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Thursday, January 31, 2019

हल्दी के फायदे। Benefits of Turmeric in Hindi.

गुणों से भरपूर है हल्दी:

हल्दी के अंदर मौजूद कई औषधीय गुणों के कारण इसका स्तेमाल कई बीमारियों के ईलाज़ में और बीमारियों से रक्षा करने के लिए किया जाता है। आयुर्वेदिक इलाज और घरेलू नुस्खों में भी हमेशा से हल्दी का स्तेमाल होता रहा है। इसलिए यह मसालों में अग्रणीय होता है। हल्दी शरीर को रोगों से सुरक्षित करता है क्योंकि इसमे एंटीऑक्सीडेंट, एंटीवायरल तत्व होते है, इस कारण आयुर्वेद में इसे एंटीबायोटिक के रूप में देखा गया है। 
इसका इस्तेमाल घाव के उपचार, त्वचा रोग , सूजन और अंदरूनी चोट में स्तेमाल होता है क्योंकि इसमें एन्टीफंगल तत्व उपलब्ध है। साथ ही साथ इसमे भरपूर मात्रा में पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, विटामिन और फाइबर होता है। इसका स्तेमाल पूरे विश्व मे होता है।

हल्दी के फायदे:

हल्दी का स्तेमाल कई तरीके से किया जाता है इसे दूध के साथ पीने में, त्वचा में लेप, भोजन में मसालों के रूप में मुख्यतः होता है साथ कि कई रोगों के उपचार में होता है

१) हल्दी दूध में फायदे: हल्दी दूध पीने से रोग प्रतिरोधक छमता बढ़ती है जिससे कई तरह की छोटी बीमारियों से आराम मिलता है। इसका स्तेमाल रात में सोने से पहले या सुबह नाश्ते के साथ सबसे लाभदायक होता है। यह सर्दी , खांसी और बुखार से आराम देता है।


२) कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए: विटामिन बी6 के मौजूदा होने के कारण यह सीरम कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदत करता है, जिसके कारण हृदय रोग और रक्तचाप नियंत्रित रहता हैं।

३) बजन घटाने में कारगर: हल्दी मेटाबोलिज्म को ठीक रखने में मदत करता है जिससे बजन घटाने में फायदा होता है साथ ही यह पाचनतंत्र को ठीक रखता है जिसकारण वसा का जमाव कम होता है।


४) घाव भरने और त्वचा के लिए : हल्दी संक्रमण से रोकथाम करता है क्योंकि यह एंटीसेप्टिक की तरह स्तेमाल में लाया जा सकता है। हल्दी सूजन को कम करने में बहुत कारगर है साथ ही गठिया और बात के रोगियों को लाभ पहुचता है। यह त्वचा की चमक को बढ़ाता है इसलिए विवाह और शुभ कार्य के पहले हल्दी के उपटन लगाने की प्रथा है।

५) डाइबटीज या मधुमेह में लाभदायक: हल्दी इंसुलिन की मात्रा को नियंत्रित करता है जिसके कारण डाइबटीज से पीडित लोगो को लाभ होता है।


सारांश Conclusion

हमारे आसपास मौजूद कई चीजों का इस्तेमाल करके कई बीमारियों से पहले ही सुरक्षित रहा जा सकता है और इलाज़ भी किया जा सकता है, इसलिए इनका स्तेमाल आयुर्वेद में किया जाता था क्योंकि इनके किसी भी प्रकार के विपरीत प्रभाव नही होते।

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Tuesday, January 29, 2019

शरीर के डिटॉक्सीफिकेशन के उपाय। Detoxification of Body in hindi.

शरीर की शुद्धिकरण क्यों जरूरी Why Needs Detoxification?

शरीर के क्रिया कलापो और भोजन और अनियमित दिनचर्या के कारण शरीर मे कुछ विषैले तत्व (टोक्सिन) पैदा होते है जो बहुत नुकसान दायक और कई रोगों के जनक होते है। शरीर इन अशुद्धियों को स्वयं ही बाहर निकल देता है परंतु ठीक से अशुद्धिकरण के लिए कुछ खाद्यपदार्थ और पेय की जरूरत होती है जो शरीर और आंतरिक अंगों के अशुद्धिकरण के लिए मदतगार होते है।

कंहा होता है टॉक्सिन का प्रभाव Toxins Effect on :

टोक्सिन मुख्य रूप से लीवर, किडनी, ब्लड , फेफड़े, आँतो को ज्यादा प्रभावित करता है। सामान्यतः जहरीले तत्व को शरीर त्वचा, फेफड़े आदि के टॉक्सिन को बाहर कर देता है, परंतु खून और लीवर के अशुद्धिकरण के लिए कुछ घरेलू खास पदार्थ कारगर होते है जिनका प्रयोग करके शरीर को डिटॉक्सीफिकेशन किया जाता है। यह आयुर्वेद में भी व्याख्या की गई है:

१) खीरा : खीरे में लगभग 95% पानी होता है जो शरीर के अनवांछित पदार्थो को जिनमे जहरीले तत्व होते है उनको बाहर निकलने में मदत करता है, तथा शरीर के स्वस्थ रखने में मदत करता है। साथ ही पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी होता है। आंखों, और त्वचा के लिए फायदेमंद होता है।

२) नींबू : नींबू पानी ले साथ मिलकर शरीर वके डिटॉक्सीफिकेशन में मदत करता है। नींबू कई तरह के विटामिन का बहुत अच्छा स्रोत है। जिससे बजन घटाने, रक्तचाप और तनाव को नियंत्रित रखने में कारगर सिद्ध होता है।

३) पानी : खूब पानी पीना चाहिए, तीन से चार लीटर पानी पीना चाहिए, अधिक पानी पीने से पेसाब और पसीने के माध्यम से अनवांछित तत्व और विषेले तत्व निकल जाते है।

४) व्यायाम : व्यायाम एक प्राकृतिक तरीका है शरीर को अशुद्धिकरण करने का। व्यायाम शरीर को स्वस्थ रखता है और अमग्र विकास करता है।

५) डीटॉक्स वाटर पीने से: डिटॉक्स वाटर पीने से बहुत फायदा होता है, इसे बनाने का तरीका:
कांच के बड़े जग या पात्र में अधिक मात्रा में खीरा के टुकड़े, नींबू के टुकड़े, अदरक और पुदीने के पत्ते, को एक से दो लीटर पानी मे रात भर के लिए छोड़ दे और सुबह पिये। यह बहुत फायदेमंद होता है।

सारांश Conclusion

शरीर मे टॉक्सिन का बनना सामान्य है, पर कुछ हानिकारक पदार्थों के सेवन से यह बढ़ता है जैसे कि सिगरेट और सराब के सेवन से। इसलिए शरीर को डिटॉक्सीफिकेशन जरूरी है।


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Monday, January 28, 2019

बर्ड फ्लू के कारण, लक्षण और उपचार। Cause and Symptoms of Bird Flu in Hindi.

