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Monday, December 31, 2018

हड्डियों और जोड़ो के दर्द का इलाज। bones and joints pain treatment.

हड्डियों और जोड़ो के दर्द का इलाज :


हड्डियों और जोड़ो का दर्द एक आम समश्या है जो कि समय के अनुसार बढ़ती रहती है वैसे तो सरीर से जुड़ी हुई किसी भी समश्या को हल्के में नही लेना चाहिए क्योंकि अगर किसी भी समश्या का इलाज या ख्याल न रखा जाए तो वो आगे चल कर गंभीर हो सकता है।
इसी तरह हड्डियों और जोड़ो के दर्द की समश्या है जिसके होने के कई कारण है, जिनमे से कुछ इस प्रकार है:

१) बोन डेन्सिटी का कम होना: अक्शर महिलायों में ये सबसे बड़ा कारण पाया गया है, क्योंकि बढ़ती हुई उम्र और डिलेवरी के बाद महिलाओं में मिनिरल्स एवम कैल्शियम की कमी हो जाती है। जिसके कारण हड्डियां सरीर का भार सहन नही करती और दर्द की समस्याओं से जूझना पड़ता है।
२) कैल्शियम और विटामिन डी की कमी: असंतुलित भोजन और सरीर के सही से देखभाल न होने के कारण कैल्शियम और विटामिन डी की कमी हो जाती है।
३) खून का संचार ठीक से न होना: कभी कभी खून की कमी या खून के संचार में कुछ अवरुद्ध होने के कारण हड्डियों और जोड़ो का दर्द होता है।
४) हड्डियों में मिनरल्स की कमी होना
५) आर्थराइटिस होना
६) कार्टिलेज का घिसना या फटना

इसके अलावा भी बहुत समश्याओं के कारण दर्द की समश्या हो सकती है।

हड्डियों और जोड़ो के दर्द का घरेलू इलाज़:

१) दूध या दूध से बनी चीजों का सेवन करने से कैल्शियम और विटामिन डी की कमी को पूरा किया जा सकता है क्योंकी दूध कैल्शियम का बहुत अच्छा स्रोत है।
२) सूरज की किरणों से विटामिन डी की कमी को पूरा किया जा सकता है तो रोजाना और खाश कर सर्दियों के दिनों में ज्यादा धूप सेके क्योंकि सर्दियों के दिनों में ये समश्या और बढ़ती है।
३) हल्दी का इस्तेमाल खाने और दूध के साथ करे क्योंकि हल्दी रक्त के संचार को बढ़ाती है।
४) हेल्थी खाना खाएं  ताकि सरीर को प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व मिले , और खनिज तत्वो की कमी न हो।
५) खाने में अदरक और लहसुन का इस्तेमाल करे

सरीर का रखरखाव से दर्द का इलाज़:

१) रोजाना एक्सरसाइज करने से जोड़ो और हड्डियों को मजबूती मिलती है तो अपने उम्र के हिसाब से एक्सरसाइज करें या आधे घंटे पैदल चले।
२) उठने बैठने में सरीर ध्यान दे किसी विशेष अंग या जॉइंट में सारा भार न पड़े।
३) जोड़ो का ज्यादा खिंचाव न करे मोच या दर्द में खिंचाव करने से दर्द बढ़ सकता है।
४) सिकाई या मालिश करे , किसी गर्म तेल या राई के तेल में लहसुन को गर्म करके मालिश करने से दर्द में आराम मिलता है।

तो दोस्तो आपको ये जानकारी कैसी लगी अपने सुझाव दे और शेयर करे। अपना ख्याल रखे।


Saturday, December 29, 2018

डायबिटीज के कारण , लक्षण और घरेलू उपाय। Home remedies for "Diabetes"


डायबिटीज 


डायबटीज या मधुमेह बीमारियों का एक समूह है जिसमें लंबे समय तक शुगर का स्तर हाई  होता है। 
हाई शुगर लेवल के लक्षणों में अक्सर पेशाब और प्यास की बढ़ोतरी होती है, साथ ही साथ भूख में भी वृद्धि होती है।  मधुमेह कई समश्याओं का कारण बन सकता है।  बड़ी समश्यायो में मधुमेह केटोएसिडोसिस, नॉनकेटोटिक हाइपरोस्मोलर कोमा, या मौत शामिल हो सकती है। दोस्तों आज कल हर तीसरा व्यक्ति डाइबटीज़ यानि मधुमेय रोग से पीड़ित है | इसलिए लंबी उम्र के लिए इसका समय पर ईलाज करवाना और अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है इस रोग में लापरवाही ना करें दोस्तों क्योंकि यदि किसी कारण से आपको कोई घाव हो जाये या फिर किसी तरह का कोई बड़ा इलाज करवाना हो तो वहाँ इस बीमारी की वजह से आपको काफी भयंकर परिणाम देखने पड़ सकते हैं | 
गंभीर और लंबे समय तक कि समश्याओं में हृदय रोग, स्ट्रोक, क्रोनिक किडनी की विफलता, पैर अल्सर और आंखों को नुकसान शामिल है।
मधुमेह के कारण है या तो अग्नाशय पर्याप्त इन्सुलिन का उत्पादन नहीं करता या शरीर की कोशिकायें इंसुलिन को ठीक से जवाब नहीं करती। 

 मधुमेह के चार मुख्य प्रकार हैं:


Type 1 : इस तरह के डाइबिटीज में पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन करने के लिए अग्न्याशय पूरी तरह काम नही कर पाता है। इस रूप को पहले "इंसुलिन-आश्रित मधुमेह मेलाईटस" (आईडीडीएम) कहा जाता था, इसका कारण भी पता नही चलता है।

Type 2: इस तरह के डाइबटीज में इंसुलिन प्रतिरोध से शुरू होता है,  जैसे-जैसे रोग की प्रगति होती है, इंसुलिन की कमी भी विकसित हो सकती है।  इस फॉर्म को पहले "गैर इंसुलिन-आश्रित मधुमेह मेलेतुस" (एनआईडीडीएम) । इसका सबसे आम कारण अत्यधिक शरीर का वजन होना और पर्याप्त व्यायाम न करना है।

Type 3: इसे गर्भावधि मधुमेह कहते है और तब होता है जब मधुमेह के पिछले इतिहास के बिना गर्भवती महिलाओं को उच्च हाई शुगर का विकास होता है।

Type 4 : इसे सेकेंडरी डायबिटीज कहते है  इस प्रकार की डायबिटीज इलाज करने से ही सही हो सकता है जैसे की कुछ दवाईओं को बंद करने से, पिट्यूटरी  ग्लैंड का ट्यूमर का इलाज करने से।

कुछ घरेलू उपाय 


१)  खाने में यैसे चीजो का इस्तेमाल जिसमे शुगर का लेवल कम होता है, साथ ही साथ करेला का इस्तेमाल करे इसमे शुगर की मात्रा कम होती है तो इसका जूस या सब्जी के तौर में स्तेमाल कर सकते है।

२) खाली पेट आम , तुलशी या नीम के पत्ते को चबाने से शुगर लेवल में कंट्रोल किया जाता है।

३) रात में मेथी के दानों को पानी मे भिगो कर रखे सुबह पिये , इसके अलावा भिंडी को भी रात में पानी मे भिगोकर रखे सुबह पीने से डायबिटीज कंट्रोल रहता है।

४) दालचीनी या आँवले  को पीश ले और रोज पानी मे उबाल कर पीने से शुगर कंट्रोल में फायदा होता है।

५) नियमित रूप से भांग की एक पत्ती सुबह एक बादाम के साथ खाने से शुगर हमेशा नियंत्रण में रहेगी ।


तो दोस्तो आपको ये जानकारी कैसी लगी कृपया अपने सुझाव और कॉमेंट दे। साथ ही साथ शेयर करे।



Friday, December 28, 2018

एंग्जायटी डिसॉर्डर । Anxiety Disorder.

क्या होता है एंग्जायटी डिसॉर्डर

हमेशा चिंता या डर में जीने की आदत पड जाए तो आगे चलकर यही मनोदशा एंग्जायटी डिसॉर्डर जैसी गंभीर समस्या में बदल सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में इसके अलग-अलग लक्षण नजर आते हैं, लेकिन स्थायी डर और चिंता लगभग सभी में देखे जाते हैं। इसी वजह से उनमें चिडचिडापन और आक्रोश बढता जा रहा है। इसके अलावा आधुनिक समाज में हर व्यक्ति अकेला है। किसी के भी पास दूसरे की बातें सुनने की फुर्सत नहीं है। जब ऐसी नकारात्मक भावनाओं पर व्यक्ति का कोई नियंत्रण न हो और तमाम कोशिशों के बावजूद छह महीने से ज्यादा लंबे समय तक इसके लक्षण दिखाई दें तो यह समस्या एंग्जायटी डिसॉर्डर का रूप धारण कर सकती है। अगर ये लक्षण ज्यादा तीव्र न हों तो समय बीतने के साथ समाप्त हो जाते हैं, अन्यथा एंग्जाइटी डिसार्डर की समस्या हो सकती है। आनुवंशिकता भी इसकी प्रमुख वजह है।

एंग्जायटी डिसॉर्डर के प्रकार

प्रमुख लक्षणों के आधार पर इस मनोवैज्ञानिक समस्या के कई अलग-अलग प्रकार निर्धारित किए जाते हैं, जो इस प्रकार हैं :

जनरलाइज्ड एंग्जायटी डसॉर्डर Generalized Anxiety Disorder :
इस समस्या से पीडित लोग सकारात्मक परिस्थितियों में भी ऐसे लोग चिंतित होने की कोई न कोई वजह ढूंढ लेते हैं।
बेवजह बहुत ज्यादा चिंतित रहते हैं।  हमेशा चिंता में रहना इनकी आदत होती है जिसका कोई तर्क भी नही होता है।

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर Obsessive-Compulsive Disorder (OCD) :
 इससे पीडित लोग लगातार चिंतित या भयभीत रहते हैं। ऐसे में वे कुछ अजीब आदतें विकसित कर लेते हैं। जैसे कि अगर गाने की आदत लग गयी तो गाते ही रहते है।

पैनिक डिसॉर्डर Panic Disorder:
ऐसे लोगों को बेवजह मौत का भय सताता रहता है। भूत जैसी चीजों या किसी व्यक्ति विशेष से भयभीत रहते है।

पोस्ट स्ट्रेस डिसऑर्डर Post-Traumatic Stress Disorder (PTSD) :
 ऐसी अवस्था मे लोग अत्यधिक चिंता में डूबे रहते है, जैसे नौकरी, बच्चों की पढ़ाई या उनकी शादी या काम।

