता है। 



२) रात को सोने से पहले दूध में केसर डालकर पीने से अनिद्रा की शिकायत दूर होती है। अनिद्रा की शिकायत को दूर करने में भी केसर काफी उपयोगी होता है। इसके साथ ही यह अवसाद को भी दूर करने में मदद करता है। 



३) केसर की एक विशेष किस्म गठिया या वात रोग में राहत प्रदान करती है। केसर में पाये जाने वाला क्रोसेटिन मस्तिष्क में ऑक्सीजेनेशन को बढ़ाता है जिसके परिणामस्वरूप अर्थराइटिस के इलाज में काफी आसानी हो जाती है। 



४) सिर दर्द को दूर करने के लिए केसर का उपयोग किया जा सकता है। सिर दर्द होने पर चंदन और केसर को मिलाकर सिर पर इसका लेप लगाने से सिर दर्द में राहत मिलती है।

५) महिलाओं की कई शिकायतें जैसे - मासिक चक्र में अनियमिता, गर्भाशय की सूजन, मासिक चक्र के समय दर्द होने जैसी समस्याओं में केसर का सेवन करने से आराम मिलता है।



६) त्वचा को निखारने और सुन्दर बनाने के भी गुण केसर में पाए जाते है। महिलाएं अगर इसका सही तरीके से और सही मात्रा में सेवन करें तो त्वचा सुन्दर लगने लगती है। 

७) केसर और दूध का मिलाप बहुत प्रचलित तथा काफी चर्चित है, यह कई तरह की शारीरिक परेशानियां तो दूर करता ही है। साथ ही हमें ऊर्जा भी देता है, ताकि अनचाही छोटी-छोटी बीमारियों से बचा जा सके।

८) पुरूषों में वीर्य शक्ति बढ़ाने हेतु शहद, बादाम और केसर लेने से फायदा होता है। पेट संबंधित बीमारियों के इलाज में केसर बहुत फायदेमंद है। 





Saturday, May 11, 2019

गुड़ के सेवन के फायदे और नुकसान। Benefits of jaggery.

आयुर्वेद में गुड़ के सेवन को उत्तम क्यों बताया गया है Why ayurved suggest to eat Jaggery? 

यदि आप अपने मीठा खाने के शौक को भी पूरा करना चाहते हैं और अपनी सेहत के साथ भी समझौता नहीं करना चाहते हैं तो गुड़ आपके लिए एक बेस्ट आप्शन होता हैं। आयुर्वेद में भी गुड के उपयोग को फ़ायदेमंद बताया गया है, यह फेफड़ो में जमी गंदगी को सॉफ करता है। गुड में बहुत से औषधीय गुण होते हैं, कुछ लोग इसे ऐसे ही चबाना पसंद करते हैं, तो कुछ दूध या चाय में मिलकर पीते हैं, लेकिन आज हम आपको गुड़ खाने का एक ऐसा हैल्दी तरीका बताने जा रहे हैं जिसके प्रयोग से आपको कई तरह की स्वास्थ सम्बंधित परेशानियों से छुटकार मिल जाएगा।



गुड़ में चीनी का बाहुल्य होता है और इसकी मात्रा कभी कभी 90 प्रतिशत से भी अधिक तक पहुँच जाती है। इसके अतिरिक्त इसमें ग्लूकोज़, फ्रुक्टोज़, खनिज (चूना, पोटाश, फासफ़ोरस आदि) भी अल्प मात्रा में रहते हैं। इसमें जल का भी थोड़ा अंश रहता है जो ऋतु के अनुसार घटता बढ़ता रहता है। भारत एक ऐसा देश हैं जहाँ अक्सर लोगो को मीठा खाने का बड़ा शौक होता हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बढ़ती हेल्थ प्रॉब्लम के चलते अधिक मीठा खाने से परहेज करते हैं। आमतौर पर लोग सर्दियों के मौसम में ही इसका प्रयोग करते हैं, जबकि इसे साल भर खाया जा सकता है और शरीर को इसे ढेरों लाभ भी मिलते हैं। इसे आपको अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

गुड़ के प्रकार Type of Jaggery:


गुड़ कई प्रकार और आकार का होते हुए भी वस्तुत: एक ही पदार्थ है। ताड़ से प्राप्त ताड़ का गुड़ कहा जाता है, पर गन्ने से प्राप्त गुड़ इतना प्रचलित है कि इसे लोग केवल गुड़ ही कहते हैं। इसके विपरीत भी गुड़ का कई तरह से वर्गीकरण किया जा सकता है, जैसे साफ किया हुआ गुड़ एवं बिना साफ किया हुआ गुड़, छोटी पिंडियों एवं बड़ी पिंडियोंवाला आदि। 



रख दिए जाने पर, अर्थात् पुराना होने पर, इसके गुणों में परिवर्तन होता जाता है। इसलिये नया गुड़, एवं पुराना गुड़ इस भाँति भी उपयोग में इसका विवरण आता है। गुड़ स्‍वाद का ही नहीं बल्‍कि सेहत का भी खजाना है, ऐसा इसलिए कहा जाता है क्‍योंकि अकसर डॉक्‍टर बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए मीठे खासतौर से चीनी से दूर रहने की सलाह देते हैं। गुड़ न सिर्फ खाने में टेस्‍टी है बल्‍कि यह कई औषध‍िय गुणों से भरपूर है, यह एक ऐसा सुपर फूड है जिसके फायदों के बारे बहुत कम लोग ही जानते हैं। अतः गुड़ के कुछ फायदे इस प्रकार है:

गुड़ के फायदे Benefits of Jaggery:


१) गुड को दूध या पानी में मिलाकर पीने से शरीर में थकान दूर होती है और उर्जा मिलती है। गुड़ शरीर को मजबूत और एक्टिव बनाए रखता है। शरीरिक कमजोरी दूर करने के लिए दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से ताकत आती है और शरीर ऊर्जावान बना रहता है।

२) कई लोगो को समस्यां रहती हैं कि रोज सुबह उठते ही उनका पेट अच्छे से साफ़ नहीं होता हैं, इसे हम कब्ज के नाम से भी जानते हैं। ऐसी स्थिति में खाली पेट गुड़ और गुनगुना पानी लेने से लाभ मिलता हैं।

३) भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार गुड़ का उपभोग गले और फेफड़ों के संक्रमण के उपचार में लाभदायक होता है। गुड़ के प्रयोग से कोयले और सिलिका धूल से होने वाली फेफड़ों की क्षति को रोका जा सकता है। 




४) गुड़ आयरन का बहुत बड़ा स्रोत है, अगर आपका हिमोग्‍लोबिन कम है तो रोजाना गुड़ खाने से तुरंत लाभ मिलने लगेगा। गुड़ खाने से शरीर में लाल रक्‍त कोश‍िकाओं की मात्रा बढ़ जाती है, यही वजह है कि प्रेग्‍नेंट महिलाओं को डॉक्‍टर गुड़ खाने की सलाह देते हैं। एनिमिया के मरीजों के लिए तो गुड़ अमृत के समान है।

५) गुड के सेवन से त्वचा के हानिकारक टॉक्सिन्स बाहर निकलते है जिससे त्वचा सॉफ रहती है। ये शरीर में खून के प्रवाह यानी ब्लड सर्कुलेशन को सामान्य रखता हैं, जिसके चलते दिल सम्बंधित बीमारियाँ नहीं होती हैं।

६) गुड़ ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने का काम भी करता है। खासतौर पर हाई ब्‍लड प्रेशर से परेशान लोगों को रोजाना गुड़ खाने की सलाह दी जाती है यदि आपो हमेशा एसिडिटी या गैस की समस्यां रहती हैं तो वो भी इस गुड़ और पानी के कॉम्बिनेशन से हल हो जाएगी।

७) गुड़ सर्दी-जुकाम भगाने में काफी असरदार है। काली मिर्च और अदरक के साथ गुड़ खाने से सर्दी-जुकाम में आराम मिलत है। अगर किसी को खांसी की श‍िकायत है तो उसे चीनी के बजाए गुड़ खाना चाहिए। गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर खाने से गले की खराश और जलन में राहत मिलती है।

गुड़ खाने के नुकसान :

गुड़ की तासीर गर्म होती है अतः कुछ लोगो को इसके विपरीत प्रभाव हो जाते है। गर्म या ताजा गुड़ खाने से बदहजमी और पेट खराब होने की संभावना होती है।
गर्मी के दिनों में कुछ लोगो मे नाक से खून आने की समस्या भी हो जाती है, यह गुड़ के गर्म तासीर की बजह से होता है, अतः उन्हें गर्मी के मौसम में गुड़ के सेवन पर परहेज रखना चाहिए।



Friday, May 10, 2019

औषधीय गुणों से भरपूर है "मेंहदी" का पौधा। Benefits of Henna or Mehndi.

