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Tuesday, March 19, 2019

महिलायों में धूम्रपान का दुष्प्रभाव। Smoking Effects in women's.

धूम्रपान Smoking:

तंबाकू संबंधित बीमारियों को आज दुनिया में सबसे बड़ी प्राण घातक के रूप में देखा जा रहा है। भारत जैसे देशों में अकाल मृत्यु का सबसे बड़ा कारण कहा जाता है। भारत में प्रति वर्ष लगभग 500000 मौतें तम्बाकू संबंधित बीमारियों के कारण होती हैं और एक ताज़ा अध्ययन का अनुमान है कि पुरुषों की बहुत बड़ी संख्या ने धूम्रपान के कारण अपना जीवनकाल घटा लिया है। पुरुषो की अपेक्षा महिलाओं में धूम्रपान करने कि औसतन कमी है फिर भी इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।



प्रतिदिन एक सिगरेट से धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के लिए, धूम्रपान ना करने वाले व्यक्ति की अपेक्षा दिल के दौरे की संभावना पचास प्रतिशत है। सरकारें मीडिया में धूम्रपान विरोधी अभियानों के साथ धूम्रपान के दीर्घकालीन खतरों के बारे में जोर देते हुए लोगों को रोकने की कोशिश कर रही है। धुम्रपान करने वालों के आसपास के लोगो को भी प्रभावित करता है, यही कारण है कि धूम्रपान पर प्रतिबंध जरूरी है। कई छेत्रों में ऐसा कानून है जो कि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थलों जैसे बार, पब और रेस्तरां में धूम्रपान करने से रोकने के लिए बनाया गया है।

धूम्रपान का इतिहास History of Smoking

धुयें का उपयोग कई धर्मों में अलग अलग कार्यो के लिए स्तेमाल में लाया जाता रहा है। भारतीय हिंदू धर्म मे लगभग 5000 हजार साल पहले से हवन, धूप एवं दीप में होता रहा है। उसके बाद आयुर्वेद चिकित्सा में भी इसका उपयोग क्या जाता था। बाद में यूनानी, क्रिस्चन, कैथेलिक एवं मुस्लिम धर्मों में भी स्तेमाल किया है लगा।



आधुनिक यंत्रों द्वारा तम्बाखू के द्वारा धूम्रपान लगभग 2000 साल से सुरु हुआ है, जब तम्बाखू नही था तब भांग और कई मादक पदार्थों का उपयोग होता था।

महिलाओं में धूम्रपान से रोगों का खतरा Smoking Effect in women's:




धूम्रपान करने वाले पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या कम है, परंतु महिलाओं में धूम्रपान का खरता पुरुषों की अपेक्षा अधिक होता है। महिलाओं में हानिकारक प्रभाव ज्यादा होने का कारण उनकी प्राकृतिक संरचना है। धूम्रपान करने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। धूम्रपान या सिगरेट पीने से महिलाओं में होने वाले प्रभाव इस प्रकार है:

१) गर्भधारण और स्तनपान:

धूम्रपान करने वाली महिलाओं में गर्भधारण की छमता में कमी आती है , साथ ही गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने से गर्भपात और भ्रूण के विकास में कमी का खतरा अधिक हो जाता है। स्तनपान करवाने वाली महिलाओं में दूध की कमी और बच्चे में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

२) फेफड़े तथा किडनी की बीमारियों का खतरा

धूम्रपान से फेफड़ों जुड़ी बीमारियों का खतरा तो होता ही है साथ मे किडनी की बीमारियों का भी खतरा बढ़ जाता है।

३) मानसिक रोग और तनाव

लगातार धूम्रपान तनाव और चिड़चिड़ापन को बढ़ाता है, साथ ही मानसिक बीमारियों के बढ़ने का खतरा हो जाता है।

४) जल्द बुढ़ापा आना

लगातार धूम्रपान रक्त में ऑक्सीजन और पोषण की कमी कर देता है जिसके कारण झुर्रियां बढ़ने लगती है और महिलाओं में इसका प्रभाव अधिक होता है क्योंकि उनकी त्वचा अधिक संवेदनशील होती है।

५) कैंसर

धूम्रपान कैंसर का कारक माना गया है और इनका खतरा महिलाओं में अधिक होता है क्योंकि उनका शरीर अधिक संवेदनशील होता है। हृदय रोगों का भी खतरा बढ़ जाता है।

Thursday, March 14, 2019

शरीर मे भोजन का परिवर्तन: आयुर्वेद के अनुसार। Transformation of food in body: according to ayurveda.