सोशल एंग्जाइटी डिसॉर्डर  Social Phobia (or Social Anxiety Disorder):
 ऐसी समस्या से पीडित व्यक्ति हरदम ऐसा लगता है कि लोग उसे ही घूर रहे हैं। वह भीड वाली जगहों और सामाजिक समारोहों में जाने से बचने की कोशिश करता है क्योंकि ऐसे माहौल में उसे बहुत घबराहट महसूस होती है।

कैसे करें बचाव

पूरी नींद ले

रोजाना के कामकाज को निश्चित करिए  एवम पूरी नींद ले क्योंकि अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी से मस्तिष्क पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाता। अनिद्रा से एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा बढ जाता है।

पौस्टिक आहार:

भोजन में फलों और हरी सब्जियों को शामिल करें क्योंकि मस्तिष्क को भी पोषण की पूरी जरूरत होती है।

एक्सरसाइज , योग, व्यायाम:

आकाग्रता के लिए व्यायाम और योग अभ्यास से बहुत लाभ होता है, इसलिए आत्मविस्वाश भी बढ़ता है। लोगों के साथ दोस्ती बढाएं और खुलकर अपनी भावनाएं शेयर करें।

मनोवैज्ञानिक सलाहकार

किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह ले और बिना सलाह के कोई भी दवा मत ले साथ ही कैफीन , अल्कोहल, तम्बाखू , ड्रग्स से दूर रहे क्योंकि ये परेशानियों को और बढ़ाती है।




Thursday, December 27, 2018

डिप्रेशन Depression

अवसाद या डिप्रेशन Depression


आधुनिक जीवन शैली में डिप्रेशन बहुत बड़ी समश्या है, डिप्रेशन से ज्यादातर लोग काफी परेशान है। भारत मे हर चौथा आदमी डिप्रेशन से परेशान है। कई बार डिप्रेशन छोटे छोटे कारण से सुरु होता है और बाद में काफी खतरनाक होता है। डिप्रेशन से चलते लोगो का व्यवहार , पारिवारिक तथा सामाजिक जीवन को बहुत प्रभावित करता है।

नकारात्मक सोच डिप्रेशन की सबसे बड़ी वजह है और सकारात्मक सोच सबसे बड़ा इलाज़। परंतु जब कोई इंसान डिप्रेशन में होता है तो सोच में कंट्रोल नही होता इस लिए जल्द ही अच्छे मनोचिकित्सक (psychiatrist or psychologist) से परामर्श ले।

क्या होता है डिप्रेशन:

डिप्रेशन को रोग या सिंड्रोम कहा गया है। डिप्रेशन अक्सर दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स की कमी के कारण भी होता है। न्यूरोट्रांसमीटर्स दिमाग में पाए जाने वाले रसायन होते हैं जो दिमाग और शरीर के विभिन्न हिस्सों में कनेक्शन स्थापित करते हैं। इनकी कमी से भी शरीर की संचार व्यवस्था में कमी आती है और व्यक्ति में डिप्रेशन के लक्षण दिखाई देते हैं। इस तरह का डिप्रेशन आनुवांशिक होता है। 
डिप्रेशन के कारण निर्णय लेने में अड़चन, आलस्य, सामान्य मनोरंजन की चीजों में अरुचि, नींद की कमी, चिड़चिड़ापन या कुंठा व्यक्ति में दिखाई पड़ते हैं। 
डिप्रेशन में 90% लोगो को नींद न आने की समस्याओं से जूझना पड़ता है, महिलाये पुरषो की अपेक्षा डिप्रेशन का कम शिकार है परंतु अच्छा माहौल नही मिलने से उनमे डिप्रेशन होता है।


डिप्रेशन से बचने के उपाय:

 
    १) अपने आपको ज्यादा व्यवस्थित (busy)रखने की कोशिश करे, इसमे कोई खर्च भी नही और ये सबसे आसान तरीका है । फिर चाहे आपका काम हो, परिवार, या समाज कही भी अपने आप को व्यवस्थित रखे।

    २) सकारात्मक सोच रखे ये आपको डिप्रेशन से लड़ने में आसानी से काम करेगा, इन तरह के विचार की "कुछ नही हुआ सब ठीक है" । 

 

   ३) खुश रहने की कोशिश वहीं काम करे जो आपको अच्छा लगे और खुशी दे, अगर संगीत का शौक है तो गाने या डांस कर। परिवार को भी चाहिए कि वो खुशी का ख्याल रखे।

   ४) पूरी नींद लेने की कोशिश करे , माहौल को शांत बनाने की कोशिश करे ताकि पूरी नींद आये।






   ५)  ध्यान और योग का सहारा ले ये आपको तनाव मुक्त करने में बहुत कारगर है।


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Wednesday, December 26, 2018

सिर के दर्द के उपाय। How minimise Headache.