क्या होता है बर्ड फ्लू:

1990 के दशक में, बर्ड फ्लू एक नई बीमारी के रूप में उत्पन्न हुआ, जो गंभीर बीमारी और मृत्यु की छमता रखता था। बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) एक बीमारी है जो इन्फ्लूएंजा वायरस और इसी तरह के वायरस के कारण होती है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करती है। विशेष रूप से पालतू पक्षियों जैसे बतख, मुर्गियों में। नतीजतन, इस वायरस को अत्यधिक रोगजनक माना गया क्योंकि यह बहुत गंभीर संक्रामक है। इसे एवियन इन्फ्लूएंजा और एच 5 एन 1 कहा जाता है।

बर्ड फ्लू किन कारणों से होता है?

बर्ड फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के प्रभाव के कारण होता है, इन्फ्लूएंजा के तीन मुख्य प्रकार हैं: ए, बी, और सी। जो वायरस बर्ड फ्लू का कारण बनता है उसे इन्फ्लूएंजा कहते है। यह सीमित संख्या में जानवरों में रहना पसंद करते हैं। स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से स्वाइन को संक्रमित करता है, और बर्ड फ्लू मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है। इन्फ्लूएंजा को मनुष्यों के लिए सर्वोत्तम रूप से अनुकूलित होता है। बीमार पक्षियों के साथ संपर्क रखने वाले लोगों को बर्ड फ्लू हो जाता है।

बर्ड फ्लू के लक्षण:


औसतन दो से आठ दिन के बाद लक्षण दिखाई देते हैं। संक्रमित लोग जिन लक्षणों का अनुभव करते हैं वे हो सकते हैं
१) तेज बुखार
२) उल्टी
३) सरदर्द
४) जोड़ो में दर्द
५) मचली
६) चक्कर आना
७) लाल चक्कते होना
८) लगातार खांसी
९) नाक बहना
१०) दिखाई देने में परेसानी


चिकित्सक बर्ड फ्लू का निदान कैसे करते हैं?

बर्ड फ्लू के बचाव हेतु कई शोध के कार्यक्रम चल रहे है, ताकि इससे निजाद पाई जा सके। संयुक्त राष्ट्र संघ भी इसके लिए कई कार्यक्रम चला रहा है साथ ही सभी देशों में स्वास्थ्य कार्यक्रम को चलाया जा रहा है।
अगर लक्षण का पता चले तो तुरंत अस्पताल में पहुँचना चाहिए, बलगम से इसकी जांच की जाती है, और समय से इलाज मिलने पर रोकथाम होती है।


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Sunday, January 27, 2019

शाकाहारी भोजन जो प्रोटीन के बड़े स्रोत है। Vegetarian Protein Rich Food.

प्रोटीन कि अधिकता वाले पदार्थ Protin rich foods:

प्रोटीन हमारे शरीर के रक्त, त्वचा, मांस, एवं हड्डियों की कोशिकाओं के विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। बालो का झड़ना भी प्रोटीन की कमी का मुख्य वजह है। तो अगर प्रोटीन की मात्रा को बरकरार रखनी है तो अंडे , मांस और मछली का सेवन करें, क्योंकि ये प्रोटीन के अच्छे स्रोत है।परंतु शाकाहारी लोगो को प्रोटीन के लिए इन खाद्य पदार्थो का सेवन करे:


1) सोयाबीन : सोयाबीन प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, इसे पकाकर कई तरह के व्यंजनों में इसका प्रयोग कर सकते है फिर चाहे वो मुख्य भोजन हो नास्ता हो या सलाद।


2) दालें: दलों का सप्ताह में कम से कम चार बार सेवन करना चाहिए, एक कप दाल में 3 अंडो के बराबर प्रोटीन होता है। यह वजन और कोलेस्ट्रॉल के कंट्रोल में भी लाभदायक होता है।


3) कद्दू के बीज: कद्दू के बीज भी प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, यह एक ऊर्जा का बूस्टर है क्योंकि यह जिंक, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है।


4) पालक: पालक अंदर सभी गुण उपलब्ध है यह आयरन, प्रोटीन, मैग्नीशियम और कई तरह के पोषक तत्वों का बहुत बड़ा स्रोत है।


5) फलीदार सब्जिया: फलीदार सब्जियों में प्रोटीन बहुत पाया जाता है, यह मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में मदत करता है।


6) पनीर: पनीर में बहुत अच्छे क्वालिटी का प्रोटीन पाया जाता है। 100 ग्राम प्रोटीन में 23 ग्राम प्रोटीन होता है।


7) राजमा: राजमा प्रोटीन का अच्छा स्रोत है और यह सबको पसंद है। इसे खाने में शामिल करें।


8) ओट्स: ओट्स प्रोटीन के साथ साथ फाइबर भी भरपूर मात्रा में होता है। इसलिए नास्ते में और डिनर में शामिल करें।



सारांश Conclusion 

पोषक तत्वो के लिए जरूरी नही की भोजन में नॉन वेज का स्तेमाल किया जाए , आसानी से शाकाहारी भोजन से प्रोटीन , विटामिन की पूर्ति की जा सकती है।

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Monday, January 21, 2019

पाचनतंत्र मजबूत करने के घरेलू उपाय। Tips for strong Digestive System.

पाचनतंत्र Digestive System:

पाचन तंत्र हमारे भोजन को पचाता है और भोजन के पोषक तत्व हमारे शरीर को प्रदान करता है। इसलिए शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है पाचनतंत्र! और इसका मजबूत और सुचारू रूप से काम करना बहुत जरूरी है ताकि शरीर स्वस्थ रहे। पाचन तंत्र को ठीक रखने के लिए जरूरी है कि सुबह सही तरीके से पेट साफ हो , यही स्वस्थ पाचनतंत्र की निशानी है।

क्यों पाचनतंत्र ठीक से काम नही करता Why Digestive System Not working Properly.