मेहदी और उसके पौधा कितना है लाभदायक :

हाथों पर रचने वाली खूबसूरत मेहंदी के तो आप दीवाने होंगे ही, इसके सेहत और ब्यूटी के फायदे जानेंगे तो और भी पसंद करने लगेंगे इसे। जानिए आपकी सेहत और सौंदर्य को निखारने में कितनी कारगर है मेहदी या हिना सबसे अच्‍छी बाल सौंदर्य सामग्री में से एक है जिसे भारत ने अन्‍य देशों के साथ साझा किया है। सदियों से महिलाएं मेंहदी के प्राकृतिक गुणों का उपयोग अपने बालों को मजबूत करने, उन्हें पोषण देने और सुंदर बनाने के लिए कर रही है। वे बालों के उपचार के लिए मेंहदी के पत्‍तों का उपयोग करती हैं। आधुनिक महिलाएं बालों के उपचार के लिए मेंहदी पाउडर का उपयोग भी करती हैं।



प्राचीन समय से ही मेंहदी का उपयोग कैंसर, बढ़ी हुई स्‍पलीन, सिरदर्द, पीलिया, त्‍वचा रोग और परजीवी के कारण होने वाले गंभीर दस्‍त के लिए किया जाता है। इन दिनों लोग पेट और आंतों के अल्‍सर के उपचार के लिए हिना का उपयोग करते हैं। मेंहदी का उपयोग डैंड्रफ, एक्जिमा, स्‍टेबीज, फंगल संक्रमण और घावों के उपचार के लिए भी किया जाता है।



मेहदी के स्तेमाल से होने वाले फायदे:


१) मेहदी की तासीर ठंडी होने के कारण मेहंदी का उपयोग शरीर में बढ़ी हुई गर्मी को कम करने में किया जाता है। हाथों और पैर के तलवों में मेहंदी लगाने से शरीर की गर्मी कम होती है।



२) उच्‍च रक्‍तचाप के रोगियों के त्‍लवों तथा हथेलियों पर मेहंदी का लेप समय समय पर लगाना लाभप्रद होता है। इससे अनिद्रा दूर हो कर रक्‍तचाप सामान्‍य होने लगता है।

३) खून साफ करने के लिए मेहंदी को औषधि के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए रात को साफ पानी में मेहंदी भिगोकर रखें और सुबह इसे छानकर पिएं।

४) घुटनों या जोड़ों में दर्द की समस्या होने पर मेहंदी और अरंडी के पत्तों को बराबर मात्रा में पीस लें और इस मिश्रण को हल्का सा गर्म करके घुटनों पर लेप करें।

४) मेहंदी के फूल उत्‍तेजक, हृदय को बल देने वाले होते हैं। इसका काढ़ा हृदय को संरक्षण करने तथा नींद लाने के लिये दिया जाता है।

५) सिरदर्द या माइग्रेन जैसी परेशानियों के लिए भी मेहंदी एक बेहतरीन विकल्प है। ठंडक भरी मेहंदी को पीसकर सिर पर लगाने से काफी फायदा होगा।

६) ताजा हरी पत्‍तियों को पानी के साथ पीस कर लेप करने से अधिक लाभ होता है। इससे गर्मी की जलन से आराम मिलता है। तलवों पर लेप करने से नकसीर बंद हो जाती है।

७) शरीर के किसी स्थान पर जल जाने पर मेहंदी की छाल या पत्ते लेकर पीस लीजिए और लेप तैयार किजिए। इस लेप को जले हुए स्थान पर लगाने से घाव जल्दी ठीक होगा।

८) मेहंदी के बीजों का उपयोग बुखार एवं मानसिक रोग में किया जाता है। खूनी दस्‍त में बीजों का उपचार है।



Thursday, May 2, 2019

योग के लाभ एवं मुख्य योगासन। Benefits of Yoga and top Yogasan.

