Thursday, January 31, 2019

हल्दी के फायदे। Benefits of Turmeric in Hindi.

गुणों से भरपूर है हल्दी:

हल्दी के अंदर मौजूद कई औषधीय गुणों के कारण इसका स्तेमाल कई बीमारियों के ईलाज़ में और बीमारियों से रक्षा करने के लिए किया जाता है। आयुर्वेदिक इलाज और घरेलू नुस्खों में भी हमेशा से हल्दी का स्तेमाल होता रहा है। इसलिए यह मसालों में अग्रणीय होता है। हल्दी शरीर को रोगों से सुरक्षित करता है क्योंकि इसमे एंटीऑक्सीडेंट, एंटीवायरल तत्व होते है, इस कारण आयुर्वेद में इसे एंटीबायोटिक के रूप में देखा गया है। 
इसका इस्तेमाल घाव के उपचार, त्वचा रोग , सूजन और अंदरूनी चोट में स्तेमाल होता है क्योंकि इसमें एन्टीफंगल तत्व उपलब्ध है। साथ ही साथ इसमे भरपूर मात्रा में पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, विटामिन और फाइबर होता है। इसका स्तेमाल पूरे विश्व मे होता है।

हल्दी के फायदे:

हल्दी का स्तेमाल कई तरीके से किया जाता है इसे दूध के साथ पीने में, त्वचा में लेप, भोजन में मसालों के रूप में मुख्यतः होता है साथ कि कई रोगों के उपचार में होता है

१) हल्दी दूध में फायदे: हल्दी दूध पीने से रोग प्रतिरोधक छमता बढ़ती है जिससे कई तरह की छोटी बीमारियों से आराम मिलता है। इसका स्तेमाल रात में सोने से पहले या सुबह नाश्ते के साथ सबसे लाभदायक होता है। यह सर्दी , खांसी और बुखार से आराम देता है।


२) कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए: विटामिन बी6 के मौजूदा होने के कारण यह सीरम कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदत करता है, जिसके कारण हृदय रोग और रक्तचाप नियंत्रित रहता हैं।

३) बजन घटाने में कारगर: हल्दी मेटाबोलिज्म को ठीक रखने में मदत करता है जिससे बजन घटाने में फायदा होता है साथ ही यह पाचनतंत्र को ठीक रखता है जिसकारण वसा का जमाव कम होता है।


४) घाव भरने और त्वचा के लिए : हल्दी संक्रमण से रोकथाम करता है क्योंकि यह एंटीसेप्टिक की तरह स्तेमाल में लाया जा सकता है। हल्दी सूजन को कम करने में बहुत कारगर है साथ ही गठिया और बात के रोगियों को लाभ पहुचता है। यह त्वचा की चमक को बढ़ाता है इसलिए विवाह और शुभ कार्य के पहले हल्दी के उपटन लगाने की प्रथा है।

५) डाइबटीज या मधुमेह में लाभदायक: हल्दी इंसुलिन की मात्रा को नियंत्रित करता है जिसके कारण डाइबटीज से पीडित लोगो को लाभ होता है।


सारांश Conclusion

हमारे आसपास मौजूद कई चीजों का इस्तेमाल करके कई बीमारियों से पहले ही सुरक्षित रहा जा सकता है और इलाज़ भी किया जा सकता है, इसलिए इनका स्तेमाल आयुर्वेद में किया जाता था क्योंकि इनके किसी भी प्रकार के विपरीत प्रभाव नही होते।

तो दोस्तो आपको यह जानकारी कैसी लगी अपने सुझाव दे और शेयर करे।




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