अनियमति दिनचर्या, असंतुलित भोजन के साथ साथ तनावपूर्ण जिंदगी सबसे बड़ा कारण है पाचनतंत्र के ठीक से काम न करने का। इसके अलावा अनिन्द्रा, शोक या डिप्रेशन होने पर भी पाचनतंत्र में फर्क पड़ता है। नशीले पदार्थो के सेवन जैसे शराब, सिगरेट, या अन्य नशीले पदार्थो के शेवन से पाचनतंत्र ठीक से काम नही करता।

पाचनतंत्र ठीक रखने के उपाय Tips For healthy digestive system.

१) सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पिये: पाचनतंत्र ठीक रखने के लिए पेट का साफ रहना जरूरी है इसलिए सुबह अधिक मात्रा में गुनगुना पानी पिये, उसके बाद नित्य क्रिया करे। यह शरीर के डिटॉक्सीफिकेशन में भी मदत करता है।

२) समयबद्ध तरीके से भोजन: भोजन का समय निश्चित कर उसका पालन करे। यह शरीर के मेटाबोलिज्म को भी मजबूत करता है।

३) भोजन को पचने का समय दे: एक बार भोजन करने के पाश्चात तुरन्त भोजन न करे। हर शरीर का पाचनतंत्र अलग होता है इसलिए अपने शरीर के हिसाब से भोजन में अंतर रखे।

४) भोजन का सुरुआत हल्के भोज्य पदार्थ से करे: भोजन से पहले सुप, सलाद या फल खाएं इसके बाद भोजन करे। जरुरत से अधिक भोजन न करे।

५) भोजन के उपरांत कुछ तरल पदार्थ ले: हो सके तो सुबह नास्ते के बाद फल का जूस , मध्यान भोजन(लंच) के बाद दही या छास और रात्रि भोजन(डिनर) के बाद दूध पिये।

६) भोजन को अच्छे से चवा कर खाएं: यह भोजन को अच्छे से पचने में मदत करता है। साथ ही अधिक फाइबर और कम वसा वाला भोजन करे।

७) अधिक मात्रा में पानी पिये: खाने के लगभग एक घंटे तक पानी न पिएं उसके उपरांत खूब मात्रा में पानी पिये।

८) योग और व्यायाम: नियमित व्यायाम और योग बहुत जरुरी है। अपने बिजी जीवन से कुछ समय निकालकर योग और व्यायाम करें।

सारांश Conclusion

भागदौड़ भरी जिंदगी की वजह से खानेपीने में , सोने में और व्यायाम में अनियमितता होती है जो कई बीमारियों की वजह है ऐसे में अपने स्वास्थ्य का खयाल रखना बहुत जरूरी है।


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Saturday, January 19, 2019

खसरा का उपचार। Measles or Rubella in Hindi.

खसरा Measles or Rubeola or Rubella:

खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है। यह एक रूबेला नामक सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन की उपलब्धता के बावजूद विश्व स्तर पर छोटे बच्चों में मृत्यु का एक महत्वपूर्ण कारण है। बच्चों के लिए नियमित खसरा टीकाकरण, और ऐसे राज्य जंहा कम आयु का कवरेज है ऐसे राज्यो में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियानों को चलाया जा रहा है। साथ ही वैश्विक खसरा से होने वाली मौतों को कम करने के लिए प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियाँ सारे विश्व मे चल रही है।

खसरा के लक्षण Symptoms of Measles

प्रारंभिक लक्षण, जो आमतौर पर संक्रमण के 10-12 दिनों बाद दिखाई देते हैं, संक्रमित व्यक्तियों के नाक, मुंह या गले से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से खसरा फैलता है।
उनमें तेज बुखार, नाक बहना, आंखों में खून आना और मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे शामिल हैं। कई दिनों बाद यह दाने के रूप में विकसित होता है। चेहरे और ऊपरी गर्दन पर शुरू होता है और धीरे-धीरे नीचे की ओर फैलता है।

खसरा का टीका Vaccine of Measles.

रूबेला नामक टीका पिछले चालीस वर्ष के आसपास से डियावज रहा है यह एक प्रभावी टीका है जो सक्रिय रूबेला वायरस से आधारित है। रूबेला का टीका पूरे जीवन भर के लिए प्रतिरक्षा प्रदान कर सकती है।ल

खसरा में क्या खाएं What to eat in Measles:

१) हल्का भोजन करना चाहिए दलिया एवं खिचड़ी का सेवन करे जिसके कारण सरीर को आराम महसूस हो।
२) हो सके तो फलो का सेवन करे जिसमे पानी की मात्रा ज्यादा होती है। खरगुजा, अंगूर खाये और संतरा और नींबू का सेवन करे जिसके कारण शरीर को वियामिन मिले।
३)  पानी का सेवन ज्यादा करे कम से कम तीन लीटर पानी अवस्य पिये।
४) तेल मसाले और तली हुई पदार्थो का सेवन न करे।

खसरा होने पर क्या करे What to do in Measles:

१) घर पर रहे घूमे फिरे न क्योंकि ये वायरस लोगो के सम्पर्क में आने से फैलता है।
२) ज्यादा से ज्यादा आराम करें क्योंकि ये आपके शरीर को कमजोर करता है।
३) TV और मोबाइल का उपयोग न करे ये आपके आंखों के लिए नुकसान दायक हो सकता है।


सारांश Conclusion 

खसरा एक खतरनाक और जानलेवा हो सकता है ये बच्चो को विशेष रूप से प्रभावित करता है। कई वर्षों पहले ये विश्व भर में महामारी के रूप में फैला था, भारत मे भी इसका बहुत प्रभाव था। इसकी वैक्सीन और दवा उपलब्ध है परंतु खसरा होने से बचने के लिए साफ सफाई और जानकारी आवश्यक है।



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Thursday, January 17, 2019

पथरी (किडनी स्टोन) का आयुर्वेदिक इलाज। Ayurvedic Treatment of kidney Stones in Hindi.

पथरी की समस्या kidney Stones Problem in hindi. 


किडनी स्टोन या पथरी की समश्या आमतौर पर असंतुलित खानपान कम मात्रा में पानी पीने से बढ़ती है इसकी मूल बजह नमक का दूसरे खनिज पदार्थो के साथ मिलने के कारण होता है। यह समान्यतः पेशाब के साथ निकल जाता है परंतु ये जब बड़ा हो जाता है और बड़े हो जाने पर बहुत सी परेशानियों सामना करना पड़ता है। पथरी कई तरह का होता है कुछ कैल्शियम ऑक्सलेट से होता है, कुछ यूरिक एसिड और संक्रमण से भी होता है। कुछ पुरानी बीमारियो के कारण भी पथरी की समस्या होती है।


पथरी (किडनी स्टोन) के लक्षण Symptoms of Kidney Stones. 

