Wednesday, February 6, 2019

पंचकर्म:आयुर्वेदिक उपचार। Panchkarma Treatment in hindi.

पंचकर्म Panchkarma:

पंचकर्म आयुर्वेदिक उपचार की एक विधि है जिसके माध्यम से शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर किया जाता है। पंचकर्मा उपचार के पांच चरण होते है जिसके कारण इसे पंचकर्म अर्थात पांच कर्म कहा गया है। यह आयुर्वेद चिकित्सा का विशिष्ट रूप है।

क्यों किया जाता है पंचकर्म उपचार Why need Panchkarma Treatment:

आयुर्वेद के अनुसार शरीर के बीमार होने या रोग होने के तीन प्रमुख कारण है वात, पित्त, और कफ। आयुर्वेद कहता है कि अगर शरीर का वात, पित्त और कफ संतुलित है तो शरीर बीमार नही होता। अतः इनको संतुलित रखना आवश्यक है।
जब शरीर मे विषाक्त पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है तो वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए पंचकर्म उपचार के माध्यम से विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकाला जाता है, जिससे शरीर पुनः ऊर्जावान , मानशिक और शारिरिक मजबूती मिलती है साथ ही पाचन क्रिया दुरुस्त होती है।

पंचकर्म के पहले की क्रिया Before Panchkarma:

पंचकर्म उपचार के पहले दो पद्यति की जाती है पहली स्नेहन या ओइलेशन, जिसमे शरीर मे तेल लगाया और मालिश की जाती है। कहले यह घी से की जाती थी इसलिए गाय का घी उपयुक्त माना गया है।
दूसरी क्रिया है स्वेदन या फमेंटेशन, इस क्रिया में शरीर से पसीने के द्वारा विषाक्त निकाला जाता है। अतः इसमे ऐसी प्रक्रिया की जाती है जिसमे पसीना उत्पन्न हो।

पंचकर्मा के चरण Steps of Panchkarma

१)वमन क्रिया:

इस क्रिया में ऊपर से दोषो को निकाला जाता है, अतः इसमे उल्टी करवाकर विषाक्त पदार्थों को या दोषो को निकाला जाता है। यह क्रिया कफ के संतुलन के लिए होती है इसलिए कफ दोष के मरीजों की लिए उपयुक्त है।

२) विरेचन क्रिया:

इस क्रिया में नीचे (मल द्वार) से दोषो को निकाला जाता है। अतः इस क्रिया में औषधि के द्वारा मल के द्वारा आंतों और पेट की सफाई होती है। यह पित्त दोष को दूर करने और पित्त को संतुलित करने के लिए किया जाता है।

३) वस्ति क्रिया:

यह दो तरह की होती है अनुवासन और आस्थापन। इसमे मुख तथा कई मार्गो से शरीर मे कई तरह के द्रव और काढ़ा प्रवेश करवाया जाता है। यह वात रोग को दूर करने और वात को संतुलित करने के लिए होता है।

४) नस्य क्रिया:

इस क्रिया में नाक से कुछ द्रव को प्रवेश करवाया जाता है, इस किया से पहले मालिश के द्वारा शरीर को तैयार किया जाता है उसके बाद नाक के द्वार से औषधि को प्रवेश करवाया जाता है। यह सर के रोगों को दूर करने और संतुलित करने के लिए होता है। जिससे सर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकालते है।

५) रक्त मोक्ष क्रिया

इस क्रिया के शरीर के किसी विशिष्ट भाग से खराब रक्त को निकाला जाता है, यह क्रिया रक्त की शुद्धि के लिए किया जाता है।

पंचकर्म में सावधानी 

पंचकर्म की प्रक्रिया अलग अलग हो सकती है या शरीर, आयु और बीमारी पर निर्भर करती है।
इस क्रिया को प्रशिक्षित चिकित्सक से करवाना चाहिए और ठीक से विचार विमर्श करना चाहिए।

तो दोस्तो आपको यह जानकारी कैसी लगी अपने सुझाव दे और शेयर करे।





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