क्या है भोजन : आयुर्वेद के अनुसार? What is food: according to ayurveda?


भोजन हमारे शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है, हमे यह मालूम होना चाहिए कि समृद्ध एवं पौष्टिक मिट्टी के भीतर पृथ्वी में वास्तविक भोजन बढ़ता और उसका सृजन होता है। यह भोजन अन्य सभी तत्वों को अवशोषित करने के लिए जल, अग्नि, वायु और सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है। हर बार जब हम पौष्टिक भोजन खाते हैं, तो हम उन तत्वों को अपने शरीर में लाते हैं। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, हमारे द्वारा खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों को हमारा शरीर सात ऊतकों (धात) में बदलने में लगभग एक महीने का समय लगाता हैं। यह एक महीने की समय सीमा तब होता है जब शरीर मे विषाक्त पदार्थों का जमाव न हो और हमारा शरीर सम्पूर्ण भोजन को पचा रहा हो।
बहुत सारे ऐसे कारक होते है जो हमारे द्वारा ग्रहण किए गए खाद्य पदार्थों को पचाने और उसके पोषण को अवशोषित करने की हमारी समग्र क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, अतः अपने भोजन और उसके पोषण का ध्यान दे।


भोजन करने का उपयुक्त तरीका Best way to have food:

भोजन भगवान के द्वारा दिया गया वरदान है जो हमारे शरीर के लिये बहुत जरूरी होता है अतः भोजन का सम्मान करना चाहिए। कुछ निम्न तरीको को अपनाए: 

१) भोजन तभी करना चाहिए जब जठराग्नि मजबूत हो अर्थात ठीक से भूख लगने पर ही भोजन करे अन्यथा न करे।

२) खाने के दौरान कोल्ड ड्रिंक का सेवन कम से कम करें ये जठराग्नि को कमजोर करता है।

३) अपने भोजन को ठीक से पचने देने के लिए खाने के 10-15 मिनट बाद आराम करें, इससे आपके पेट में एंजाइम, पित्त और हार्मोन के साथ मिश्रण करने की आवश्यकता है।

४) भोजन के तुरंत बाद पानी न पिएं, ये जठराग्नि को कम कर देता है।

५) भोजन के बाद मीठा या ठंडी चीजो के सेवन से परहेज करें।



ऊतक परिवर्तन का प्रवाह Flow of tissue change:


ऊतक परिवर्तन के क्रम को जानना बहुत जरूरी है और आयुर्वेद में इस प्रवाह के माध्यम से चलने के लिए कहा गया है। भोजन का ऊतको में परिवर्तन का क्रम इस प्रकार है:




१) रस Liquid particles

हमारे ऊतकों की पहली परत जो बनती है उसे रस कहा जाता है। जिसमें हमारे शरीर में मुख्य तरल पदार्थ जैसे कि प्लाज्मा और लसीका, और महिलाओं के लिए उनके स्तन का दूध और मासिक धर्म शामिल हैं। रस शरीर को रसदार रखता है! और अगर शरीर अच्छी तरह से हाइड्रेटेड है, साथ ही यह हमारे गहरे मनोवैज्ञानिक स्तर पर संतुष्ट महसूस कराता हैं।

२) रक्त Blood

स्वस्थ रस स्वस्थ रक्त की ओर जाता है तथा रक्त की कमी को दूर करता है और हमारे शरीर को उत्तेजित महसूस कराता है।

३) माँस (मांसपेशी) Muscles

कठोर रक्त नई मांसपेशियों के ऊतकों को बनाने में मदत करता है। स्वस्थ मांसपेशियों के साथ मनुष्य शारीरिक चुनौतियों को लेने के लिए साहसी और आत्मविश्वास महसूस करता है।

४) वसा Fat

जरूरी वसा का ऊतक हमारी भलाई के लिए एक आवश्यक घटक है और शरीर के दूसरे ऊतकों को तेल और चिकनाई प्रदान करता है।

५) हड्डी Bones 

हड्डी की ताकत उन सभी ऊतकों पर आधारित होती है जो इससे पहले विकसित होते हैं। मजबूत हड्डियों के साथ, आप लंबे समय तक खड़े रहने, अच्छे आसन को बनाए रखने, और हड्डियों को मजबूत करने वाली गतिविधियों को सीखेंगे, ताकि सामान्य बीमारियों को रोका जा सके।