पेट के निचले हिस्से में और पीठ पर अचानक बहुत तीव्र दर्द होता है जो समय के साथ बढ़ता जाता है। इसमे लगातार या कुछ रुककर दर्द होता है दर्द में उतार चढ़ाव होता है दर्द का स्थान पथरी किस स्थान पर है इसपर निर्भर करता है।
पेसाब में कमी या जलन जैसी समश्याये हो सकती है, हो सकता है पेसाब रुक रुक कर होता है। खून या कुछ अलग तरह की गंध भी हो सकती है। पेसाब करने में कठिनाई होती है।

अगर इनमे से कुछ लक्षण होते है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करे।

पथरी से बचाव के तरीके Prevention of kidney Stones .


१) अधिक मात्रा में पानी पिये

ज्यादा पानी पिये ताकि जिन तत्वो के कारण पथरी होती है वो इकठ्ठा न हो पाए। शरीर को अशुद्धियो से मुक्ति करने में कारगर होता है। साथ ही फलों का जूस और नींबू पानी भी फायदेमंद होता है।

२) सौंफ का सेवन

सौफ बहुत कारगर होता है  सौंफ, मिश्री, सूखा धनिया  लेकर रात को पानी में भिगोकर रख दीजिए, इसे 24 घंटे के बाद छानकर पेस्‍ट बना लीजिए। इसके एक चम्‍मच पेस्‍ट में आधा कप ठंडा पानी मिलाकर पीने से पथरी पेशाब के रास्‍ते निकल जाता है।

३) अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन न करे

किडनी स्टोन है तो अपने भोजन में प्रोटीन की मात्रा को संयमित कर लें. ऐसी स्थिति में अधिक मात्रा में मांस / मछली का सेवन करने से परहेज करें।

४) बेल पत्र उपयोग

बेल पत्र पर जरा सा पानी मिलाकर घिस लें, इसमें एक साबुत काली मिर्च डालकर सुबह खायें। दूसरे दिन काली मिर्च दो कर दें और तीसरे दिन तीन,  ऐसे सात दिनों तक लगातार इसका सेवन कीजिए। बाद में इसकी संख्‍या कम कीजिए, दो सप्ताह तक प्रयोग करे।

५) सोडियम और विटामिन सी का सेवन कम करें


भोजन में विटामिन सी और सोडियम की बहुत अधिक मात्रा होती है तो ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है.।जंक फूड, डिब्बा बंद खाना और नमक के बहुत अधिक सेवन से बचना चाहिए।

६) बाहरी खाद्य वस्तुओं और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन न करे

बाहर का खाना बहुत हानिकारक हो सकता है साथ ही बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक का सेवन न करे , हो सके तो नींबू पानी या संतरे का जूस पिये।

सारांश Conclusion 

किडनी स्टोन घातक होता है और इसमें होने वाला दर्द भी असहनीय होता है, किसी भी स्थिति में इसे हल्के में मत ले । जल्द उपचारों से इसे कम किया जा सकता है नही तो ऑपरेशन करना पड़ता है।


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Tuesday, January 15, 2019

कान के दर्द का उपाय। Ear pain remedy in hindi

कान के दर्द का उपाय Ear Pain remedy in hindi:


अधिकांश कान दर्द बिना किसी उपचार के अपने आप ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर यह बेहतर नहीं हो रहा है, या यदि आपके पास अन्य, अधिक गंभीर लक्षण हैं, तो आपको डॉक्टर को दिखाने की आवश्यकता हो सकती है। कान दर्द के कई कारण हो सकते हैं, यह सर्दी, फ्लू या संक्रमण का एक प्रारंभिक संकेत हो सकता है। यदि आपको कान का संक्रमण है, तो बुखार और अस्थायी सुनाई देना हो सकती है। ज्यादातर कान का दर्द कि समस्या बच्चों को ही होती हैं, लेकिन वे वयस्कों को भी हो सकता हैं। एक कान का दर्द, एक या दोनों कानों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन अधिकांश समय एक कान में होता है। कान का दर्द कम या तेज हो सकता है, और यह लगातार महसूस हो सकता है।

कान के दर्द को कैसे रोकें How to stop Ear pain:

कान दर्द के जोखिम वाले लोगों को तेज संगीत और पर्यावरणीय शोर से बचना चाहिए। यदि आप जोर शोर से नहीं बच सकते हैं, तो यह एक अच्छा जोड़ी इयरप्लग या शोर-रद्द करने वाले हेडफ़ोन का स्तेमाल करना चाहिए। कान के दर्द को रोकने के लिए, धूम्रपान करने और धुएं के संपर्क में आने से बचें। एलर्जी धूल ये सभी आपके को परेशान कर सकते हैं और कान का दर्द पैदा कर सकते हैं।
सभी विदेशी वस्तुओं को कान से बाहर रखें और, यदि आप तैरते हैं, तो इयरप्लग और एक स्नान टोपी पहनें। हमेशा तैराकी, स्नान, या स्नान के बाद अपने कानों को ध्यान से सूखाने के लिए समय निकालें।

कान दर्द के कारण Causes of Ear pain:

कान का दर्द कान में चोट, सूजन या संक्रमण के कारण हो सकता है। कान दर्द का सबसे आम कारण कान का संक्रमण है। ओटिटिस मीडिया मध्य कान का एक संक्रमण है, जबकि ओटिटिस एक्सटर्ना कान नली का एक संक्रमण है।

कान के दर्द का इलाज Treatment of Ear Pain:

आपका डॉक्टर कान के संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक्स लिख सकता है, हालांकि कुछ शोध बताते हैं कि एंटीबायोटिक्स हमेशा एक प्रभावी उपचार नहीं हो सकता है।
कुछ देर तक दर्द वाले कान के लिए गर्म मफलर या कपड़े से ढके गर्म पानी की की थैली से सेक ले । लेकिन अगर कान के संक्रमण का संदेह है, तो कान के अंदर के भाग को गीला होने से बचाएं।
ज्यादातर मामलों में, कान का दर्द बिना किसी उपचार के कम हो जाता है, लेकिन यदि यह दूर नहीं जाता है, या अन्य गंभीर लक्षणों के साथ है, तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

सारांश Summery 

सरीर का हर अंग बहुत महत्त्वपूर्ण है अतः उनका बारीकी से ख़याल रखना चाहिए किसी भी तरह की कमी रखना खतरनाक साबित हो सकता है।

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Sunday, January 13, 2019

फ़ूड एलर्जी के कारण और लक्षण। What is food Allergy in hindi.

