Monday, February 4, 2019

भोजन के प्रकार: शास्त्रों के अनुसार। Types of Food: According to the Scriptures in hindi.

भोजन के प्रकार Types of food:

शास्त्रों के अनुसार भोजन को बिभक्त किया गया है तथा कौन सा भोजन मनुष्य के लिए उपयुक्त है इसकी भी ब्याख्या की गई है। भोजन को मौसम की परिस्थितियों का भी प्रभाव होता है इसलिए भोजन को मौसम, सरीरिरि क्रियाकलाप के अनुसार करने की सलाह दी जाती है। भोजन का प्रभाव मनुष्य के मन मे होता है, उसके आचरण और व्यवहार में भी बहुत बड़ा प्रभाव भोजन का होता है। 
गीता में भी भोजन का विस्तारित उल्लेख है, और भोजन के प्रकार के बारे में बताया गया है। भोजन को तीन श्रेणियों में रखा गया है सात्विक , राजसिक, और तामसिक।

१) सात्विक भोजन Satvik Meals in hindi:

शास्त्रों के अनुसार सात्विक भोजन को अत्यंत शुद्ध और सरीर के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। सात्विक भोजन आयु को बढ़ाने वाला और सरीर को स्वस्थ बनाने वाला होता है, क्योंकि भोजन का प्रभाव मनुष्य के मन और व्यवहार मे होता है  अतः इस प्रकार का भोजन मे मिर्च मसालों का स्तेमाल कमहोता है।
लहसुन प्याज की तासीर गर्म होने के कारण इनका स्तेमाल नही होता है। शास्त्रों के अनुसार यह काम को बढ़ाने वाला होता है, वैसे यह अन्य सब्जियों की तरह ही शाकाहारी की श्रेणी में आता है।


सात्विक भोजन के पदार्थ

सात्विक भोजन मनुष्य के मस्तिष्क को नियंत्रित रखने में मदत करता है, साथ ही विनम्रता भी प्रदान करता है जिससे मनुष्य के अंदर हिंसात्मक भाव नही आते। इसमे मुख्यतः सब्जियां , फल, अनाज जैसे जी दाले गेहू चावल, और दूध या दूध से बने पदार्थ शामिल है।

२) राजसिक भोजन Rajsik Food

यह भोजन मनुष्य में उत्तेजना प्रदान करता है, काम वासना को बढ़ता है। परन्तु इस तरह का भोजन रोग उत्पन्न करता है। यह क्रोध और शोक दोनों को बढ़ाने वाला बताया गया है। यह भी मुख्यतः शाकाहार की श्रेणी में आता है।


राजसिक भोजन के पदार्थ

राजसिक भोजन को मसाले दार, खट्टा, गर्म रूखा कहा गया है। आज के परिवेस मे कहे तो चटकदार ,ज्यादा नमक वाला, तला हुआ, मिर्च मसाले वाला भोजन साथ ही साथ चाय, कॉफी, और कोल्डड्रिंक इस श्रेणी में आते है।

३) तामसिक भोजन Tamasin Food

शास्त्रों के अनुसार ऐसा भोजन जो तीन घंटे पहले बना हुआ हो (भगवान को भोग लगे हुए भोजन के अलावा अर्थात प्रसाद के अलावा),  बेस्वाद भोजन , और अस्पर्श्य पदार्थों (जिन पदार्थो को छूने के लिए मना किया गया है) शामिल हो तामसिक कहलाता है। यह भोजन मनुष्य को विनाश और मृतु की तरफ ले जाने वाला कहा गया है।


तामसिक भोजन के पदार्थ

अंडा, मांस , मछली , रात का बचा हुआ भोजन, नशीले पदाथों को तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा गया है। हरे प्याज और लहसुन को तामसिक कहा गया है।


सारांश Conclusion 

भोजन मनुष्य के आचरण और व्यक्तित्व का निर्धारण करता है, इसका सीधा प्रभाव मनुष्य के आचरण में होता है। सारे विश्व मे कई महापुरुष, खिलाड़ी, सिंगर, ऑर्थोर, समाजसेवक, वैज्ञानिक , डॉक्टर, और कई छेत्रो के प्रतिभावान व्यक्ति शाकाहारी थे और है, बहुत से लोगो ने शाकाहार को अपनाया है। इसलिये भोजन का चुनाव बहुत सोच समझ कर करना चाहिए।



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