योग और योगासन का परिचय:

योग का शाब्दिक अर्थ होता है जोड़ना, अतः जो योग कि विद्या योगाचार्य महर्षि पतंजलि ने बताया है उनके अनुसार "चित्त को एक जगह में स्थापित करना योग कहलाता है, जहाँ पर जीवात्मा को परमात्मा से मिलाया जाता है और वो एक हो जाते है वही योग है।" महाऋषि पतंजलि ने योग के सम्पूर्ण रहस्य को योगदर्शन में सूत्रों के रूप में प्रस्तुत किया है।

 


योगासन से तात्पर्य होता है कि शरीर की वह स्थिति जब शरीर और मन को शांत स्थिति में रखा गया है और वह सुख का अनुभव कर रहा है। योगासन दो प्रकार के होते है:

१) स्थिर आसन:
वह आसन जो बिना गति के बिना किसी प्रकार की शक्ति के प्रयोग से मात्र अभ्यास के माध्यम से स्थिर रखा गया हो स्थिर आसन कहलाता है।

२) गतिशील आसन:
यह उस तरह का आसन होता है जिसमे शरीर को शक्ति से साथ गतिशील रख कर किया जाता है।

कुछ योगासन जिन्हें आसानी के साथ किया जा सके तथा लाभ:


१) शुखासन:


 


शुखासन एक ऐसा योग है जिसमे मन को शान्ति प्रदान कि जाति है। यह बैठ कर किया जाने वाला आसन है जिसमे श्वास को सरलता पूर्वक अंदर और बाहर किया जाता है।

२) ताड़ासन:


 


ताड़ासन खड़े होकर किया जाने वाला योग है जिसमे दोनों हांथो को ऊपर उल्टा जोड़कर खिंचाव किया जाता है। इस आसन का अभ्यास शरीर को सुडौल, संतुलन और दृहत मिलती है।

३) त्रिकोणासन:


 


त्रिकोणासन में त्रिकोण का आकार बनता है इस योग का अभ्यास शरीर को लचीला और मन के तनाव को दूर करने वाला होता है।

४) बज्रासन:


 


बज्रासन बैठकर किया जाने वाला आसन है। यह शरीर को सुडौल और सुदृढ़ बनाता है, पाचन में लाभदायक एवं पीठ दर्द को आराम देने वाला योग अभ्यास है।

५) नमस्कार आसन:


 


नमस्कार आसन एक आसान और योग की सुरुआत में किया जाने वाला योग आसन है, इसमे दोनों हांथो को जोड़कर ऊपर उठाया जाता है।

६) वृक्षासन:


 



वृक्षासन एक पैर में वृक्ष के आकार में किया जाने वाला महत्वपूर्ण योग अभ्यास है। यह तनाव को दूर करता है मन को शांत रखने में सहायक एवं पैरों को मजबूती प्रदान करने वाला है।

७) कोडासन:

 



कोडासन पैरों को कोड की आकृति बनाने वाला आसन है। यह योग अभ्यास हड्डियों को एवं कमर को मजबूत करने वाला होता है।

८) भुजंग आसन:


 


भुजंगासन में उलट लेटकर कमर के ऊपरी भाग को ऊपर उठाया जाता है। इस योग अभ्यास से मेरुदंड में मजबूती आती है तथा कमर की मांसपेशियों को आराम मिलता है।

९) गोमुखासन:


 


गोमुखासन बैठ कर किया जाने वाला प्रमुख आसन है, इसमे शरीर को स्थिर करके पीछे हाथ को जोड़ा जाता है। यह शरीर को लचीला बनाने में मदत करता है।

१०) नटराज आसन:

 



यह आसन थोड़ा कठिन होता परंतु निरंतर अभ्यास किये जाने से सम्पूर्ण शरीर को लाभदायक होता है एवं शरीर को मजबूत करता है।



Saturday, April 27, 2019

फूलों और वनस्पतियों का सेहद में प्रभाव। Health Benefits of Flowers.