क्या है फ़ूड एलर्जी और कारण What is food allergy and Reasons in hindi:

यह हमारे सरीर के प्रतिरक्षा तंत्र(Immunity system) में हुई गड़बड़ी के कारण होता है। प्रतिरक्षा तंत्र का काम होता है वैक्टीरिया और वायरस से सरीर की रक्षा करना परन्तु जब वो भोजन के तत्वो में अंतर नही समझ पाता तो कई तरह के विपरीत क्रिया करता है। आमतौर पर बच्चों में फ़ूड एलर्जी के लक्षण ज्यादा पाए जाते है।

फ़ूड एलर्जी के लक्षण synonyms of food allergy:

फ़ूड एलर्जी मुख्यतः जिन खाद्य पदार्थों से होती है वो ये है:
१) अंडा २) दूध ३) गेहूं ४) मूमफली ५) मछली
इसके अलावा कुछ लोगो मे सब्जियों और फलों की भी एलर्जी होती है।

फ़ूड एलर्जी के लक्षण समान्यतः इस प्रकार है:
१) उल्टी। २) गले की तकलीफ। ३) सांस लेने में दिक्कत ।
४) सरीर में खुजली होना । ५) जीमचलन या दस्त लगना।
६) चेहरे में सूजन। ७) आँख में और होंठो में सूजन।

फ़ूड एलर्जी के उपाय:

अगर फ़ूड एलर्जी में लक्षण पता चले तो इसका जल्द से जल्द मेडिकल चेकअप परवाये। और पता चलने पर डॉक्टर से परामर्श ले। डॉक्टरों द्वारा इसका इलाज यही बताया जाता है कि जिस पदार्थ से आपको एलर्जी है उस पदार्थ का सेवन न करें।


सारांश Conclusion 

आजकल के परिवेश में हमारे आसपास रचनात्मक खाद्यान सामग्री उपलब्ध जिसके सेवन से
नई नई बीमारियों से लोग ग्रसित हो रहे है , इसलिए सावधानी और जानकारी के साथ भोजन करे ताकि आप स्वस्थ रहे।

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Friday, January 11, 2019

तनाव से होने वाली मुख्य स्वास्थ समस्या। Top Health problems related to Stress.

तनाव के कारण होने वाली समस्या Stress related Health problems in Hindi:

तनाव मनुष्य के अंदर बहुत सी घातक स्वास्थ समश्याओं की उत्पत्ति का कारण होता है, ये घातक इसलिए है क्योंकि इसके कारण होने वाली समस्याओं से मृत्यु हो जाती है। सरीर में तनावपूर्ण बनता जाता है और पता नही चलता , व्यक्ति को सब सामान्य लगता है और वो कभी भी किसी घातक वीमारी की चपेट में आ जाता है। तनाव की वजह से होने वाली कुछ स्वास्थ समस्या ये है:

१) हृदय रोग Heart Disease
२) फेफड़ा रोग Asthama 
३) डिप्रेसन Dipression
४) उदर रोग Ulcerative 
५) मोटापा Obesity
६) सरदर्द Headache
७) मधुमेह Diabetes

हृदय रोग Heart Disease

सरीर में तनाव से सबसे ज्यादा खतरा हृदय संबंधी रोग का होता है क्योंकि तनाव की वजह से उच्च रक्तचाप की समस्या होती है जिसके वजह से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

फेफड़ा रोग Asthama

अस्थमा जैसी बीमारियों का वायु प्रदूषण के अलावा एक मुख्य वजह तनाव है। खास तौर पर बच्चों में होने वाले आस्थमा का कारण गर्भावस्था के दैरान मां के द्वारा लिया गया तनाव या धूम्रपान मुख्य वजह है।

डिप्रेशन Depression

तनाव के बढ़ने के कारण इंसान में डिप्रेशन में जाने का खतरा हो जाता। नकारात्मक सोच, घबराहट , बेचैनी होने लगती है। यह तनाव के दौरान पैदा हुए अनिद्रा के कारण होता है। मनुष्य का अपनी सोच और भावनाओं में कंट्रोल कम हो जाता है जिसकी वजह से वो डिप्रेस रहने लगता है।

उदर रोग ulcerative

अनिद्रा की वजह से मनुष्य के पाचन तंत्र में बहुत बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से लीवर और अल्सर जैसी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। हार्मोन का बैलेन्स खराब हो जाने की वजह से इनके अलावा भी बहुत सी बीमारी हो सकती है।

मोटापा Obesity

तनाव की स्थिति में हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ने के कारण मोटापा की समस्या बढ़ जाती है। मोटापा से ग्रस्त इंसान के पेट के आसपास और पैरों में ख़ासकर वसा का जमाव बढ़ जाता हैं। जिसकी वजह से सरीर में मोटापा दिखने लगता है।

सरदर्द Headache

तनावग्रस्त व्यक्ति को सरदर्द से जूझना पड़ता है कभी कभी ये ज्यादा बड़ जाने के कारण माइग्रेन जैसी समस्या बन जाती है। ये सब तनाव में अनिद्रा और हार्मोनल इंबैलेंस के कारण होताहै।

मधुमेह Diabetes

तनाव के कारण सरीर में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ जाता है जिसके कारण मधुमेह होता है साथ ही ब्लड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा होता है।




सारांश Conclusion
तनाव को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी होता है गुस्से पर नियंत्रण और सकारात्मक सोच से तनाव पर काबू पाना आसान होता है, या किसी डॉक्टर से परामर्श ले। क्योंकि ये कई बीमारियों को जन्म देता है जिसकी बजह से आप और आपका परिवार का आर्थिक और मानसिक कष्ट होता है।


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Wednesday, January 9, 2019

कब्ज का घरेलू एवं आयुर्वेदिक इलाज। Ayurvedic and Home Treatment of Constipation in Hindi.