६) मज्जा (तंत्रिका तंत्र) Marrow 

आपके तंत्रिका तंत्र की मजबूरी और शक्ति सीधे आपके भोजन से संबंधित है। यदि आप कम पोषक तत्व वाले खाद्य पदार्थ खाते हैं, तो आपका तंत्रिका तंत्र तनाव को सहन नहीं करेगा। उच्च पोषक तत्व वाले खाद्य पदार्थ दिन-प्रतिदिन के जीवन के तनाव से निपटने के लिए तथा अधिक लचीला ऊतक बनाने में मदद करेंगे।

७) शुक्रा (प्रजनन तरल पदार्थ) The Sperm

परिवर्तन का अंतिम चरण जीवन या रचनात्मकता को बनाए रखने के लिए आवश्यक तरल पदार्थों का उत्पादन करता है। जिसे शुक्रा कहते है, इसका निर्माण पुरुषो में होता है और सबसे आखरी चरण में होता है।





Monday, March 11, 2019

पैनिक अटैक से सावधानी और बचाव के तरीके। Ways of caution and prevention from panic attacks.

क्या होता है पैनिक अटैक डिसऑर्डर What is panic attack disorder?

पैनिक अटैक एक बढ़ती हुई समस्या है क्योंकि इसके बारे में लोगो को जानकारी कम होती है , पैनिक अटैक से न केवल बुजुर्ग परंतु हर आयु के व्यक्ति पर देखा जाता है। इसके लक्षण हार्टअटैक कि तरह हो सकते है परंतु पैनिक अटैक (पैनिक डिसऑर्डर) का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। किसी को भी अनावश्यक रूप से घबराने की जरूरत नहीं है।


पैनिक अटैक के लक्षण Symptoms of Panic Attack:

पैनिक अटैक में अचानक घबराहट, चिंता, और भय की भावना होती है, जैसे कि कुछ बहुत ही भयानक रूप से होने वाला है। पैनिक अटैक और उनके संकेत और लक्षण कुछ क्षणों से लेकर कई घंटों तक रह सकते हैं। पैनिक अटैक की लंबाई आम तौर पर इस बात से निर्भर होती है कि कोई व्यक्ति कितना भयभीत है और वे किस तरह से डरते हैं, तथा इस पर  किस तरह कि प्रतिक्रिया देते हैं। 


गंभीर पैनिक अटैक में कई बार अधिक से अधिक छटपटाहट, लंबे और अधिक शक्तिशाली रूप से व्यक्ति भयभीत होता है। अधिक भयभीत होने पर पीड़ित की स्थिति भयावह हो सकती हैं, और वे आपके नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं। जो लोग अधिक भयभीत होते हैं, वे जल्द इसके लक्षण सीखते है कि उन्हें अत्यधिक अप्रिय अनुभव हो रहे हैं। फिर भी, पैनिक अटैक (पैनिक डिसऑर्डर) का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। किसी को भी अनावश्यक रूप से पीड़ित होने की जरूरत नहीं है। पैनिक डिसऑर्डर शब्द का उपयोग तब किया जाता है जब लक्षण अधिक और जल्दी होते हैं और किसी व्यक्ति के जीवन में समस्याएं पैदा करते हैं। 


पैनिक अटैक डिसऑर्डर के लक्षण बनाम हार्ट अटैक Panic attacks Vs Heart attack:

पैनिक अटैक के लक्षण और हार्ट अटैक के लक्षण समान दिख सकते हैं क्योंकि उनके लक्षण समान हो सकते हैं। हालाँकि, अधिकांश चिकित्सा पेशेवर इनके लक्षणों के बीच अंतर को जल्दी से बता सकते हैं क्योंकि दिल के दौरे और पैनिक अटैक के लक्षण अलग-अलग होते हैं। यदि आप इस बात से अनिश्चित हैं कि पैनिक अटैक के लक्षण हैं या हार्ट अटैक के लक्षण हैं, तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें। यदि डॉक्टर का मानना है कि आपके लक्षण पैनिक अटैक के हैं, तो आप आश्वस्त महसूस कर सकते हैं कि उसका निदान आसानी से संभव है। इसलिए, दिल के दौरे से जोड़ कर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।


पैनिक अटैक और इसके लक्षणों को कैसे रोकें How to prevent from Panic Attack?