फूलों का सेहद में बहुत अच्छा प्रभाव होता है, जिसका स्तेमाल आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता रहा है:

ज्यादातर लोग हर तरह के फूलों का आनंद लेते हैं, आकार, या रूप के कारण इस सुंदरता को प्राप्त करते हैं। सुंदर होने के अलावा, पौधों और फूलों को किसी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य को उत्तम बनाने में लाभकारी होता हैं।  सुंदरता और जीवन के अलावा जो फूल हमारे घरों और रहने के स्थानों में लगाए जाते हैं, वे फूल स्वास्थ्य में लाभ प्रदान करते हैं। क्या कभी आपने सोचा है कि हम बीमार या अस्पताल में भर्ती मरीजों को फूल क्यों देते हैं? इस लेख में, हम आपको उन फायदों के बारे में बताएंगे जो फूल मनुष्यों को लाभकारी हो सकते हैं।



यहां आपके रोजमर्रा के जीवन के ताजा खिले हुए फूलों से होने वाले कुछ स्वास्थ्य लाभ दिए गए हैं:

भावनात्मक स्वास्थ्य सुधार में लाभदायक :

फूलों को प्राप्त करना, चाहे वे किसी अन्य व्यक्ति से भेजे गए हों या आपने उन्हें अपने लिए खरीदा हो, आपको तत्काल मानसिक बढ़ावा देती है। फूलों का एक गुलदस्ता एक संकेत देता है कि जिसने आपको दिया है वो आपकी परवाह करता है, और वो व्यक्ति आपकी भलाई के लिए बहुत कुछ कर सकता है। चमकीले रंगों और सुखदायक खुशबू के साथ एक सुंदर फूल का गुलदस्ता एक ही समय में एक कमरे और आपके मूड को उज्ज्वल कर देता है।



मेमोरी और एकाग्रता में लाभकारी:

बहुत से लोगों के पास एक ऐसा क्षण होता है जहां वे अपनी एकाग्रता को पूरी तरह से खो देते हैं। रिक्त स्थान में पौधों को रखने से एकाग्रता और स्मृति बढ़ाने में मदद मिल सकती है। पौधे हवा को ऑक्सीजन देते हैं, आपके मस्तिष्क की कोशिकाओं को बढ़ाते हैं और आप अच्छा महसूस करते हैं। आप उन पौधों का चयन कर सकते है जिनका आसानी से देखभाल और संयोजन किया जा सकता है। कुछ ऐसे पौधों  है जिसे सप्ताह में केवल एक बार पानी की आवश्यकता होती है और जल्दी से बढ़ते हैं। कुछ पौधें और फूल मनोरंजक होते हैं, जो खुशियों के साथ ही साथ आपके मस्तिष्क को सुपरचार्ज करने के लिए भी अच्छा होता है।



फूल और पौधे हवा को शुद्ध करते हैं:

फूल एवं वनस्पति किसी भी अन्य पौधे की तरह हवा को शुद्ध करते है हम जिस हवा में सांस लेते हैं, उसे डिटॉक्स करने में आवश्यक भूमिका निभाते हैं। सौभाग्य से प्रकृति के संतुलन बनाने की ये अहम प्रणाली है। इनडोर फूल हमारे घरों में उपयोग किए जाने से कुछ उत्पादों द्वारा उत्पन्न पर्यावरण में विषाक्त गैसों को अवशोषित करते हैं। जब हम स्वच्छ हवा में सांस लेते हैं, तो हमारी सांस प्रणाली के संक्रमण से पीड़ित होने की संभावना कम हो जाती हैं।



तनाव को कम करने में मदत करते है:

अच्छी नींद में मददगार होते है साथ ही तनाव को कम करने के लिए फूलों की गंध बहुत कारगर हो सकती है। मेंहदी की एक ताजा टहनी सिरदर्द और तनाव दोनों में एक साथ मदद कर सकती है। लैवेंडर या कैमोमाइल जैसी कुछ आपकी परेशानियां दूर कर सकती हैं।



फूल त्वचा के लिए अच्छे होते हैं:

फूल का स्तेमाल उज्ज्वल, स्वस्थ त्वचा प्राप्त करने का एक प्राकृतिक तरीका है। जब आप अपने घर या कार्यालय में फूल रखते हैं, तो वे पर्यावरण में नमी जारी करते हैं। नमी आपकी त्वचा को अत्यधिक शुष्क होने से बचाती है। लैवेंडर त्वचा की सूखापन के लिए एक आदर्श उपाय है, यह पर्यावरण को बहुत अधिक नमी जारी करता है जो आपकी त्वचा स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

Thursday, April 25, 2019

हार्ट अटैक से बचाव में उपयोगी है आयुर्वेद, जानिए कुछ उपाय..। Ayurvedic treatment of heart attack, prevention and remedies.