सिर दर्द की परेशानी और उपाय



आज कल की तनाव पूर्ण जीवन शैली में सिर दर्द की समस्या कुछ लोगों को बार-बार तंग करती है। सिर का दर्द कई समस्याओं का सूचक भी होता है, और ये बहुत परेशानिया पैदा करता है। महिलाये अक्सर सिर के दर्द से परेशान रहती है और उपाय खोजती रहती है क्योंकि ये बहुत ही बड़ी समस्या बनती जा रही है,  प्राइमरी स्तर में सिर दर्द की असल वजह पता नहीं चलती, परन्तु वहीं सेकेंडरी स्तर में दर्द किसी हैल्थ प्रॉबल्म की वजह से होता है। 

क्यों होता है सिर में दर्द 

१) ब्रेन ट्यूमर

अगर आपको लगातार बिना किसी वजह से सिर दर्द होने लगे और आसानी से ठीक होने का नाम ही न लें तो यह ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में दर्द लगातार होता है, इसलिए ऐसे दर्द को नजरअंदाज न करें ब्लकि तुरंत डॉक्टर की सला लें। 

२) बुखार

बुखार का सिर दर्द साथ कान और गले मे भी दर्द होता है और ये बुखार की दवा लेने पर ठीक होता है, परन्तु अगर ठीक न हो रहा हो तो डॉक्टर से सलाह ले। बाम का प्रयोग कम से कम करे।

३) दांत या कान का इंफैक्शन 

सिर के आसापास की जगह जैसे कान या दांत में इंफैक्शन होने से भी सिर दर्द हो सकता है। 

४) तनाव

यह आज कल सबसे बड़ी बजह बन गयी है , लगातार तनाव में रहने से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है। जिसका दिमाग पर असर पड़ता और तेज दर्द होने लगता है। ऐसे दर्द की स्थिति में तनाव पूर्ण रहने की कोसिस करे, सैर या म्यूजिक का सहारा ले।

५) रक्त चाप का बढ़ना या घटना 

अक्सर लो बीपी के कारण सिर में पूरी तरह ब्लड नही पहुचता या हाई बीपी की समस्या होने पर छाती और सिर दर्द की शिकायत रहती है। अगर आपका भी अचानक से तोज सिर दर्द होने लगे तो अपना बीपी जरूर चैक करवाएं।

६) आंखो की समस्या 

आंखों में समस्या होने की स्थितियों में मस्तिष्क पे जोर अधिक होता है और इस कारण सिर दर्द होने लगता है, तो अगर बार बार होता है तो आंखों की जांच अवश्य करवाये।

Tuesday, December 25, 2018

विटामिन डी कि कमी का प्रभाव। Vitamin D deficiency.

तेजी से बढ़ती विटामिन डी की कमी और प्रभाव:

विटामिन डी तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रणाली और हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है, भोजन से कैल्शियम को सोखकर हड्डियों तक पहुचाता है विटामिन डी हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। यह शरीर में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करने का काम करता है, यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। 

विटामिन डी कि कमी के लक्षण एवं प्रभाव

विटामिन डी के लक्षण एकदम उभर कर सामने नहीं आते, इसी वजह से लोगों को समय पर विटामिन डी की कमी से होने वाले रोगों का पता ही नहीं चल पाता।परन्तु विटामिन डी की कमी से भोजन का कैल्शियम और फॉस्फोरस सोख नही पता जिसके कारण हड्डिया और दांतों में कैल्शियम की कमी हो जाती है और वो कमजोर हो जाते है, साथ ही कई सोधो से पता चला है कि विटामिन डी कि कमी से गम्भीर बीमारिया भी होती है।
विटामिन डी की कमी से मोटापा , और स्किन में डार्कनेस की समस्या हो सकती है।
साथ ही आर्थराइटिस , जोड़ो में दर्द और बात जैसी समश्या होती है

कैसे दूर करे विटामिन डी की कमी

सूर्य की रोशनी:

सूरज की किरणें विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है, तो सर्दियों के दिनों में ज्यादा से ज्यादा सूर्य की रोशनी में रहने की कोशिश करे क्योकि सर्दियों में समश्या ज्यादा बढ़ती है।


विटामिन डी युक्त भोजन:


वेजिटेरियन लोगो के लिए बहुत लिमिटिड ऑप्शन है दूध या दूध से बनी प्रोडक्ट
 चीज, सोया मिल्क , सॉस।









नॉन वेजिटेरियन के लिए मांस , मछली और अंडे अच्छे स्रोत है।


















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Monday, December 24, 2018

मोटापा से बचने के सुझाव। home remedies for Obesity.

क्या है मोटापा? कारण ,लक्षण और उपचार।

मोटापा व्यस्त जीवन कि एक आम समस्या है जो तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित खानपान, शारीरिक मेहनत का अभाव मुख्य कारण है वैसे और भी बहुत कारण होते है। लगभग सभी वर्ग के लोग इस समस्या से परेशान है पर मिडिल क्लास और अपर मिडिल क्लास तो बहुत ही ज्यादा ।

पुरुषो की अपेक्षा महिलाये इससे और साथ ही होने वाली अन्य बीमारियों से परेशान है। सरीर में अयाधिक वसा का जामा होना मोटापा कहलाता है.

सुरुआत में भारी और भद्दा दिखना समस्या होती है परंतु बाद में ये गंभीर बीमारियों कि जड़ बन जाती है।




मोटापे से जुड़ी महिलायों कि अन्य बीमारिया: 

मोटापे से डाइबटीज का खतरा सबरे ज्यादा बढ़ जाता है, साथ ही साथ दिल से जुड़ी हुई बीमारिया आम है। इसके अलावा बांझपन की समश्या भी बढ़ जाती जैसे PCOD । इसके अलावा गठिया, पित्तरोग, स्किन एवं बालो कि समस्या होती है।

उपचार एवं पेट कि चर्वी कम करने के उपाय:

१) रोजाना कम से कम 1 घंटे कि सैर:

व्यायाम में कमी अतिरिक्त चर्बी इकठ्ठा करने का मुख्य कारण है और आसानी हो जाती है इसलिए जितना संभव हो पैदल चलने की कोशिश करें। पूरे दिन में कम से कम एक घंटे की सैर ही आपको स्वस्थ और फिट रख सकती है। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करे।

२) जरूरत से ज्यादा भोजन न करे:

जरूरत से ज्यादा भोजन से बजन बढ़ता तो जितना जरूरी हो उतना ही भोजन ले और ध्यान दे भोजन हेल्थी हो सभी पोषक तत्वो से भरपूर।

३) बाहर का खाना और जंक फूड को अवॉयड करे:

आउटसाइड फ़ूड को अवॉयड करे जितना हो सके खुद का बनाया हुआ घर का खाना खाएं, तेल मसाले का परहेज करें।


४)पूरी नींद ले:

अपने आप को तनाव मुक्त रखने के लिए पूरी नींद अवश्य ले , कम से कम 7-8 घंटे कि नींद बहुत जरूरी है। मन पसंदीदा संगीत और डांस तनाव दूर करने का बेहतरीन उपाय है।

५) ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ का सेवन करे:

अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करे, एवं आपके आप को देहइड्रेड रखने के लिए 8-10 गिलास पानी पिये। कोल्डड्रिंक का सेवन न करे एवं अल्कोहल का सेवन कम करे।

तो दोस्तो आपको ये जानकारी कैसी लगी कॉमेंट में जरूर लिखे, हमे आपके सुझाव भी जरूर लिखे। आपका धन्यवाद है।






सर्दियों में बालों का ख़याल कैसे रखे। hair care tips for winters.

सर्दियों में बालों का खयाल कैसे रखे:

अक्सर सर्दियों में बालों से जुडी हुई समस्या बढ़ जाती है, तो जरूरी है कि अपने सेहद मंद बालों के लिए सर्दियों के दिनों में ज्यादा खयाल रखें। इन दिनों ठंड के कारण महिलाओ में बालों का धोना कम हो जाता है साथ ही हवा में नमी की कमी और प्रदूषण की मात्रा ज्यादा होने कि वजह से बालों में डेंड्रफ बढ़ जाते है, तो आइए कुछ आसान घरेलू टिप्स जानते है जिससे आपके बाल साफ सिल्की और सुंदर दिखे।

आपके बाल बनायेगा मजबूत: हेड मसाज

बालों की नियमित तौर पर मसाज करनी चाहिए। तेल से या बादाम के तेल से बालों हफ्ते में 2 से 3 बार मसाज की जा सकती है। ठंड के मौसम में तेल में थोड़ा सा नींबू भी डाल लें और इससे बालों की हफ्ते में 1 बार 15 मिनट तक मसाज करें।


एन्टी डेंड्रफ सम्पू का स्तेमाल:

बालों को साफ़ रखने के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार माइल्ड शैम्पू का यूज़ करें ताकि आपके बाल हमेशा साफ़ और स्मूद रहें, सर्दियों में ठण्ड के कारण रोज़ बाल धोना मुमकिन नहीं हो पाता। इस वजह से सिर पर गन्दगी जमने से स्कैल्प के छिद्र बंद हो जाते हैं और बाल टूटने लगते हैं।

बालों के पोषण का खयाल:

सर्दियों में बालों की देखभाल के लिए उन्हें विटामिन डी युक्त पोषण देना चाहिए। ये पोषण धूप से भी दिया जा सकता है। इसलिए सर्दियों में धूप सेंकना शरीर के साथ बालों के लिए भी अच्छा होता है। साथ ही अन्य तेल जैसे बादाम , नारियल, जैतून आदि का प्रयोग करे।

अच्छी एवम हेल्थी डाइट:

अगर आपकी डाइट अच्छी है तो आपको किसी भी तरह की दवाई लेने की जरूरत नहीं है। बालों को झड़ने से रोकने वाले या फिर बालों को बढ़ाने का दावा करने वाली किसी भी तरह की दवा से परहेज करना चाहिए, कई बार ये खतरनाक भी साबित हो सकती हैं।

प्रग्नेंसी के बाद केअर:

डाइट अच्छी एवं हेल्थी रखे ताकि प्रेग्नेंसी के बाद बालों को हेल्थी रखा जा सके। डिलेवरी के बाद भी पोशक तत्वो का मिलना जरूरी है इसलिए अच्छा आहार के ताकि शरीर के साथ बाल भी स्वस्थ रहे क्योंकि अमूमन डिलेवरी के बाद बाल झड़ने लगते है।

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Sunday, December 23, 2018

PCOD या PCOS हिंदी में , PCOS In Hindi

PCOS या PCOD:

   “पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम” या “पॉली सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर” ऐसी कंडिशन है जो रिप्रोडक्टिव उम्र की महिलाओं में हॉर्मोनल असंतुलन (hormonal imbalance) के कारण हो जाती है। इसमें महिला के शरीर में male हॉरमोन – “androgen” – की मात्रा बढ़ जाती है व ओवरीज़ पर एक से ज़्यादा सिस्ट हो जाते हैं।यह बीमारी के होने का आजतक कोई कारण पता नहीं चला है और यह अभी भी शोध का विषय है, परंतु चिकित्सकों का मानना है कि यह समस्या महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, मोटापा या तनाव सबसे बड़ा कारण है। भारत मे औसतन हर 10 में से एक महिला इस बीमारी से ग्रसित है।


PCOD/PCOS के लक्षण:

१) समय पर मासिक धर्म का नही आना- अनियमित पीरियड्स आना इसका सबसे बड़ा संकेत होता है। कई बार पीरियड जल्दी तो कई बार देरी से होते है, हर उम्र के मरीज में ये परेसानी होती है।
२) अचानक वजन में बदलाव होने लगता है- इस योग में ज्यादातर महिलाओं के शरीर में मोटापा बढ़ जाता है, या फिर अचानक कम होने लगता है।
३) अधिक बाल उगना - ठोड़ी पर अनचाहे बाल उगना सिर्फ हार्मोनल चेंज ही नहीं इस बीमारी का लक्षण भी हो सकता है,इसके अलावा बालों का झड़ना, शरीर व चेहरे पर, छाती पर, पेट पर, पीठ पर अंगूठों पर या पैरों के अंगूठों पर बालों का उगना भी इसके लक्षण है।
४) चिड़चिड़ापन होना- भावनात्मक उथल-पुथल- जल्दी किसी बात पर इमोशनल हो जाना, अधिक चिंतित रहना, बेवजह चिड़चिड़ापन इस बीमारी के संकेत हो सकते हैं।
५) बांझपन- इस समस्या से बांझपन अधिक देखने को मिलता है, जिसका इलाज इन विट्रो फर्टिलाइजेशन जैसी नई तकनीक से दूर किया जा सकता है, जिसके बाद प्राकृतिक तरीके से अंडा महिला के गर्भ में विकसित हो जाता है। PCOD महिलाओं में इनफर्टिलिटी के मुख्य कारणों में से एक है।

PCOS PCOD होने के कारण क्या होते हैं?

 वैसे इसका कोई ठोस कारण पता नहीं चला है, लेकिन ये genetically भी पास होता है और ज़्यादा वज़न होने पर भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। ज़्यादा तनाव के कारण भी ये समस्या हो सकती है।

PCOS PCOD होने पर क्या करें?

१) नियमित व्यायाम करें : पैदल घूमना, जॉगिंग, योग, ज़ुम्बा डांस, एरोबिक्स,साइक्लिंग, स्विमिंग किसी भी तरह का शारीरिक व्यायाम रोज़ करें। व्यायाम के साथ आप मैडिटेशन भी कर सकती ही जिससे तनाव काम होगा।
२) अच्छा खानपान, अच्छी सेहत : जंक फ़ूड,अधिक मीठा,फैट युक्त भोजन,अत्यधिक तैलीय पदार्थ,सॉफ्ट ड्रिंक्स, का सेवन बंद कर अच्छा पौष्टिक आहार लेना ज़रूरी है। अपनी डाइट में फल,हरी सब्जियां,विटामिन बी युक्त आहार,खाने में ओमेगा 3 फेटी एसिड्स से भरपूर चीज़ें शामिल करें जैसे अलसी, फिश, अखरोट आदि। आप अपनी डाइट में नट्स, बीज, दही, ताज़े फल व सब्जियां ज़रूर शामिल करें। दिन भर भरपूर पानी पीएं।
३) सही लाइफस्टाइल का चयन करें : लड़कियां आजकल पढ़ाई या ऑफिस के काम बहुत व्यस्त हो गई हैं जिससे उनका स्ट्रेस लेवल बढ़ रहा है और वे अपनी सेहत पर भी ध्यान नहीं दे पाती हैं। PCOD/PCOS से छुटकारा पाने के लिए लाइफस्टाइल बदलना बहुत ज़रूरी है। अगर आपको इस तरह के लक्षण नजर आएं तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर परामर्श लें और जल्द से जल्द इसका उपचार कराएं। सही आहार, नियमित व्यायाम और लाइफस्टइल में सुधार कर के इस समस्या को रोका जा सकता है।

PCOS/PCOD को दूर करने के घरेलू उपाय:


डॉक्टर की सलाह व दवाइयाँ लेने के साथ ही ये उपाय घर पर करें...ताकि आपको इससे जल्द छुटकारा मिल जाए। ये हैं कुछ जादूई कुदरती उपाय- दालचीनी – ये आपके अनियमित पीरियड की समस्या को दूर करने में बड़ी मददगार होती है। एक टीस्पून दालचीनी का पाउडर गरम पानी में मिला कर पी लें। आप चाहें तो इसे अपने ओटमील, दही या चाय में मिला कर भी पी या खा सकती हैं। इसका सेवन रोज करें, जब तक आपको रिज़ल्ट ना मिलने लगें, दिल की बीमारियों को होने से रोकती है। 1-2 टेब्लस्पून ताज़ी पीसी हुई अलसी को पानी में मिला कर पी लें। इसे रोजाना तब तक पिए, जब तक आपको नतीजे ना मिलने लगें। मेथीदाना – ये होर्मोंस को संतुलित करने, कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करता है और साथ ही वज़न कम करने में भी कारगर होता है। तीन टीस्पून मेथीदाने को पानी में 7-8 घंटे के लिए भिगो दें। फिर सुबह खाली पेट एक टीस्पून भीगा हुआ मेथीदाना शहद के साथ मिलाकर खा लें।