चूँकि पैनिक अटैक या तो अत्यधिक चिंताजनक सोच या अत्यधिक तनाव वाले शरीर के कारण होता है, जिसे हम तनाव-प्रतिक्रिया हाइपरस्टिम्यूलेशन कहते हैं, हम अपनी अत्यधिक चिंताजनक सोच को समाप्त करके और शरीर के तनाव को कम करके उन्हें रोक सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक बार जब आप नोटिस करते हैं कि आप उत्सुक सोच के साथ खुद को डरा रहे हैं, तो आप अपनी सोच को शांत करने वाले विचारों को बदल सकते हैं, जो तनाव प्रतिक्रियाओं और उनके शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभावों को रोक देगा। जब आप अपने आप को शांत करते हैं, तो आपका शरीर तनाव हार्मोन के प्रवाह को रोककर शरीर को नियंत्रित करने में मदत करेगा। तनाव हार्मोन के निष्कासन में नियत्रंण किया जाता है तो समय के साथ संवेदनाएं, लक्षण और घबराहट की भावना कम हो जाएगी।



Sunday, March 10, 2019

चुकंदर के मुख्य पांच फायदे। Most Five Benefits of Beetroot in hindi.

चुकंदर Beetroot:



चुकंदर गहरे लाल रंग का पदार्थ होता है जिसकी जड़ का सेवन मुख्य रूप से सलाद या ज्यूस के रूप में किया जाता है। चुकंदर का स्तेमाल सब्जी के तौर पर भी होता है। इसमें मौजूद कई पोषक तत्व इसे खास बनाते है, और यह कई तरह की बीमारियों से लड़ने और बचाव में भी सहायक होता है। वैसे तो चुकंदर का उत्पादन सम्पूर्ण भारत मे होता है परंतु मध्य और उत्तर भारत मे ज्यादा होता है। भारत मे इसका अनेक भाषाओं में अलग अलग नाम होते है अतः इसके अंग्रेजी नाम बीटरूट का ज्यादा स्तेमाल होता है।

चुकंदर के सेवन से इन कुछ बीमारियों में फायदेमंद होता है:

१) खून में RBC कि कमी Anemia:

अनीमिया वह अवस्था है जब खून में RBC या हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है, जिसकी भरपाई के लिए आयरन युक्त प्रोटीन की अव्यसक्ता होती है, चुकंदर में इसकी मात्रा अधिक होती है अतः ये खून में हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करता है। अतः थोड़ी थोड़ी मात्रा में चुकंदर के सेवन से अनीमिया को दूर किया जा सकता है।

२) मधुमेह  Diabetes

मधुमेह या डाईबेटिस की बीमारी शरीर मे इंसुलिन की कमी या खून के शुगर लेवल में असंतुलन के कारण होता है। चुकंदर में मौजूद फाइटोकैमिकल और अन्य तत्व मधुमेह को कम करने अर्थात ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदत करता है।
यह बीमारी सम्पूर्ण भारत मे तेजी से बढ़ रही है जो बहुत चिंताजनक है।

३) मजबूत पाचनतंत्र Strong Digestive System:

चुकंदर में मौजूद तत्व आंतों और लीवर को भोजन पचाने में मदत करता है। यह आंतों को मजबूत करता है और भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदत करता है।

४) मोटापा या वजन घटाने में Reduce Obesity:

चुकंदर या बीटरूट मेटाबॉलिज्म को मजबूत करता है जिससे शरीर मे वसा का जमाव कम होता है। शरीर मे वसा के जमाव कम होने से मोटापा को कम करने में मदत करता है।

५) हृदय रोग को कम करता है Reduce Heart Disease:

चुकंदर का सेवन कोलेस्ट्रॉल को घटाता है जो हृदयघात का सबसे बड़ा कारण होता है। चुकंदर तनाव से होने वाले हृदय प्रभाव को रोकने में मदत करता है साथ ही रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी मदत करता है।



Friday, March 8, 2019

महिलाओं से जुड़ी मुख्य स्वास्थ्य समस्याएं । Women's related top health issues.