कब्ज (Constipation):

कब्ज एक आम समस्या है जो दैनिक खानपान , असंतुलित जीवनशैली से मुख्यतः हो रहा है और भी बहुत से कारण है। कब्ज की अवस्था मे इंसान मल त्यागने में परेसानी होती है, जंहा सामान्य अवस्था मे एक या दो बार मल त्याग किया जाता है वंही कब्ज होने में कई दिन ठीक से पेट साफ नही होता। कब्ज कई तरह की पेट से जुड़ी हुई बीमारियों को जन्म देता है इसके अलावा पाईल्स, चर्मरोग, सरदर्द जैसी समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। यह हर वर्ग और आयु के लोगो को प्रभावित कर रहा है जिससे इंसान ताजगी और आनंद का अनुभव नही कर पाता।

कब्ज के लक्षण Symtosym of Constipation:

१) दो से तीन दिन तक ठीक से पेट साफ न होना
२) मल का सूखा और कम निकलना
३) मल त्यागने में ज्यादा समय या जोर लगना
४) पेट मे मरोड़ या दर्द या गैस बनना
५) सर में या पैरो में दर्द रहना
६) उल्टी होना , जी मचलना
७) बदहजमी या एसिडिटी होना
८) पाईल्स की शिकायत होने

कब्ज के कारण Reasons of Constipation:

१) अनियमित खानपान
२) तली हुये भोजन का अधिक सेवन
३) व्यायाम में कमी
४) बिना पचे भोजन के बाद भी भोजन
५) कम मात्रा में पानी पीना
६) रसे वाले भोजन का कम खाना
७) मादक पदार्थो का सेवन
८) अधिक मात्रा में दावा का सेवन

कब्ज दूर करने का घरेलू उपाय Home Remedies of Constipation:

१) अधिक से अधिक पानी पीयें: सरीर में पानी की कमी से कब्ज होता है इसलिए 3-4 लीटर पानी अवस्य पिये।

२) नियमित व्यायाम करें: व्यायाम करने से पाचन क्रिया मजबूत होती है इसलिए नियमित व्यायाम करें।

३) खाने में रसेदार भोजन ले: रसेदार और कम मसालेदार भोजन आसानी से पचता है और पेट भी आसानी से साफ होता है इसलये रसेदार भोजन समयबद्ध तरीके से ले।

४) खाने के बाद ठंडा पानी न पिएं: ठंडा पानी पाचन क्रिया को कमजोर करता है जिससे भोजन पचाने में अधिक समय लगता है, इसलिए ठंडा पानी न पिएं। गर्मियों में मटके का पानी पिये।

५) सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना: सुबह गुनगुना पानी पीने से आंतों में दबाव पड़ता है और पेट ठीक से साफ होता है, इसके अलावा बिना पचे हुए भोजन को भी आसानी से पचा जाता है।

६) सोने से पहले त्रिफला चूर्ण या इसबगोल ले: रात को सोने से पहले एक चमच्च त्रफल चूर्ण गुनगुने पानी मे घोल कर ले सुबह आसानी से पेट साफ हो जाता है।

७) खाने में सलाद, पपीता , अमरूद शामिल करें: ये सभी पदार्थ पाचक है इनके अलावा भी वो पदार्थ जो आसानी से पचते है और पाचन क्रिया को मजबूत करते है उनको खाने में शामिल करें।

८) दिन में नींबू पानी और रात में गर्म दूध ले।



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Tuesday, January 8, 2019

मुख्य पांच स्वास्थ्य समश्याये। Top 5 most common Helth issues.

हमारे देश और आसपास बहुत सी स्वास्थ से जुड़ी हुई बहुत सी समस्या है जो कि आधुनिक जीवनशैली , नई तकनीक में बढ़ती निर्भरता से हो रही है। यंहा पर बात है उनमे से मुख्यतः 5 समश्याओं के बारे में जिसे समझना जरूरी है:

१) सारीरिक मेहनत और पोषण
२) तम्बाखू
३) HIV/Aids
४) पर्यावरण प्रदूषण
५) मोटापा या अतिभार

सारीरिक मेहनत और पोषण:

जिस तरह विकास और आगे बढ़ने के लिए नई तकनीक जरूरी है उसी तरह अच्छे स्वास्थ्य के लिए उन तकनीकों पे आश्रित नही रहना जरूरी है। खाये हुए भोजन को पचा कर ऊर्जा में बदलना आवश्यक है, और आवश्यक है शारीरिक मेहनत , व्यायाम, चलना , दौड़ना, योग करना।
साथ ही भोजन ऐसा हो जिसमें सभी पोषक तत्व हो और सही मात्रा में ही भोजन करे। हो सके तो अपने भोजन को प्लान करके समयबध्ध तरीके से करे।

तम्बाखू:

"स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तंबाखू" सभी को पता है , भारत सरकार भी इसका प्रचार करती है कि तम्बाखू का सेवन न करे। परन्तु उत्पादन, बिक्री, और सेवन में कोई रोक नही है। देश कि बड़ी आबादी इस पर निर्भर हो रही है और कैंसर, अस्थमा जैसी बीमारियों में जकड़ रही है।

HIV/AIDS:

सरकार ने इसके बचाव और बचाव के तरीकों के प्रचार प्रसार में बहुत जोर दिया है, परन्तु फिर भी देश की बहुत बड़ी आबादी इस बीमारी की शिकार हो रही है। ये खतरनाक है क्योंकि अबतक इसके रोकथाम के कारगर टीके, और दवाओं की उपलब्धता नही है।

पर्यावरण प्रदूषण:

पर्यावरण प्रदूषण देश की बढ़ती हुई समस्या है जो की गाड़ी वाहनों के बढ़ते हुए स्तेमाल ,फैक्टरियों से निकलने वाले धुंए और बड़े पैमाने पेड़ो के कटाव से हो रहा है। यह कई सांस से जुड़ी हुई बीमारियों की जड़ है। इससे मौसम में अस्थिरता बन रही है जिससे जल संकट भी बढ़ रहा है।

मोटापा या अतिभार:

असामान्य जीवनशैली, असन्तुलित खानपान और व्यायाम की कमी के कारण आजकल ज्यादातार लोग मोटापा से ग्रस्त है। खाद्यपदार्थ में रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से और साथ ही साथ बीमारियों में स्तेमाल होने वाले एलोपेथिक दवाओ के विपरीत प्रभाव से भी अतिभार की समस्या बढ़ रही है। संतुलित खान पान और व्यायाम से इस समस्या से निजात मिल सकता है।



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Monday, January 7, 2019

उच्च रक्तचाप का उपाय। How yo control high blood pressure in hindi.