वज़न कंट्रोल करें – अगर आपका वज़न ज़्यादा है तो उसे काबू में करें क्योंकि ओवरवेट लोगों में PCOS की समस्या गंभीर हो जाती है। वज़न कम करने से androgen का लेवल व दूसरी समस्याएं भी कम होंगी और पीरियड भी नियमित रूप से आने लगेगा। अगर इसके कारण आपको प्रेग्नेंट होने में समस्या हो रही है तो वज़न कम करने से ये समस्या भी दूर हो सकती है, इसलिए वज़न कम करना बेहद ज़रूरी है। नियमित एक्सरसाइज करें – साइक्लिंग, वॉक, स्विमिंग, जोगिंग, किसी भी तरह की कसरत नियमित रूप से करें। इसके अलावा स्ट्रैस-फ्री होने के लिए आप प्राणायाम व ध्यान भी कर सकती हैं। वज़न कम करने के साथ ही ये शरीर को सेहतमंद व तनाव मुक्त रखेगा। और ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ और पानी 2-3 लीटर पिये।

तो दोस्तो अगर आपके सुझाव होतो जरूर लिखे कॉमेंट और ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।


Saturday, December 22, 2018

थाइरोइड: महिलायों की गंभीर बीमारी Thyroid : Dangerous for womens.

थाइरोइड THYROID: महिलाओं में तेजी से फैलती बीमारी


क्या होता है थाइरोइड:


थायरायड को कुछ लोग साइलेंट किलर मानते हैं क्योंकि इसके लक्षण बहुत देर में पता चलते हैं। आमतौर पर महिलाएं इस रोग का ज्यादा शिकार होती हैं। आजकल की बिजी लाइफ स्टाइल और अस्वस्थ खान-पान के कारण थायराइड के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। थायरायड ग्रंथि गर्दन में श्वास नली के ऊपर, वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में बनी होती है। ये बटरफ्लाई के आकार की होती है। थायराइड ग्रंथि थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है। इस हार्मोन से शरीर की एनर्जी, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन्स के प्रति होने वाली संवेदनशीलता कंट्रोल होती है। ये ग्रंथि शरीर में मेटाबॉलिज्म की ग्रंथियों को भी कंट्रोल करती है।




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थाइराइड के लक्षण:


1. रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर बनाता है

थाइराइड में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होनी शुरू हो जाती है। शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर बिना दवाइयों के छोटे-छोटे रोगों से निजात पाना मुश्किल हो जाता है।

2. कब्ज की परेशानी होती है

इसमें खाना आसानी से पचाने में भी परेशानी होती है। जिससे पेट से संबंधित परेशानियां भी आनी शुरू हो जाती हैं, कब्ज इस रोग में होने वाली आम दिक्कतों में से एक है। लगातार कब्ज हो रही है तो थाइराइड का चेकअप जरूर करवाएं।

3. थकावट महसूस होती है

आराम करने के बाद भी थकावट महसूस होना थाइराइड का लक्षण हो सकता है। इसमें शरीर की एनर्जी कम होने लगती है और काम करने में आलस आता है।

4. बालों का झड़ने लगते है

थाइराइड होने पर बाल झड़ने लगते हैं कई बार को भौहों के बाल भी बहुत हल्के हो जाते हैं।

5. वजन बढ़ना या घटना

किसी भी बीमारी से पहले शरीर संकेत देने शुरू कर देता है। इसमें वजन एकदम से घटना या बढ़ाना शुरू हो जाता है।
थायराइड में परहेज: जानें, क्या खाएं और क्या ना खाएं

थायराइड के प्रकार


1. Hypothyroid

इसमें थायराइड ग्लैंड सक्रिय नहीं होता, जिससे शरीर में जरूरत के मुताबिक T3, T4 हार्मोन नहीं पहुंच पाता। इसकी वजह से शरीर का वजन अचानक बढ़ जाता है। सुस्ती महसूस होने लगती है। शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। अनियमित पीरियड, कब्ज की शिकायत, चेहरे और आंखों पर सूजन आ जाता है। यह बीमारी 30 से 60 साल की महिलाओं में अधिक होती है।

क्या खाएं

आयोडिन नमक, आयोडिन से भरपूर चीजें, सी फूड, फिश, चिकेन, अंडा, टोंड दूध और उससे बनी चीजें जैसे दही, पनीर, टमाटर, मशरुम, केला, संतरे आदि, फिजिशियन की सलाह पर विटामिन, मिनिरल्स, आयरन सप्लीमेंट्स।

क्या नहीं खाएं

सोयाबीन और सोया प्रोडक्ट रेड मीट, पैकेज्ड फूड, ज्यादा क्रीम वाले प्रोडक्ट जैसे केक, पेस्ट्री, स्वीट पोटैटो, नाशपाती,  स्ट्रॉबेरी, मूंगफली, बाजरा आदि, फूलगोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, शलगम आदि।

2. Hyperthyroid


इसमें थायराइड ग्लैंड बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाता है। T3, T4 हार्मोन जरुरत से अधिक मात्रा में निकलकर ब्लड में घुलने लगता है। इस हालत में शरीर का वजह एकाएक कम हो जाता है। मांशपेशियां कमजोर हो जाती है। भूख ज्यादा लगती है, ठीक से नींद नहीं आती, स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। पीडियड्स में अनियमितता, अधिक ब्लीीडिंग की समस्या, गर्भपात का भी खतरा बना रहता है।

क्या खाएं

हरी सब्जियां, साबूत अनाज, ब्राउन ब्रेड, ओलिव ऑयल, लेमन, हर्बल और ग्रीन टी, अखरोट, जामुन, स्ट्रॉबेरी, गाजर, हरी मिर्च, शहद।