महिलाओं में बढ़ती बीमारियां Women's Health issues:



पुरुष और महिला दोनों विभिन्न स्थितियों में अपने आप को ढालते हैं, कुछ स्वास्थ्य समस्याएं महिलाओं को सामान्यतः अधिक प्रभावित करते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को दिल का दौरा पड़ने से होने वाली मौतें अधिक होती हैं।अवसाद (डिप्रेशन) और चिंता महिला में अधिक बार दिखाई देते हैं। यूरिन संबंधित बीमारियों की स्थिति महिलाओं में अधिक बार होती है साथ ही यौन सम्बंधित रोग महिलाओं को अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। महिलाओं में सबसे अधिक बार निम्नलिखित बीमारियां स्वास्थ्य के जोखिम को बढ़ा रही हैं। ये है:

१) दिल की बीमारी Heart Disease:

लोग हृदय रोग को पुरुषों में एक आम मुद्दा मानते है, लेकिन यह स्थिति पुरुषों और महिलाओं को लगभग समान रूप से प्रभावित करती है। फिर भी, केवल 54 प्रतिशत महिलाओं को पता है कि हृदय रोग से उनको खतरा है और वो सचेत रहती है। WHO के अनुसार लगभग 50% महिलाएं उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल या धुएं से पीड़ित है, यही वो कारण है जो हृदय रोग को बढ़ा रहे है।


२) स्तन कैंसर Breast cancer:

स्तन कैंसर, जो आमतौर पर दूध नलियों के laval में उत्पन्न होता है, अन्य अंगों में फैल सकता है। यह समूचे विश्व मे महिला आबादी को प्रभावित करने वाला सबसे आक्रामक कैंसर है। यह स्थिति विकसित देशों में महिला आबादी के बीच अधिक पनप रहा है।
सुरुअति समय मे, स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं के स्तन गांठ विकसित होती है। अधिकांश स्तन गांठ खतरनाक नही होती, लेकिन महिलाओं के देखभाल के लिये डॉक्टर द्वारा जाँच करना महत्वपूर्ण है।

३) स्त्री रोग संबंधी परेशानिया (एसटीडी)

महिलाओं के मासिक धर्म चक्र में रक्तस्राव एक सामान्य हिस्सा है। परंतु अगर कुछ असामान्य है जैसे अधिक पेसाब, समय के पहले रक्तस्राव, पेसाब में जलन अन्य बीमारियों के संकेत हो सकते है। यौन समस्याओं (एसटीडी) या प्रजनन पथ के कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का संकेत दे सकते हैं। हालांकि सही देखभाल या डॉक्टर की मदत से हल्के संक्रमणों का आसानी से इलाज कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अनियंत्रित छोड़ दिया जाता है, तो वे बांझपन या किडनी की बीमारियों जैसी स्थितियों को जन्म दे सकते हैं।



४) गर्भावस्था कि दिक्कत Pregnancy Problem:

गर्भावस्था के दौरान पहले से मौजूद किसी भी तरह की परेसानी स्थिति खराब कर सकती है, जिससे मां और उसके बच्चे के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है। वे समस्या है: अस्थमा, मधुमेह और अवसाद जो गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चे को नुकसान पहुँचा सकते हैं, अगर ठीक से इनका नियंत्रण न किया जाए।
अवसाद या डिप्रेशन महिलाओं बम गर्भावस्था के दौरान RBC को कम कर देता है जिससे एनीमिया होने का खतरा होता है। विभिन्न प्रकार के और समस्या महिलाओं के गर्भावस्था के दौरान देखी गयी है लेकिन यह अच्छी बात है कि गाइनकॉलजिस्ट की मदत से इनका इलाज़ किया जा सकता है।

५) ऑटोइम्यून रोग Autoimmune Disease:

ऑटोइम्यून रोग तब होता है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली immediately System जो कि वायरस से लड़ने की जगह स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करते हैं। यह समस्या पेट मे अधिक बनती है जिनमे मुख्य है अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोज डिसीस। इनके लक्षण है:

● मल त्यागने की संख्या बढ़ाना
● पतले दस्त
● दर्द या मरोड़
● मल के साथ रक्तस्राव
● थकावट और बजन कम होना

अधिकांश ऑटोइम्यून सिस्टम पेट में रहता है। इस स्थिति से पीड़ित लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों का सहारा लिया जाना चाहिए है, जैसे:

● प्राकृतिक आहार लें
● कम वसा का सेवन
● तनाव नही लेना 
● सराब का सेवन नही करना


६) अस्थियों की समस्या Bone Disease:

उम्र के साथ हड्डियों को कमजोर हो सकती है, जिससे वे आसानी से टूट सकते हैं। कई कारण महिलाओं में होने वाली परेसानी उत्पन्न करती है जैसे:

● आयु
● शराब का सेवन
● पोषण की कमी
● आनुवंशिकी
● व्यायाम की कमी
● शरीर का कम वजन
● धूम्रपान
● स्टेरॉयड का उपयोग


७) अवसाद और चिंता Depression:

प्राकृतिक हार्मोनल उतार-चढ़ाव अवसाद या चिंता पैदा कर सकता है। बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद, कई महिलाओं में अवसाद का एक रूप हो सकता है, जिसे "बेबी ब्लूज़" कहा जाता है। लेकिन सबसे बड़ा कारण चिंता, भावनात्मक बदलाव, उदासी और थकान होता है।



Wednesday, March 6, 2019

स्वस्थ और सुंदरता को निखारने और बरकरार रखने के प्राकृतिक उपाय। Keep Healthy and Beautiful Naturally

स्वास्थ्य एवं सुंदरता Health and Beauty:

 
हर कोई स्वस्थ, फिट, और सुंदर दिखना चाहता है । लोग अपने फिगर को बनाए रखना चाहते हैं लेकिन उसे बनाए रखना नहीं जानते । सौभाग्य से सिर्फ कुछ मामूली उपाय के साथ आप कुछ ही समय में अद्भुत महसूस कर सकते हैं। आज के समय मे युवाओं का सोने का समय नहीं मिलता है, तो फिर भोजन में भी असंतुलन होना स्वभाविक है। आपके शरीर को नुकसान से लड़ने के लिए सही पोषक तत्वों की जरूरत है, जिससे आपकी त्वचा अलग नहीं है । पोषक तत्वों की मदद कोशिकाओं के सृजन और अधिक ऊर्जा के लिए जरूरी है । अस्वस्थ खाद्य पदार्थ, तनाव, विषाक्त पदार्थों और कम पोषक आहार से बजन बढ़ने में तेजी आती है । नींद, विश्राम और व्यायाम अपर्याप्त हो रहा है, जबकि ये सब आपको हानिकारक रसायनों से अपने आप को बचाने के लिए और स्वस्थ चमक बनाए रखने में मदद करते है ।

त्वचा के अस्वस्थ होने के कारण और बचाव Reasons and take care of unhealthy skin:

 
त्वचा का गहन देखभाल के लिए समय नहीं है? इसी लिए के शरीर मे झुर्रियों का कारण है । अच्छी तरह से त्वचा की देखभाल और स्वस्थ जीवन शैली आपको सभी प्रकार की समस्याओं से निजाद दे सकती है साथ ही आपको प्राकृतिक चमक को बनाये रखने में मदत करती है।

कुछ कारगर उपाय इस प्रकार है जो त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मददगार होते है:

१) अधिक मात्रा में पानी पीना
२) अधिक मात्रा में विटामिन सी ले
३) सक्कर और शुगर वाले पदार्थों से परहेज़ करे
४) त्वचा की सफ़ाई में विशेष ध्यान दे
५) भरपूर नींद ले
६) रोजाना व्यायाम का नियम बनाये
७) सूरज की अधिक रोशनी से परहेज़ करे
८) एंटीऑक्सीडेंट वाले पदार्थों का सेवन करे

चेहरे में आँखों के आसपास की समस्याओं से बचाव Remedies of face near eyes:

 
चेहरे में बदलाव समय के अनुसार होता है। यदि आप अभी भी युवा हैं, और जब आप आईने में देखो और अपनी आंखों में सूजन देखते हैं, काले घेरे और उनके आसपास लाइनों की उपस्थिति महसूस करते है, तो आपके चेहरे पर इन संकेतों से आप चिंता शुरू कर देंगे  यह संभव है हमारी आंखों में चमक रखने के लिए और स्वस्थ पोषण और जीवन शैली की युक्तियां कारगर होती है और उनके माध्यम से स्वस्थ हो सकते है। 
पोषण आपके नेत्र स्वास्थ्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है चार विशेष पोषक तत्व; विटामिन सी, , और जस्ता ३५% तक की एक आम आंख की समस्या को ठीक करने और अन्य जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं तो सुनिश्चित करें कि आप एक स्वस्थ संतुलित और विविध आहार के माध्यम से antioxidants की सही मात्रा आपको मिलती रहे 