तेजी से बढ़ती हार्ट अटैक की समस्या का कारण:

अनियमित और अनियंत्रित दिनचर्या, तनाव और असंतुलित भोजन तेजी से बढ़ती हार्ट अटैक की समस्या का प्रमुख कारण है। आयुर्वेदिक पद्यति से इलाज़ एवं परहेज से इसके बचाव संभव है। भगवान व्रह्मा ने जब पृथ्वी का सृजन किया तो प्रकृति में ही रोगों से बचाव के तत्व प्रदान किया तथा यदि कोई बीमारी हो तो उसका इलाज भी प्रकृति के माध्यम से ही संभव बनाया। हृदय शरीर का अति महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील अंग है अतः इसे संतुलन में रखना अतिआवश्यक है।


क्या एवं क्यों होता है हार्ट अटैक(हृदय घात):

उपरोक्त कारणो के अलावा अतिरिक्त प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट के सेवन से कोलेस्ट्रॉल रक्त नलिकाओं को जमा होने लगता है, औऱ ये कोलेस्ट्रॉल धमनियों में रक्त के बहाव को बाधित करने लगता है। कोलेस्ट्रॉल किसी मोम की तरह जमा होने से जब रक्त का बहाव बाधित होता है तो तीव्र दर्द एवं सांस लेले में परेसानी होने लगती है।



आयुर्वेद के अनुसार हार्ट अटैक से बचाव के परहेज:

आयुर्वेद का सिद्धांत है कि इलाज़ हमेशा दोनों में बीमारियों के कारण और निवारण में किया जाता है। अतः हार्ट अटैक से बचने के लिए आयुर्वेद में परहेज का महत्वपूर्ण स्थान है, ये परहेज खान-पान के होते है, दिनचर्या में बदलाव के होते है।साथ ही व्यायाम महत्पूर्ण है हार्ट अटैक से बचाव में। कुछ परहेज इस प्रकार है:

१) धूम्रपान , शराब या किसी भी तरह की नसीले पदार्थों के सेवन से परहेज जरूरी होता है। 

२) चाय , कॉफी जैसे पदार्थों के अधिक सेवन से बचाव करना जरूरी होता है। साथ ही चॉकलेट एवं आइस क्रीम के सेवन से परहेज आवश्यक है।

३) अधिक तली हुए भोजन , पैकड बंद भोजन, फ़ास्टफूड और जंकफूड से परहेज जरूरी होता है। रिफाइंड तेल ,खोया, पनीर एवं मक्खन का सेवन नही करना है। 



आयुर्वेद के अनुसार कुछ घरेलू एवं आवश्यक खाद्य पदार्थ जो हार्ट अटैक से बचाव करते है:

आयुर्वेद के अनुसार कुछ प्राकृतिक एवं घरेलू तरीको के स्तेमाल से हार्ट अटैक से बचाव किया जाना संभव है, उन में से कुछ उपाय इस प्रकार है:

१) व्यायाम: नियमित व्यायाम एवं टहलने से कोलेस्ट्रॉल में कमी आती है, तथा इस घातक समस्या को दूर किया जा सकता है।

२) तनाव मुक्ति: तनावपूर्ण जीवन इस समस्या का महत्वपूर्ण कारण है, अतः किसी भी तरीके से तनाव को दूर करना जरूरी है। योग तनाव को दूर करने में बहुत कारगर होता है अतः योग को अपनाकर तनावमुक्त रहा जा सकता है।

३) अंकुरित अनाज जैसे देसी चना , मूंग, गेंहू का सेवन करना चाहिए।

४) फलीदार सब्जियों जैसे बीन्स, मटर, सेम का सेवन करना चाहिए।

५) पपीता, अनार, अंगूर, सेव जैसे फलों का सेवन करना लाभकारी होता है।

६) पीपल, हल्दी, केसर मिला हिअ गुनगुना दूध का सोने से पहने सेवन करना चाहिए।

७) आयोडीन नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करे, साथ ही शक्कर और रिफाइंड तेल के सेवन से बचे।

Monday, April 22, 2019

आयुर्वेद का परिचय। Introduction of Ayurveda.

