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Saturday, January 19, 2019

खसरा का उपचार। Measles or Rubella in Hindi.

खसरा Measles or Rubeola or Rubella:

खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है। यह एक रूबेला नामक सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन की उपलब्धता के बावजूद विश्व स्तर पर छोटे बच्चों में मृत्यु का एक महत्वपूर्ण कारण है। बच्चों के लिए नियमित खसरा टीकाकरण, और ऐसे राज्य जंहा कम आयु का कवरेज है ऐसे राज्यो में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियानों को चलाया जा रहा है। साथ ही वैश्विक खसरा से होने वाली मौतों को कम करने के लिए प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियाँ सारे विश्व मे चल रही है।

खसरा के लक्षण SymSynon of Measles

प्रारंभिक लक्षण, जो आमतौर पर संक्रमण के 10-12 दिनों बाद दिखाई देते हैं, संक्रमित व्यक्तियों के नाक, मुंह या गले से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से खसरा फैलता है।
उनमें तेज बुखार, नाक बहना, आंखों में खून आना और मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे शामिल हैं। कई दिनों बाद यह दाने के रूप में विकसित होता है। चेहरे और ऊपरी गर्दन पर शुरू होता है और धीरे-धीरे नीचे की ओर फैलता है।

खसरा का टीका Vaccine of Measles.

रूबेला नामक टीका पिछले चालीस वर्ष के आसपास से डियावज रहा है यह एक प्रभावी टीका है जो सक्रिय रूबेला वायरस से आधारित है। रूबेला का टीका पूरे जीवन भर के लिए प्रतिरक्षा प्रदान कर सकती है।ल

खसरा में क्या खाएं What to eat in Measles:

१) हल्का भोजन करना चाहिए दलिया एवं खिचड़ी का सेवन करे जिसके कारण सरीर को आराम महसूस हो।
२) हो सके तो फलो का सेवन करे जिसमे पानी की मात्रा ज्यादा होती है। खरगुजा, अंगूर खाये और संतरा और नींबू का सेवन करे जिसके कारण शरीर को वियामिन मिले।
३)  पानी का सेवन ज्यादा करे कम से कम तीन लीटर पानी अवस्य पिये।
४) तेल मसाले और तली हुई पदार्थो का सेवन न करे।

खसरा होने पर क्या करे What to do in Measles:

१) घर पर रहे घूमे फिरे न क्योंकि ये वायरस लोगो के सम्पर्क में आने से फैलता है।
२) ज्यादा से ज्यादा आराम करें क्योंकि ये आपके शरीर को कमजोर करता है।
३) TV और मोबाइल का उपयोग न करे ये आपके आंखों के लिए नुकसान दायक हो सकता है।


सारांश Conclusion 

खसरा एक खतरनाक और जानलेवा हो सकता है ये बच्चो को विशेष रूप से प्रभावित करता है। कई वर्षों पहले ये विश्व भर में महामारी के रूप में फैला था, भारत मे भी इसका बहुत प्रभाव था। इसकी वैक्सीन और दवा उपलब्ध है परंतु खसरा होने से बचने के लिए साफ सफाई और जानकारी आवश्यक है।



तो दोस्तो आपको ये जानकारी कैसी लगी अपने सुझाव दे। और शेयर करे।

Thursday, January 17, 2019

पथरी (किडनी स्टोन) का आयुर्वेदिक इलाज। Ayurvedic Treatment of kidney Stones in Hindi.

पथरी की समस्या kidney Stones Problem in hindi. 