यह कुछ खाद्य पदार्थ है कि आपकी आंखों के स्वास्थ्य और सौंदर्य पर बहुत प्रभाव है शामिल हैं:
१) फल (विशेष रूप से उन जिनमे विटामिन सी की अधिकता हो): संतरे, आम और स्ट्रॉबेरी आदि

२) विटामिन की सब्जी के स्रोत: अधिक मात्रा में गाजर, पपीता, पालक और आम खाएं

३) उच्च जस्ता खाद्य स्रोतों: अपने आहार में अंडे, चिकन, दही और सबूत अनाज शामिल

४) नट्स और बीज: जैसे बादाम, नट्स, और सूरजमुखी के बीज विटामिन के समृद्ध स्रोत हैं



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Monday, March 4, 2019

डायरिया या अतिसार: कारण, लक्षण एवं बचाव के उपाय। Cause and symptoms of Diarrhea.

क्या है डायरिया और भारत मे डायरिया का प्रभाव What is diarrhea and Effect of Diarrhea in India:



डायरिया एक पाचन तंत्र विकार है जो आमतौर पर ढीले मल और पेट में ऐंठन का कारण बनता है। यह दूषित भोजन खाने या दूषित पानी पीने के कारण होता है। देश के हिंदी बेल्ट राज्यों में डायरिया से ज्यादा मौतें हैं। वह भी तब जब डायरिया के मरीज को एक छोटा ओआरएस घोल मिलाकर बचाया जा सकता है। आयुर्वेद में इसे अतिसार कहा गया है। डायरिया से पीड़ित ज्यादातर मरीज पांच साल से कम उम्र के होते हैं। बिहार-झारखंड में, जहां डायरिया अभी भी मौत का सबसे बड़ा कारण है, यह यूपी में दूसरे स्थान पर है। पहले लगभग 90 के दसक में डायरिया केरल के अलावा अन्य राज्यों में मौत के प्रमुख कारणों में से एक था। हालांकि, अगले ढाई दशकों में, दक्षिणी राज्यों के अलावा, महाराष्ट्र और गुजरात ने काफी नियंत्रण हासिल किया है। दूसरी ओर, यूपी, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश आदि में डायरिया से होने वाली मौतों का प्रतिशत कम हुआ, लेकिन यह मौत का एक प्रमुख कारक बना हुआ है। जब आप किसी ऐसे स्थान पर जाते हैं, जहाँ की जलवायु या सैनिटरी प्रथाएँ घर में आप से अलग हैं, तो आपको डायरिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
अगर आप यात्रा में जाते है तो दस्त के अपने जोखिम को कम करने के लिए, यात्रा के दौरान आप क्या खाते हैं और क्या पीते हैं, इसके बारे में सावधान रहें। यदि आप डायरिया का शिकार होते हैं, तो संभावना है कि यह उपचार के बिना हल हो जाएगा। हालाँकि, डायरिया होने के जोखिम वाले क्षेत्रों की यात्रा करने पर डॉक्टर से अनुमोदित दवाओं को अपने साथ रखना एक अच्छा उपाय है।

डायरिया का कारण Cause of Diarrhea:



अतिसार या डायरिया के अधिकांश मामले पेट में संक्रमण के कारण होते हैं। इस संक्रमण के लिए जिम्मेदार रोगाणुओं में शामिल हैं:
१) जीवाणु
२) वायरस
३) परजीवी जीव

पुरानी दस्त के कुछ मामलों को "कार्यात्मक" कहा जाता है क्योंकि एक स्पष्ट कारण नहीं पाया जा सकता है।  IBS दस्त का सबसे आम कारण है। IBS लक्षणों का एक जटिल है। दस्त, कब्ज, या दोनों सहित पेट में दर्द और आंतों में ऐंठन होता है।

डायरिया के लक्षण Symptoms of Diarrhea:

डायरिया होने पर मल में पानी की मात्रा बढ़ जाती है, लेकिन यह अन्य लक्षणों के साथ हो सकता है। इसमें शामिल है:
१) पेट दर्द
२) पेट में मरोड़
३) पेट मे सूजन
४) प्यास बढ़ना
५) वजन घटना
६) बुखार

अतिसार या डायरिया में अन्य स्थितियों का एक लक्षण है, जिनमें से कुछ गंभीर हो सकते हैं। अन्य संभावित लक्षण हैं:
१) मल में रक्त या मवाद
२) लगातार उल्टी होना
३) डिहाइड्रेड या निर्जलीकरण