आयुर्वेद का परिचय Introduction of Ayurveda:

आयुर्वेद एक भारतीय चिकित्सा पद्यति है, जिसकी सुरुआत कई वर्षों पहले भारत में हुई थी। भारतीय आयुर्वेद का पूरा रहस्य भारत के इतिहास से जुडा हुआ है। आज के दिन में विश्व भर के ज्यादातर आधुनिक और वैकल्पिक चिकित्सा, आयुर्वेद से लिया गया है। प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा की शुरुवात देवी-देवताओं के ग्रंथों से हुआ था और बाद में यह मानव चिकित्सा तक पहुंचा।


सुश्रुत संहिता (Sushruta Samhita) में यह साफ़-साफ लिखा गया है कि धनवंतरी, ने किस प्रकार से वाराणसी के एक पौराणिक राजा के रूप में अवतार लिया और उसके बाद कुछ बुद्धिमान चिकित्सकों और खुद आचार्य सुश्रुत को भी दवाइयों के विषय में ज्ञान दिया।

कैसे किया जाता है आयुर्वेद में उपचार How to Treat in ayurveda:

आयुर्वेद के उपचार में ज्यादातर हर्बल चीजों का उपयोग होता है। ग्रंथों के अनुसार कुछ खनिज और धातु पदार्थ का भी उपयोग औषधि बनाने में किया जाता था। यहाँ तक की प्राचीन आयुर्वेद ग्रांटों से सर्जरी के कुछ तरीके भी सीखे गए हैं जैसे नासिकासंधान (Rhinoplasty), पेरिनिअल लिथोटोमी (Perineal Lithotomy), घावों की सिलाई (Wounds Suturing), आदि। वैसे तो आयुर्वेद के चिकित्सा को वैज्ञानिक तौर पे माना गया है पर इसे वैज्ञानिक तौर पर पालन ना किया जाने वाला चिकित्सा प्रणाली कहा जाता है। पर ऐसे भी बहित सारे शोधकर्ता हैं जो आयुर्वेदिक चिकित्सा को विज्ञानं से जुड़ा (Proto-Science) मानते हैं।


आयुर्वेद चिकित्सा और और आधुनिक अग्रेजी चिकित्सा का अंतर Differences b/w Ayurvedic treatment and allopathy treatment:

आयुर्वेद का हमारे जीवन में बहुत महत्व है । आज का मानव आयुर्वेदिक दवाइयों को छोड़कर अंग्रेजी दवाइयों का उपयोग कर रहा है । जिससे मनुष्य का एक रोग तो ठीक हो जाता है लेकिन उन दवाइयों का उपयोग करने के बाद मनुष्य के शरीर में कुछ और नई बीमारियां उत्पन्न हो जाती है । जिससे वह शारीरिक रूप से कमजोर हो जाता है। लेकिन आयुर्वेदिक औषधि के द्वारा उपचार करके हम व्यक्ति के स्वास्थय को ठीक करके उनको  होने वाले रोगों से भी बचाते है । 
आयुर्वेद में ऐसी जड़ी - बूटियों हैंजिससे रोगी की हर बीमारी को ध्यान में रखते हुए उनका उपचार किया जाता है । जो भी व्यक्ति आयुर्वेदिक पद्धति से अपना इलाज करवाता है। तो चिकित्सक पहले रोगी के शरीरकी अवस्था मन और आत्मा कीअवस्था , वात , पित्त , कफ और मल और मूत्र का परीक्षण करके, पीड़ित व्यक्ति का उपचार आरम्भ करता है । इस प्रकार की प्रक्रिया को सांस्थानिक पद्धति कहा जाता है । इसमें रोगी केलक्षणों पर भी ध्यान दिया जाता है । आयुर्वेद चिकित्स्या में प्रयोग होनेवाली औषधि एक प्रकार का रसायन होता है । 



आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग किस प्रकार करना चाहिए , और इसके उपयोग  के बाद क्या खाना चाहिए , किन चीजो का परहेज रखना चाहिए। इन सभी बातों का विस्तृत वर्णन आयुर्वेद में किया गया है ।