उच्च रक्तचाप और उसका प्रभाव High blood pressure and effect:


 आधुनिक युग मे मशीनों का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है जिससे लोगो को सुविधाएं तो मिल रही है परन्तु उनका शारीरिक व्यायाम कम और आलस्य बढ़ता जा रहा है, जिसका नतीजा है हृदय से सम्बन्धित बीमारियों का बढ़ना। उच्च रक्तचाप भी इनमें से एक है। यह गंभीर हो सकता है और इससे हार्ट अटैक भी होता है। हृदय की गति को नियंत्रित रखना जरूरी है इसलिए समय समय पर इसका रूटीन चेक करवाये।

उच्च रक्तचाप के लक्षण High blood pressure symptoms:

उच्च रक्तचाप होने पर घबराहट, चक्कर आना, हाँथ पांव में झुनझुनाहट, नाक आए रक्त आना और अनिन्द्रा जैसे लक्षण हो सकते है। लक्षण दिखाई देते ही डॉक्टर से संपर्क करे।

उच्च रक्तचाप में क्या खाएं क्या नही Home remedies and Diet plan for High blood pressure :


१) नमक और सक्कर : नमक का सेवन कम या न करें क्योंकि नमक में मौजूद सोडियम उच्च रक्तचाप का सबसे बड़ा कारण है। इएलिये लो सोडियम नमक का सेवन करे।
सक्कर का इस्तेमाल कम करे, ये ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाता है जो कि हानिकारक है।

२) कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करे: खाने में ऐसी चीजों का सेवन कम करे जिससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से हृदय संबंधी तकलीफ और बीमारी बढ़ती है।

३) रोजाना व्यायाम करें जिससे वसा का जमाव कम होता है, कोलेस्ट्रॉल कम करता है, बजन कम करता है। लिफ्ट की जगह सीढियों का इस्तेमाल करे।

४) नशीले पदार्थों का सेवन कम या न करें क्योंकि इससे रक्तचाप बढ़ता है साथ ही बजन भी बढ़ता है और हृदय रोग बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

५) तनाव और गुस्से को नियंत्रित रखे। ज्यादा गुस्सा करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है।




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Sunday, January 6, 2019

अस्थमा या दमा : Asthma symptoms and Treatment in ayurveda in hindi.

दमा या अस्थमा क्या होता है Definition of Asthma:

अस्थमा एक गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है, ये फेफड़ों में हवा के रास्तों से जुड़ी है। इन रास्तों (bronchial tubes) से हवा फेफड़ों के अंदर और बाहर जाती है। जब अस्थमा होता है तो इन ट्यूब्स ने सूजन अजाति है और ज्यादा होने पर परेसानी बढ़ जाती है, जिसमे खांसी, सांस फूलना, घबराहट, सांस लेने में तकलीफ और सीने में जकड़न जैसी समस्या होती है। यह एक गंभीर रोग है और स्वांस नली अवरुद्ध होने पर मृत्यु हो जाती है।

अस्थमा के प्रकार Type of Asthma in hindi:


१) अल्जेटिक अस्थमा : यह अस्थमा किसी चीज की एलर्जी के कारण होता है जिसमे धुंआ, धूल या मिट्टी या ढंड से भी हो सकता है।
२) नॉन अलर्जेटीक अस्थमा: इस तरह का अस्थमा मानसिक टेंसन या फिर ज्यादा ढंड लगने के कारण हो सकता है।
३) चाइल्ड ऑनसाइट अस्थमा: ये बच्चों को होता है और उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है और खतरनाक होता जाता है।
४) मिमिक अस्थमा
५) आक्यूपेसनल अस्थमा
६) कफ वेरियंट अस्थमा
७) नाईट टाइम अस्थमा

अस्थमा से बचाव के घरेलू उपाय home remedies for asthama:


अस्थमा से बचाव के लिए स्वस्थ आहार लेना जरूरी है साथ ही साथ योग और एक्सरसाइज से इसका बचाव होता है। रोजाना सुबह खुली हवा में वॉक पे जाए। 
प्राणायाम और श्वास से जुड़ी हुई एक्सरसाइज बहुत फायदेमंद होता है, और श्वास अंग को मजबूत करता है जिससे कफ और खांसी से निजाद मिलती है।

अस्थमा में क्या खाएं और क्या नही Diet plan of Asthama:


क्या खाएं What to Eat

१) गाजर और पालक का इस्तेमाल करना चाहिए साथ ही साथ हरी पत्तेदार सब्जियां भी खाए।
२) फलों का सेवन करना चाहिए मुख्य तौर पर विटामिन सी, विटामिन ए और विटामिन ई से प्रचुर फलों का सेवन करे।
३) हल्दी , अदरक और लहसुन का इस्तेमाल करे । ओमेगा 3 फैटी एसिड उक्त भोजन ले।
४) एन्टी ऑक्सीडेंट वाले फलों और सब्जियों का सेवन करे ताकि सरीर में और खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़े।
५) ज्यादा से ज्यादा गर्म पानी पिये ये बहुत फायदेमंद होता है।

क्या न खाएं What Not to Eat

१) डंडी पदार्थ जैसे आइस क्रीम और ठंडे खाद्य पदार्थो का सेवन न करे।
२) अंडे , मांस या मछली का सेवन हानिकारक है।
३) ज्यादा मात्रा में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट और वसा वाली चीजों का सेवन कम करे।


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Friday, January 4, 2019

सर्दी जुखाम से बचने के घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय। Ayurvedic and Home Remedies for Cold and Cough.

सर्दी जुखाम के कारण और बचाव:


अक्शर बदलता हुआ मौसम और ठंड का मौसम आपको बीमार करता है जिसमे सबसे ज्यादा सर्दी जुखाम होता है। यू तो ये आम है परंतु बच्चो और बुजुर्गो को ये घातक भी हो सकता है क्योंकि ये वाइरल इंफैक्शन है और ज्यादा होने पर फेफड़ो पर असर करता है और ज्यादा कफ होने पर स्वास नाली को ब्लॉक करता है।
आयुर्वेद में और हमारे घरों में बहुत से ऐसे आसान उपाय है जिसके स्तेमाल से सामान्य सर्दी जुखाम को आराम मिलता है।

१) तरल पदार्थ का सेवन: 

कोशिस करे कि ज्यादा से ज्यादा तरल पेय पिये, ये सरीर को डिहाइड्रेड रखने में मदत करता है। कभी कभी सर्दी जुखाम होने पर भूख कम लगती है या खाने में स्वाद नही आता इसलिए तरल भोजन या पेय शरीर मे जरूरी पोषण की पूर्ती करता है।

२) हर्बल काढ़ा या टी:

घरो में बनने वाला काढ़ा बहुत ही गुड़कारी और फायदेमंद है। दूध में हल्दी , सोंठ या अदरक , तुलसी की पत्तियों को उबाल कर पीने से बहुत फायदा मिलता है। या तुलसी अदरक की चाय भी पी सकते है।

३) जूस या सूप का इस्तेमाल:

फलों का जूस पिये इससे पोषण मोलता है और सब्जियों का सूप बहुत फायदा करता है। अगर आप नॉन वेजिटेरियन है तो चिकेन या मट्टन सूप पिये ये सरीर को गर्म और इम्युनिटी को बढ़ाता है।

४) अदरक और हल्दी:

अदरक और हल्दी बहुत ही कारगर है जिनमे मौजूद औसधीय गुन सभी परेशानियों से रक्षा करता है। अदरक के टुकड़ों को पानी मे उबालकर पीने से बहुत फायदा मिलता है। समान्यतः हल्का गर्म पानी पीयें ये गले को आराम देता है।

५) गर्म पानी का गार्गल या भाफ लेना:

नमक मिले हल्के गर्म पानी से गार्गल करे , और गर्म पानी का भाफ ले ये सर्दी में कफ की समश्या से आराम देगा । ज्यादा गर्म पानी न ले इसमे जलने के खतरे होते है।


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Thursday, January 3, 2019

ड़ेंगू: लक्षण और बचाव। Dengue Symptoms and causes.