डायरिया से बचाव के उपाय Prevention of Diarrhea:

भारत जैसे विकासशील देशों में, गंदे पानी और खराब स्वच्छता के कारण दस्त की रोकथाम अधिक चुनौतीपूर्ण हो रहा है। डायरिया को रोकने में ये उपाय मदद कर सकते हैं:

१) स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल
२) अच्छी सफाई व्यवस्था, उदाहरण के लिए जल स्वक्षता और सीवेज
३) शौच के बाद साबुन से हाथ धोना
४) शौच करने वाले बच्चे की सफाई के बाद तथा बच्चे के मल को निपटाने से पहले।
५) भोजन तैयार करने से पहले, और खाने से पहले, अच्छी तरह हाँथ धोना चाहिए।



अपने आसपास साफसफाई पर विशेष ध्यान दे । उम्मीद है आपको यह जानकारी पसंद आई होगी तो अपने सुझाव दे और जानकारी को शेयर करे।





Friday, March 1, 2019

घुटना के दर्द की समस्या। Knee Pain problem: Cause , symptoms in hindi

घुटनो में दर्द की समस्या का कारण Cause of Pain in Knees:


घुटनो के इस जोड़ में मुख्यत चार हड्डियों, लगभग 15 मांसपेशियों के अलावा एक और महत्त्वपूर्ण चीज़ होती है जिसे कारटीलेज (Cartilage) कहते हैं।  रोजमर्या के जीवन में चलने-फिरने, घरेलू या बाहरी कार्य, सैर करने, व्यायाम आदि करने से घुटनों के जोड़ों में स्थित कारटीलेज की मात्रा का छय होता है| घुटना शरीर का सबसे बड़ा तथा जटिल जोड़ है, कारटीलेज में द्रव या कोलोजन, रक्त प्रवाह के कम होने में कठोर होने लगता है। यह रोग पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है। इसका कारण है महिलाओं में स्त्री हारमोन ‘इस्ट्रोजन’ का स्राव काफी कम हो जाने के कारण शरीर का वजन बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
घुटने का दर्द के और भी बहुत से कारण हो सकते है जिसका पता उचित डॉक्टर के माध्यम से हो सकता है।

घुटनों के दर्द और अर्थराइटिस में अंतर Difference between normal knee pain and arthritis:


अर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसका शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है। मरीज के पैरों और हड्डियों के जोड़ों में तेज दर्द होता है, जिससे चलने-फिरने में भी तकलीफ हो सकती है। अर्थराइटिस की बीमारी में शरीर मे विटामिन डी और कैल्शियम की कमी के कारण होता है। आमतौर पर देखा जाता है कि घुटने के हर दर्द को लोग आर्थराइटिस समझ लेते हैं, जबकि घुटनों में दर्द के कई कारण हो सकते हैं तथा उनका इलाज भी भिन्न-भिन्न है। कुछ खास तरह के अर्थराइटिस में शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में दर्द के साथ दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं। 

घुटनों की समस्या के लक्षण Synonyms of Knee Pain:


इसके लक्षण विभिन्न प्रकार के हो सकते है, क्योंकि यह शरीर की छमता और समस्या के स्तर पर निर्भर करता है, मुख्य लक्षण इस प्रकार है:

१) चलते समय आवाज़ आना
२) सूजन होना
३) सीधा करने में परेसानी 
४) खड़े होने में जकड़न या थरथराहट
५) त्वचा का लाल होना या छूने में दर्द होना

घुटनो के दर्द से बचाव के घरेलू उपाय Home Remedies of Knee Pain:

कई बार कुछ घरेलू उपाय और बचाव से परेसानी कम हो सकती है परंतु इसके पूरी तरह से आराम के लिए डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना उचित होगा। कुछ उपाय और घरेलू बचाव करना चाहिए जो इस प्रकार है:
१) पोषण उक्त भोजन को अपने आहार में सम्लित करे
२) बजन को कम करने के लिए उपाय करना
३) खेल कूद का चयन अपनी परेसानी के अनुसार करे
४) गर्म पानी की थैली से सेकना
५) तेल की मालिश
६) लहसुन का सेवन
७) हल्दी का सेवन या लेप
८) दूध या दूध के पदार्थों का सेवन


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