क्या नहीं खाएं

मैदा से बने प्रोडक्ट जैसे पास्ता, मैगी, व्हाइट ब्रेड, सॉफ्ट ड्रिंक, अल्कोहल, कैफीन, रेड मीट, ज्यादा मीठी चीजें जैसे मिठाई, चॉकलेट।

तो दोस्तो आपको ये जानकारी कैसी लगी कॉमेंट में जरूर बताएं, साथ ही अपने सुझाव भी लिखे।


Friday, December 21, 2018

अल्सरेटिव कोलाइटिस : कारण , लक्षण, और डाइट प्लान Ulcerative Colitis symptoms and Diet plan in hindi

अल्सरेटिव कोलाइटिस हिंदी में Ulcerative colitis in Hindi

क्या होता है अल्सरेटिव कोलाइटिस kya hota hai ulcerative colitis:

अल्सरेटिव कोलाइटिस या बढ़िया वृह्यंत एक आंत की बीमारी है जो  मुख्यतः बड़ी आंत और मलाशय की श्लेष्मा झिल्ली के क्षतिग्रस्त होने के कारण होता है। इस रोग में आंतों में घाव हो जाते हैं। जिसमें शरीर की प्रतिरोधक क्षमता खुद ही आंतो के खिलाफ एण्टीबॉडी बनाने लगती है, इन घावों से रक्तस्राव होता है घाव आंत के अंदरूनी भाग में बड़े या छोटे हो सकते हैं। लेकिन इनके मध्य कोई सामान्य झिल्ली नहीं होती। घाव से तरल, आंव व खून का रिसव होता है जो मल के साथ बाहर निकलता है। वैसे तो दवाईयो से इलाज़ होता है पर कई बार ऑपरेट भी किया जाता है।

अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षण ulcerative colitis ke lakshan:



ठीक से पेट का साफ न होना, पतले दस्त लगना, मल के साथ खून आना अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षण है, परंतु ठीक जांच के बाद ही डॉक्टर के द्वारा पुस्टि होती है तो लक्षण दिखाई देने पर जल्द ही पेट रोग विशेषज्ञ को दिखाए।



अल्सरेटिव कोलाइटिस डाइट प्लान हिंदी में Diet plan for ulcerative colitis in Hindi:



सबसे पहले: 1-2 गिलास गुनगुना पानी पियें। तत्पश्चात नित्य क्रिया से निवृत होने के लिए जायें।

सुबह 7:00 बजे: 

खाली पेट: 1 चम्मच मेथी / सौंफ के बीज १ गिलास पानी में रातभर भिगोए।

सुबह 7:15 बजे: 

30-40 मिनट सैर / 30 मिनट दैनिक व्यायाम, योग

सुबह 8:00 बजे नाश्ता: 

अंडे का सफेद भाग / ताजा दही (मसले हुये केले के साथ) / मूंग दाल खिचड़ी / दलिया जिसमे पाचकअनाज शामिल हो / 1-2 चपाती + सब्जियां या दाल / ताजी दही

बीच बीच मे अनार जा जूस/ लौकी का जूस/ गाजर का जूस ले सकते है। चाय का सेवन न करे जरूरत हो तो हर्बल या ग्रीन टी ले।

दोपहर 12:00-1:00 बजे लंच: 

सब्जी / 2-3 चपाती / दाल उबले हुये चावल के साथ / मूंग दाल की खिचड़ी

शाम 5:00 बजे: 

फल / सब्जियों का सूप / अनार का रस / हर्बल चाय

रात 8:00 बजे डिनर: 

फल / सब्जियों का सूप/ सब्जी / 2-3 चपाती / दाल उबले हुये चावल के साथ सफेद चावल खाये न कि ब्राउन / मूंग दाल की खिचड़ी 

सब्जियाँ जो खानी चाहिए:

लौकी, तोरई, टिण्डा, करेला, गाजर, कद्दू, आलू, मूली, शलगम, पत्तेदार सब्जियां कम मात्रा में

सब्जियाँ जो नहीं खानी चाहियें:

लहसुन, टमाटर, अदरक, पालक, शिमला मिर्च, कच्चा सलाद, भिंडी, अर्बी, गोभी, अदरक, ब्रोकोली, मशरूम, मीठे मकई,  कच्ची प्याज, सूखे सेम, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, मटर, बैंगन

फल जो खाने चाहियें:

केले, सेब, नाशपाती

फल जो नहीं खाने चाहियें:

मोसम्मी , आम, अमरूद, संतरे, अंगूर, अनानस, नींबू, बीज के साथ फल

दालें जिनका प्रयोग करना चाहिए:

मूंग दाल, साबुत मूंग दाल

दालें जिनका प्रयोग नही करना चाहिए:

छोले, राजमा, उड़द दाल, चना दाल

मसाले जिनका प्रयोग करना चाहिए:

सौंफ़, जीरा, धनिया, अजवायन

अन्य उत्पाद जिनका प्रयोग नहीं करना चाहिए:

कॉफी, दूध, काजू, अखरोट, आइस क्रीम, नट्स, बिस्कुट, पास्ता, मैगी, व्हाइट ब्रेड, ओट्स, सॉस, अचार, ग्रीन मिर्च, सिरका, शराब, पॉपकॉर्न, मांस, सरसों का तेल, तिल तेल, पनीर, क्रीम, उच्च फाइबर अनाज, सोया प्रोटीन

तो दोस्तो अगर आपको जानकारी पसंद आये तो कॉमेंट जरूर करे और अगर आपके कोई सुझाव हो तो जरूर बताएं।