Friday, December 28, 2018

एंग्जायटी डिसॉर्डर । Anxiety Disorder.

क्या होता है एंग्जायटी डिसॉर्डर

हमेशा चिंता या डर में जीने की आदत पड जाए तो आगे चलकर यही मनोदशा एंग्जायटी डिसॉर्डर जैसी गंभीर समस्या में बदल सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में इसके अलग-अलग लक्षण नजर आते हैं, लेकिन स्थायी डर और चिंता लगभग सभी में देखे जाते हैं। इसी वजह से उनमें चिडचिडापन और आक्रोश बढता जा रहा है। इसके अलावा आधुनिक समाज में हर व्यक्ति अकेला है। किसी के भी पास दूसरे की बातें सुनने की फुर्सत नहीं है। जब ऐसी नकारात्मक भावनाओं पर व्यक्ति का कोई नियंत्रण न हो और तमाम कोशिशों के बावजूद छह महीने से ज्यादा लंबे समय तक इसके लक्षण दिखाई दें तो यह समस्या एंग्जायटी डिसॉर्डर का रूप धारण कर सकती है। अगर ये लक्षण ज्यादा तीव्र न हों तो समय बीतने के साथ समाप्त हो जाते हैं, अन्यथा एंग्जाइटी डिसार्डर की समस्या हो सकती है। आनुवंशिकता भी इसकी प्रमुख वजह है।

एंग्जायटी डिसॉर्डर के प्रकार

प्रमुख लक्षणों के आधार पर इस मनोवैज्ञानिक समस्या के कई अलग-अलग प्रकार निर्धारित किए जाते हैं, जो इस प्रकार हैं :

जनरलाइज्ड एंग्जायटी डसॉर्डर Generalized Anxiety Disorder :
इस समस्या से पीडित लोग सकारात्मक परिस्थितियों में भी ऐसे लोग चिंतित होने की कोई न कोई वजह ढूंढ लेते हैं।
बेवजह बहुत ज्यादा चिंतित रहते हैं।  हमेशा चिंता में रहना इनकी आदत होती है जिसका कोई तर्क भी नही होता है।

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर Obsessive-Compulsive Disorder (OCD) :
 इससे पीडित लोग लगातार चिंतित या भयभीत रहते हैं। ऐसे में वे कुछ अजीब आदतें विकसित कर लेते हैं। जैसे कि अगर गाने की आदत लग गयी तो गाते ही रहते है।

पैनिक डिसॉर्डर Panic Disorder:
ऐसे लोगों को बेवजह मौत का भय सताता रहता है। भूत जैसी चीजों या किसी व्यक्ति विशेष से भयभीत रहते है।

पोस्ट स्ट्रेस डिसऑर्डर Post-Traumatic Stress Disorder (PTSD) :
 ऐसी अवस्था मे लोग अत्यधिक चिंता में डूबे रहते है, जैसे नौकरी, बच्चों की पढ़ाई या उनकी शादी या काम।

सोशल एंग्जाइटी डिसॉर्डर  Social Phobia (or Social Anxiety Disorder):
 ऐसी समस्या से पीडित व्यक्ति हरदम ऐसा लगता है कि लोग उसे ही घूर रहे हैं। वह भीड वाली जगहों और सामाजिक समारोहों में जाने से बचने की कोशिश करता है क्योंकि ऐसे माहौल में उसे बहुत घबराहट महसूस होती है।

कैसे करें बचाव

पूरी नींद ले

रोजाना के कामकाज को निश्चित करिए  एवम पूरी नींद ले क्योंकि अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी से मस्तिष्क पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाता। अनिद्रा से एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा बढ जाता है।

पौस्टिक आहार:

भोजन में फलों और हरी सब्जियों को शामिल करें क्योंकि मस्तिष्क को भी पोषण की पूरी जरूरत होती है।

एक्सरसाइज , योग, व्यायाम:

आकाग्रता के लिए व्यायाम और योग अभ्यास से बहुत लाभ होता है, इसलिए आत्मविस्वाश भी बढ़ता है। लोगों के साथ दोस्ती बढाएं और खुलकर अपनी भावनाएं शेयर करें।

मनोवैज्ञानिक सलाहकार

किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह ले और बिना सलाह के कोई भी दवा मत ले साथ ही कैफीन , अल्कोहल, तम्बाखू , ड्रग्स से दूर रहे क्योंकि ये परेशानियों को और बढ़ाती है।




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