किडनी स्टोन या पथरी की समश्या आमतौर पर असंतुलित खानपान कम मात्रा में पानी पीने से बढ़ती है इसकी मूल बजह नमक का दूसरे खनिज पदार्थो के साथ मिलने के कारण होता है। यह समान्यतः पेशाब के साथ निकल जाता है परंतु ये जब बड़ा हो जाता है और बड़े हो जाने पर बहुत सी परेशानियों सामना करना पड़ता है। पथरी कई तरह का होता है कुछ कैल्शियम ऑक्सलेट से होता है, कुछ यूरिक एसिड और संक्रमण से भी होता है। कुछ पुरानी बीमारियो के कारण भी पथरी की समस्या होती है।


पथरी (किडनी स्टोन) के लक्षण Symptoms of Kidney Stones. 

पेट के निचले हिस्से में और पीठ पर अचानक बहुत तीव्र दर्द होता है जो समय के साथ बढ़ता जाता है। इसमे लगातार या कुछ रुककर दर्द होता है दर्द में उतार चढ़ाव होता है दर्द का स्थान पथरी किस स्थान पर है इसपर निर्भर करता है।
पेसाब में कमी या जलन जैसी समश्याये हो सकती है, हो सकता है पेसाब रुक रुक कर होता है। खून या कुछ अलग तरह की गंध भी हो सकती है। पेसाब करने में कठिनाई होती है।

अगर इनमे से कुछ लक्षण होते है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करे।

पथरी से बचाव के तरीके Prevention of kidney Stones .


१) अधिक मात्रा में पानी पिये

ज्यादा पानी पिये ताकि जिन तत्वो के कारण पथरी होती है वो इकठ्ठा न हो पाए। शरीर को अशुद्धियो से मुक्ति करने में कारगर होता है। साथ ही फलों का जूस और नींबू पानी भी फायदेमंद होता है।

२) सौंफ का सेवन

सौफ बहुत कारगर होता है  सौंफ, मिश्री, सूखा धनिया  लेकर रात को पानी में भिगोकर रख दीजिए, इसे 24 घंटे के बाद छानकर पेस्‍ट बना लीजिए। इसके एक चम्‍मच पेस्‍ट में आधा कप ठंडा पानी मिलाकर पीने से पथरी पेशाब के रास्‍ते निकल जाता है।

३) अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन न करे

किडनी स्टोन है तो अपने भोजन में प्रोटीन की मात्रा को संयमित कर लें. ऐसी स्थिति में अधिक मात्रा में मांस / मछली का सेवन करने से परहेज करें।

४) बेल पत्र उपयोग

बेल पत्र पर जरा सा पानी मिलाकर घिस लें, इसमें एक साबुत काली मिर्च डालकर सुबह खायें। दूसरे दिन काली मिर्च दो कर दें और तीसरे दिन तीन,  ऐसे सात दिनों तक लगातार इसका सेवन कीजिए। बाद में इसकी संख्‍या कम कीजिए, दो सप्ताह तक प्रयोग करे।

५) सोडियम और विटामिन सी का सेवन कम करें


भोजन में विटामिन सी और सोडियम की बहुत अधिक मात्रा होती है तो ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है.।जंक फूड, डिब्बा बंद खाना और नमक के बहुत अधिक सेवन से बचना चाहिए।

६) बाहरी खाद्य वस्तुओं और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन न करे

बाहर का खाना बहुत हानिकारक हो सकता है साथ ही बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक का सेवन न करे , हो सके तो नींबू पानी या संतरे का जूस पिये।

सारांश Conclusion 

किडनी स्टोन घातक होता है और इसमें होने वाला दर्द भी असहनीय होता है, किसी भी स्थिति में इसे हल्के में मत ले । जल्द उपचारों से इसे कम किया जा सकता है नही तो ऑपरेशन करना पड़ता है।


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Tuesday, January 15, 2019

कान के दर्द का उपाय। Ear pain remedy in hindi

कान के दर्द का उपाय Ear Pain remedy in hindi:


अधिकांश कान दर्द बिना किसी उपचार के अपने आप ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर यह बेहतर नहीं हो रहा है, या यदि आपके पास अन्य, अधिक गंभीर लक्षण हैं, तो आपको डॉक्टर को दिखाने की आवश्यकता हो सकती है। कान दर्द के कई कारण हो सकते हैं, यह सर्दी, फ्लू या संक्रमण का एक प्रारंभिक संकेत हो सकता है। यदि आपको कान का संक्रमण है, तो बुखार और अस्थायी सुनाई देना हो सकती है। ज्यादातर कान का दर्द कि समस्या बच्चों को ही होती हैं, लेकिन वे वयस्कों को भी हो सकता हैं। एक कान का दर्द, एक या दोनों कानों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन अधिकांश समय एक कान में होता है। कान का दर्द कम या तेज हो सकता है, और यह लगातार महसूस हो सकता है।

कान के दर्द को कैसे रोकें How to stop Ear pain:

कान दर्द के जोखिम वाले लोगों को तेज संगीत और पर्यावरणीय शोर से बचना चाहिए। यदि आप जोर शोर से नहीं बच सकते हैं, तो यह एक अच्छा जोड़ी इयरप्लग या शोर-रद्द करने वाले हेडफ़ोन का स्तेमाल करना चाहिए। कान के दर्द को रोकने के लिए, धूम्रपान करने और धुएं के संपर्क में आने से बचें। एलर्जी धूल ये सभी आपके को परेशान कर सकते हैं और कान का दर्द पैदा कर सकते हैं।
सभी विदेशी वस्तुओं को कान से बाहर रखें और, यदि आप तैरते हैं, तो इयरप्लग और एक स्नान टोपी पहनें। हमेशा तैराकी, स्नान, या स्नान के बाद अपने कानों को ध्यान से सूखाने के लिए समय निकालें।

कान दर्द के कारण Causes of Ear pain:

कान का दर्द कान में चोट, सूजन या संक्रमण के कारण हो सकता है। कान दर्द का सबसे आम कारण कान का संक्रमण है। ओटिटिस मीडिया मध्य कान का एक संक्रमण है, जबकि ओटिटिस एक्सटर्ना कान नली का एक संक्रमण है।

कान के दर्द का इलाज Treatment of Ear Pain:

आपका डॉक्टर कान के संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक्स लिख सकता है, हालांकि कुछ शोध बताते हैं कि एंटीबायोटिक्स हमेशा एक प्रभावी उपचार नहीं हो सकता है।
कुछ देर तक दर्द वाले कान के लिए गर्म मफलर या कपड़े से ढके गर्म पानी की की थैली से सेक ले । लेकिन अगर कान के संक्रमण का संदेह है, तो कान के अंदर के भाग को गीला होने से बचाएं।
ज्यादातर मामलों में, कान का दर्द बिना किसी उपचार के कम हो जाता है, लेकिन यदि यह दूर नहीं जाता है, या अन्य गंभीर लक्षणों के साथ है, तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

सारांश Summery 

सरीर का हर अंग बहुत महत्त्वपूर्ण है अतः उनका बारीकी से ख़याल रखना चाहिए किसी भी तरह की कमी रखना खतरनाक साबित हो सकता है।

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Sunday, January 13, 2019

फ़ूड एलर्जी के कारण और लक्षण। What is food Allergy in hindi.

क्या है फ़ूड एलर्जी और कारण What is food allergy and Reasons in hindi:

यह हमारे सरीर के प्रतिरक्षा तंत्र(Immunity system) में हुई गड़बड़ी के कारण होता है। प्रतिरक्षा तंत्र का काम होता है वैक्टीरिया और वायरस से सरीर की रक्षा करना परन्तु जब वो भोजन के तत्वो में अंतर नही समझ पाता तो कई तरह के विपरीत क्रिया करता है। आमतौर पर बच्चों में फ़ूड एलर्जी के लक्षण ज्यादा पाए जाते है।

फ़ूड एलर्जी के लक्षण synonyms of food allergy:

फ़ूड एलर्जी मुख्यतः जिन खाद्य पदार्थों से होती है वो ये है:
१) अंडा २) दूध ३) गेहूं ४) मूमफली ५) मछली
इसके अलावा कुछ लोगो मे सब्जियों और फलों की भी एलर्जी होती है।

फ़ूड एलर्जी के लक्षण समान्यतः इस प्रकार है:
१) उल्टी। २) गले की तकलीफ। ३) सांस लेने में दिक्कत ।
४) सरीर में खुजली होना । ५) जीमचलन या दस्त लगना।
६) चेहरे में सूजन। ७) आँख में और होंठो में सूजन।

फ़ूड एलर्जी के उपाय:

अगर फ़ूड एलर्जी में लक्षण पता चले तो इसका जल्द से जल्द मेडिकल चेकअप परवाये। और पता चलने पर डॉक्टर से परामर्श ले। डॉक्टरों द्वारा इसका इलाज यही बताया जाता है कि जिस पदार्थ से आपको एलर्जी है उस पदार्थ का सेवन न करें।


सारांश Conclusion 

आजकल के परिवेश में हमारे आसपास रचनात्मक खाद्यान सामग्री उपलब्ध जिसके सेवन से
नई नई बीमारियों से लोग ग्रसित हो रहे है , इसलिए सावधानी और जानकारी के साथ भोजन करे ताकि आप स्वस्थ रहे।

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Friday, January 11, 2019

तनाव से होने वाली मुख्य स्वास्थ समस्या। Top Health problems related to Stress.

तनाव के कारण होने वाली समस्या Stress related Health problems in Hindi:

तनाव मनुष्य के अंदर बहुत सी घातक स्वास्थ समश्याओं की उत्पत्ति का कारण होता है, ये घातक इसलिए है क्योंकि इसके कारण होने वाली समस्याओं से मृत्यु हो जाती है। सरीर में तनावपूर्ण बनता जाता है और पता नही चलता , व्यक्ति को सब सामान्य लगता है और वो कभी भी किसी घातक वीमारी की चपेट में आ जाता है। तनाव की वजह से होने वाली कुछ स्वास्थ समस्या ये है:

१) हृदय रोग Heart Disease
२) फेफड़ा रोग Asthama 
३) डिप्रेसन Dipression
४) उदर रोग Ulcerative 
५) मोटापा Obesity
६) सरदर्द Headache
७) मधुमेह Diabetes

हृदय रोग Heart Disease

सरीर में तनाव से सबसे ज्यादा खतरा हृदय संबंधी रोग का होता है क्योंकि तनाव की वजह से उच्च रक्तचाप की समस्या होती है जिसके वजह से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

फेफड़ा रोग Asthama

अस्थमा जैसी बीमारियों का वायु प्रदूषण के अलावा एक मुख्य वजह तनाव है। खास तौर पर बच्चों में होने वाले आस्थमा का कारण गर्भावस्था के दैरान मां के द्वारा लिया गया तनाव या धूम्रपान मुख्य वजह है।

डिप्रेशन Depression

तनाव के बढ़ने के कारण इंसान में डिप्रेशन में जाने का खतरा हो जाता। नकारात्मक सोच, घबराहट , बेचैनी होने लगती है। यह तनाव के दौरान पैदा हुए अनिद्रा के कारण होता है। मनुष्य का अपनी सोच और भावनाओं में कंट्रोल कम हो जाता है जिसकी वजह से वो डिप्रेस रहने लगता है।

उदर रोग ulcerative

अनिद्रा की वजह से मनुष्य के पाचन तंत्र में बहुत बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से लीवर और अल्सर जैसी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। हार्मोन का बैलेन्स खराब हो जाने की वजह से इनके अलावा भी बहुत सी बीमारी हो सकती है।

मोटापा Obesity

तनाव की स्थिति में हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ने के कारण मोटापा की समस्या बढ़ जाती है। मोटापा से ग्रस्त इंसान के पेट के आसपास और पैरों में ख़ासकर वसा का जमाव बढ़ जाता हैं। जिसकी वजह से सरीर में मोटापा दिखने लगता है।