ड़ेंगू : लक्षण और बचाव

डेंगू बुखार डेंगू नामक वायरस से इन्फेक्टेड मच्छर के काटने से होता है,  इस बीमारी के दौरान शरीर की प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं। डेंगू एडीज नाम के मच्छर से फैलता है। हर साल मुख्य तौर पे ये बीमारी बरसात के महीने में ये बीमारी फैलती है, जिसमें हजारों लोगों की जान चली जाती है।


शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी गिरने लगती है, क्योंकि डेंगू होने पर शरीर के काम करने की गतिे धीमी पड़ जाती है, जिससे प्लेटलेट्स बनने की गतिी भी धीमी हो जाती है। डेंगू का मच्छर ज्यादातर दिन में काटता है और ये साफ पानी में फैलता है। मादा एडीज कूलर, ड्रम, टंकी और गमलों में इकट्ठे पानी में अंडे देती है, यहीं से डेंगू फैलता है।

डेंगू के लक्षण 

एडीज मच्छर के काटने के बाद डेंगू का वायरस शरीर में पहुंच जाता है। इस बीमारी का मुख्य लक्षण तेज बुखार होता है ईसके साथ साथ सिर दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों मे भी दर्द होता है। शरीर पर लाल चकत्ते भी दिखाई पड़ते हैं।
इसके अलावा उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी और भूख न लगना भी डेंगू के लक्षण हैं।

ड़ेंगू का इलाज:

ड़ेंगू जानलेवा बीमारी है इसलिए घरेलू उपाय या लोगो द्वारा कही जाने वाली चमत्कारी दवाओं या दावो के चक्कर मे न पड़कर उरन्त लक्षण पता चलने में अच्छे स्वास्थ्य केंद्र में जाये और डॉक्टर के द्वारा बताए दवाई का समय से डोज ले।
पानी ज्यादा पिये और प्लेटलेट्स की रेगुलर जांच करवाएं।

डेंगू से बचाव 

डेंगू से मुकाबला करना मुश्किल है और इसके वायरस के संक्रमण से बचाव रखना भी बेहद जरूरी है।

१) कूलर वगैरह का पानी वक्त पर बदलते रहें और कूलर साफ करें। जहां भी पानी इकट्ठा हो रहा हो उसमें मिट्टी का तेल  डाल दें ताकि अंडे विकसित न हो सकें।
२) गमलों में भी पानी इकट्ठा न होने दें। मिट्टी नम रखें बाकी पानी गिरा दें।
३) सोते समय मच्छर दानी का इसतेमाल करे।
४) बच्चो के मछरों से बचाव के लिए मॉस्किटो क्रीम का यूज़ करे।
५) ध्यान रखें कि घर में कहीं भी पानी इकट्ठा न हो। सफाई का खास खयाल रखें।
६) बर्तन धोने वाली जगह पर भी पानी न इकट्ठा होने दें। हो सके तो बर्तनों को उलटा करके रखें।

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Wednesday, January 2, 2019

वसा खत्म करने वाले भोजन Fat burning foods.

वसा खत्म करने वाले भोजन Fat burning foods :

शरीर में मोटापा बढ़ने का मुख्य कारण है शरीर में जमा होने वाली वसा या फैट(Fat), और फैट या वसा के बढ़ने की वजह है शरीर का मेटाबॉलिज्म। मेटाबोलिज्म का काम है कि जो हैम खाते या पीते है उसको ऊर्जा में बदलना ताकि हमारा शरीर काम करे।
अगर मेटाबॉलिज्म ठीक से काम नही करता तो भोजन ऊर्जा में परिवर्तित न होकर वसा के रूप में शरीर मे इकट्ठा होता है। मेटाबोलिज्म का ठीक से काम न करने का कारण है आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनिद्रा, तनाव, सेहदमंद भोजन का न करना या जरूरत से अधिक भोजन करना, व्यायाम का अभाव और शारिरिक मेहनत में कमी वगैरह।
तो आपको इन सभी चीजों में ध्यान देना होगा साथ हम बात करने जा रहे है कुछ ऐसे भोजन(Foods) की जो वसा (Fat) जलाने में मदत करते है।

१) जैतून का तेल(Olive Oil): 

जैतून का तेल खाने में और सलाद में इस्तेमाल करना चाहिए ये स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है मोटापे के साथ साथ हृदय रोग को भी दूर करने में मदत करता है। मानसिक रोग और डिप्रेशन को दूर रखने में मदत करता है।

२) ग्रीन टी(Green Tea) : 

रोजाना सुबह ग्रीन टी के सेवन से मेटाबॉलिज्म को मजबूत करता है शरीर के डिटॉक्सीफिकेशन में मदत करता है। साथ ही साथ ये डाइबिटीज के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है।

३) ओट्स (Oats) : 

नास्ते में ओट्स खाने से पर्याप्त ऊर्जा मिलती है पेट भी भरता है। ये बहुत हेल्थी है परंतु बाजार में पैकेट में मिलने वाले ओट्स में सोडियम और शुगर होती है तो खरीदते समय ध्यान दे। ओट्स को दूध के साथ पकाकर खाना चाहिए ताकि प्रचुर मात्रा में प्रोटीन भी मिले।

४) तरल पदार्थों का सेवन(liquid Diet) : 


तरल पदार्थों जैसे सूप, जूस, फ्रूट खाने से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है और मोटापा घटाने में मदत मिलती है। साथ ही साथ भरपूर मात्रा में पानी पिये।




५) अंडे का सेवन(eggs) : 

अंडे का सेवन करने से फैट कम होता है और मेटाबॉलिज्म को मजबूत करता है। इसके अंदर उच्च स्तर का प्रोटीन , और जरूरी विटामिन एवम मिनिरल्स होता है, जो कि वजन कम करने में मदत करता है।

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