सरदर्द Headache

तनावग्रस्त व्यक्ति को सरदर्द से जूझना पड़ता है कभी कभी ये ज्यादा बड़ जाने के कारण माइग्रेन जैसी समस्या बन जाती है। ये सब तनाव में अनिद्रा और हार्मोनल इंबैलेंस के कारण होताहै।

मधुमेह Diabetes

तनाव के कारण सरीर में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ जाता है जिसके कारण मधुमेह होता है साथ ही ब्लड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा होता है।




सारांश Conclusion
तनाव को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी होता है गुस्से पर नियंत्रण और सकारात्मक सोच से तनाव पर काबू पाना आसान होता है, या किसी डॉक्टर से परामर्श ले। क्योंकि ये कई बीमारियों को जन्म देता है जिसकी बजह से आप और आपका परिवार का आर्थिक और मानसिक कष्ट होता है।


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Wednesday, January 9, 2019

कब्ज का घरेलू एवं आयुर्वेदिक इलाज। Ayurvedic and Home Treatment of Constipation in Hindi.

कब्ज (Constipation):

कब्ज एक आम समस्या है जो दैनिक खानपान , असंतुलित जीवनशैली से मुख्यतः हो रहा है और भी बहुत से कारण है। कब्ज की अवस्था मे इंसान मल त्यागने में परेसानी होती है, जंहा सामान्य अवस्था मे एक या दो बार मल त्याग किया जाता है वंही कब्ज होने में कई दिन ठीक से पेट साफ नही होता। कब्ज कई तरह की पेट से जुड़ी हुई बीमारियों को जन्म देता है इसके अलावा पाईल्स, चर्मरोग, सरदर्द जैसी समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। यह हर वर्ग और आयु के लोगो को प्रभावित कर रहा है जिससे इंसान ताजगी और आनंद का अनुभव नही कर पाता।

कब्ज के लक्षण Symtosym of Constipation:

१) दो से तीन दिन तक ठीक से पेट साफ न होना
२) मल का सूखा और कम निकलना
३) मल त्यागने में ज्यादा समय या जोर लगना
४) पेट मे मरोड़ या दर्द या गैस बनना
५) सर में या पैरो में दर्द रहना
६) उल्टी होना , जी मचलना
७) बदहजमी या एसिडिटी होना
८) पाईल्स की शिकायत होने

कब्ज के कारण Reasons of Constipation:

१) अनियमित खानपान
२) तली हुये भोजन का अधिक सेवन
३) व्यायाम में कमी
४) बिना पचे भोजन के बाद भी भोजन
५) कम मात्रा में पानी पीना
६) रसे वाले भोजन का कम खाना
७) मादक पदार्थो का सेवन
८) अधिक मात्रा में दावा का सेवन

कब्ज दूर करने का घरेलू उपाय Home Remedies of Constipation:

१) अधिक से अधिक पानी पीयें: सरीर में पानी की कमी से कब्ज होता है इसलिए 3-4 लीटर पानी अवस्य पिये।

२) नियमित व्यायाम करें: व्यायाम करने से पाचन क्रिया मजबूत होती है इसलिए नियमित व्यायाम करें।

३) खाने में रसेदार भोजन ले: रसेदार और कम मसालेदार भोजन आसानी से पचता है और पेट भी आसानी से साफ होता है इसलये रसेदार भोजन समयबद्ध तरीके से ले।

४) खाने के बाद ठंडा पानी न पिएं: ठंडा पानी पाचन क्रिया को कमजोर करता है जिससे भोजन पचाने में अधिक समय लगता है, इसलिए ठंडा पानी न पिएं। गर्मियों में मटके का पानी पिये।

५) सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना: सुबह गुनगुना पानी पीने से आंतों में दबाव पड़ता है और पेट ठीक से साफ होता है, इसके अलावा बिना पचे हुए भोजन को भी आसानी से पचा जाता है।

६) सोने से पहले त्रिफला चूर्ण या इसबगोल ले: रात को सोने से पहले एक चमच्च त्रफल चूर्ण गुनगुने पानी मे घोल कर ले सुबह आसानी से पेट साफ हो जाता है।

७) खाने में सलाद, पपीता , अमरूद शामिल करें: ये सभी पदार्थ पाचक है इनके अलावा भी वो पदार्थ जो आसानी से पचते है और पाचन क्रिया को मजबूत करते है उनको खाने में शामिल करें।

८) दिन में नींबू पानी और रात में गर्म दूध ले।



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Tuesday, January 8, 2019

मुख्य पांच स्वास्थ्य समश्याये। Top 5 most common Helth issues.

हमारे देश और आसपास बहुत सी स्वास्थ से जुड़ी हुई बहुत सी समस्या है जो कि आधुनिक जीवनशैली , नई तकनीक में बढ़ती निर्भरता से हो रही है। यंहा पर बात है उनमे से मुख्यतः 5 समश्याओं के बारे में जिसे समझना जरूरी है:

१) सारीरिक मेहनत और पोषण
२) तम्बाखू
३) HIV/Aids
४) पर्यावरण प्रदूषण
५) मोटापा या अतिभार

सारीरिक मेहनत और पोषण:

जिस तरह विकास और आगे बढ़ने के लिए नई तकनीक जरूरी है उसी तरह अच्छे स्वास्थ्य के लिए उन तकनीकों पे आश्रित नही रहना जरूरी है। खाये हुए भोजन को पचा कर ऊर्जा में बदलना आवश्यक है, और आवश्यक है शारीरिक मेहनत , व्यायाम, चलना , दौड़ना, योग करना।
साथ ही भोजन ऐसा हो जिसमें सभी पोषक तत्व हो और सही मात्रा में ही भोजन करे। हो सके तो अपने भोजन को प्लान करके समयबध्ध तरीके से करे।

तम्बाखू:

"स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तंबाखू" सभी को पता है , भारत सरकार भी इसका प्रचार करती है कि तम्बाखू का सेवन न करे। परन्तु उत्पादन, बिक्री, और सेवन में कोई रोक नही है। देश कि बड़ी आबादी इस पर निर्भर हो रही है और कैंसर, अस्थमा जैसी बीमारियों में जकड़ रही है।

HIV/AIDS:

सरकार ने इसके बचाव और बचाव के तरीकों के प्रचार प्रसार में बहुत जोर दिया है, परन्तु फिर भी देश की बहुत बड़ी आबादी इस बीमारी की शिकार हो रही है। ये खतरनाक है क्योंकि अबतक इसके रोकथाम के कारगर टीके, और दवाओं की उपलब्धता नही है।

पर्यावरण प्रदूषण:

पर्यावरण प्रदूषण देश की बढ़ती हुई समस्या है जो की गाड़ी वाहनों के बढ़ते हुए स्तेमाल ,फैक्टरियों से निकलने वाले धुंए और बड़े पैमाने पेड़ो के कटाव से हो रहा है। यह कई सांस से जुड़ी हुई बीमारियों की जड़ है। इससे मौसम में अस्थिरता बन रही है जिससे जल संकट भी बढ़ रहा है।

मोटापा या अतिभार:

असामान्य जीवनशैली, असन्तुलित खानपान और व्यायाम की कमी के कारण आजकल ज्यादातार लोग मोटापा से ग्रस्त है। खाद्यपदार्थ में रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से और साथ ही साथ बीमारियों में स्तेमाल होने वाले एलोपेथिक दवाओ के विपरीत प्रभाव से भी अतिभार की समस्या बढ़ रही है। संतुलित खान पान और व्यायाम से इस समस्या से निजात मिल सकता है।



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